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हमारे सुपरस्टार सत्ता की ख़ुशामद क्यों करते हैं?

एक बार शोहरत या पैसा, या दोनों हासिल कर लेने के बाद भारतीय अभिनेता, कारोबारी और खिलाड़ी सामाजिक मुद्दों या सरकार के ख़िलाफ़ बोलकर इसे दांव पर लगाने का ख़तरा मोल नहीं लेना चाहते.

(फोटो साभार: वरुण गांधी/फेसबुक)

जनता के लिए योजनाएं जनता के बीच बनानी चाहिए, न कि एसी कमरों में: वरुण गांधी

सुल्तानपुर से भाजपा सांसद वरुण गांधी ने भ्रष्टाचार को बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि हमारे यहां पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है.

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रविशंकर जी! और भी ग़म हैं अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के सिवा…

माहौल का असर है या कुछ और कि श्री श्री रविशंकर को अयोध्या में कोई भी गंभीरता से नहीें ले रहा. लेकिन श्री श्री का सौभाग्य कि वे मीडिया की भरपूर सुर्ख़ियां बटोर रहे हैं.

गजानन माधव मुक्तिबोध (13 नवंबर 1917 – 11 सितंबर 1964)

मुक्तिबोध: उम्र भर जी के भी न जीने का अंदाज़ आया

हरिशंकर परसाई ने मुक्तिबोध को याद करते हुए लिखा कि जैसे ज़िंदगी में मुक्तिबोध ने किसी से लाभ के लिए समझौता नहीं किया, वैसे मृत्यु से भी कोई समझौता करने को तैयार नहीं थे.

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मध्य प्रदेश: चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत

कांग्रेस के उम्मीदवार नीलांशु चतुर्वेदी ने अपने निकटतम उम्मीदवार भाजपा के शंकर दयाल त्रिपाठी को 14,133 मतों के अंतर से हरा दिया.

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शौर्य डोभाल की तरह हर भारतीय को पाकिस्तानियों के साथ काम करने की छूट दे भाजपा सरकार

मोदी सरकार के मंत्रियों को जूनियर डोभाल से सीख लेकर पाकिस्तान और पाकिस्तानियों के प्रति नफ़रत दिखाना बंद कर देना चाहिए.

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जन प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार जनता को मिलना चाहिए: वरुण गांधी

भाजपा सांसद ने कहा, अगर वह ‘गांधी’ नहीं होते तो 29 की उम्र में उन्हें सांसद बनने का मौका नहीं मिलता. ऐसी संस्कृति क्रिकेट और फिल्मों में भी है और इसे ख़त्म किया जाना चाहिए.

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हम भी भारत, एपिसोड 08: शौर्य डोभाल और ​इंडिया फाउंडेशन

हम भी भारत की आठवीं कड़ी में आरफ़ा ख़ानम एनएसए अजीत डोभाल के बेटे शौर्य डोभाल द्वारा संचालित इंडिया फाउंडेशन में हितों के टकराव संबंधी रिपोर्ट पर पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी और द वायर के संपादक एमके वेणु से चर्चा कर रही हैं.

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शौर्य डोभाल की सफाई जवाब से ज़्यादा सवाल खड़े करती है

द वायर की रिपोर्ट पर इंडिया फाउंडेशन की प्रतिक्रिया बेहद असंतोषजनक है. फाउंडेशन द्वारा न तो रिपोर्ट में उठाये गये और न ही निदेशकों को भेजे गए किसी सवाल का स्पष्ट जवाब दिया गया है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

क्या मोदी सरकार के मंत्री अजीत डोभाल के बेटे के संस्थान को फ़ायदा पहुंचा रहे हैं?

विशेष रिपोर्ट: शौर्य डोभाल द्वारा संचालित इंडिया फाउंडेशन में मोदी सरकार के मंत्री निदेशक हैं. यह संस्थान कई ऐसे कॉरपोरेट्स से चंदा लेता है, जो सरकार के साथ सौदे भी करते हैं.

New Delhi: A view of Parliament in New Delhi on Sunday, a day ahead of the monsoon session. PTI Photo by Kamal Singh  (PTI7_16_2017_000260A)

आए दिन देशभक्ति को नए सिरे से परिभाषित क्यों किया जा रहा है?

सरकार के हर फ़ैसले और बयान को देशभक्ति का पैमाना मत बनाइए. सरकारें आएंगी, जाएंगी. देश का इक़बाल खिचड़ी जैसे फ़ैसलों का मोहताज नहीं.

Episode 145

जन गण मन की बात, एपिसोड 145: राजस्थान का विवादित विधेयक और अपराधी नेता

जन गण मन की बात की 145वीं कड़ी में विनोद दुआ राजस्थान सरकार के विवादित विधेयक और अपराधी नेताओं पर चर्चा कर रहे हैं.

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‘एनएसयूआई का प्रत्याथी था, मेरा भाषण वामपंथी नेता ने लिखा, एबीवीपी के ​सीनियर ने चंदा दिया’

कैंपस की कहानियां: इस विशेष सीरीज़ में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता रमेश यादव अपना अनुभव साझा कर रहे हैं.

बीते दिनों उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने भगवा रंग की बसों को हरी झंडी दिखाकर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के बेड़े में शामिल किया. (फोटो साभार: योगी आदित्यनाथ/फेसबुक)

पहले शहर में राजनीति होती थी, अब शहरों की राजनीति होती है

पार्टियां और सरकारें बदलती हैं तो सिर्फ़ नुक्कड़ और चौराहों पर लगे इश्तिहार ही नहीं बदलते बल्कि सारे के सारे शहर का पोशाक बदल जाता है.

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अमेठी में बोले राहुल, भाजपा हमारे कामों को अपना बताने का ड्रामा कर रही है

अमित शाह, स्मृति ईरानी और योगी के दौरे के पहले अमेठी पहुंचे राहुल, भाजपा ने बताया दरकती राजनीतिक ज़मीन बचाने की कवायद.

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सरोजिनी नायडू के इमाम हुसैन को राजनीति ने शिया मुसलमान बना दिया

हमारी बदनसीबी ही है कि जिस सोच ने देश को तीन टुकड़ों में बांट दिया, आज भी हमारे दिमागों में काई की तरह जमी हुई है और सड़ांध फैला रही है.

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हमें किसी ने ब्रेक नहीं दिया, हम एक-एक सीन टपकते-टपकते इकट्ठा हो गए: पंकज त्रिपाठी

पंकज त्रिपाठी जब बिहार के छोटे से गांव से पटना पहुंचे तो उन्हें डॉक्टर बनना था, लेकिन वह छात्र राजनीति में कूद पड़े. राजनीति से रंगमंच के रास्ते उनका सफर मुंबई तक पहुंच गया है.

New Delhi: President Ram Nath Kovind, Vice President M. Venkaiah Naidu, Prime Minister Narendra Modi poses with new members of cabinet after the reshuffle at Rashtrapati Bhavan in New Delhi on Sunday.   PTI Photo (PTI9_3_2017_000040A) *** Local Caption ***

मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल पाखंड से ज़्यादा कुछ नहीं

यह सरकार लघु उद्योगों, बेरोजगारी और कृषि क्षेत्र के हालातों को लेकर शुतुरमुर्गी रवैया अपनाए हुए है. समस्याओं को स्वीकार न करने से समस्याएं समाप्त नहीं हो जाती हैं. न ही कैबिनेट में फेरबदल कर देने से ही इन्हें सुलझाया जा सकता है.

The President, Shri Ram Nath Kovind, the Vice President, Shri M. Venkaiah Naidu and the Prime Minister, Shri Narendra Modi with the newly inducted Ministers after a Swearing-in Ceremony, at Rashtrapati Bhavan, in New Delhi on September 03, 2017.

मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार, नौकरशाहों का बोलबाला

केंद्रीय मंत्रिमंडल में चार मंत्रियों का प्रमोशन. धर्मेंद्र प्रधान, पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण और मुख्तार अब्बास नकवी कैबिनेट मंत्री बने. नौ नए चेहरे राज्य मंत्री बने.

Akhilesh Yadav, state party president and son of the Samajwadi Party President Mulayam Singh Yadav, speaks during a news conference at their party headquarters in the northern Indian city of Lucknow March 6, 2012. India's Congress party trailed in fourth place as vote counting neared its end in Uttar Pradesh on Tuesday, a bitter election blow to Rahul Gandhi who had staked his political future on reviving his party's fortunes in the populous northern state. The runaway winner was the socialist Samajwadi Party, which means former wrestler Mulayam Singh Yadav will become chief minister for a fourth term since 1989, ousting the flamboyant lower-caste leader Mayawati. REUTERS/Stringer (INDIA - Tags: POLITICS ELECTIONS) - RTR2YX69

कोई भाजपा से अलग हो तो भूमाफिया होता है, उससे जुड़ जाए तो पवित्र हो जाता है: अखिलेश

सपा अध्यक्ष ने कहा, जिन्हें पार्टी छोड़कर जाना हैं वे बिना कोई बहाना बनाए जा सकते हैं ताकि पता चले कि बुरे वक़्त में कौन साथ है.

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केरल की हिंसक राजनीति में कोई भी पक्ष निर्दोष नहीं है

केरल में 1983 से लेकर सितंबर 2009 के दरमियान 91 राजनीतिक हत्याएं हुईं. इनमें 31 सदस्य आरएसएस-बीजेपी के, 33 माकपा के और 14 कांग्रेस-आई के मारे गए.

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केरल की तरह हिंसा भाजपा शासित राज्यों में होती तो क्या होता: अरुण जेटली

केरल में हिंसा का हल खोजने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई गई. जेटली मारे गए आरएसएस कार्यकर्ता के परिजनों से मिले.

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46 फ़ीसदी कुपोषित बच्चों वाले उत्तर प्रदेश में सरकार मंदिरों में गाय के दूध का प्रसाद बांटेगी

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, एक साल तक के बच्चों की मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश पूरे देश में टॉप पर है. बिहार के बाद सबसे ज़्यादा ठिगने बच्चे उत्तर प्रदेश में ही हैं.

A U.S. Marine tank launches flamethrower in action near Da Nang, Vietnam, 1965.  REUTERS/Courtesy U.S. Army

यह याद रखना चाहिए सरकार का विरोध करना अपराध नहीं है

आज के नव उग्र-राष्ट्रवादी समय में यह याद करना फ़ायदेमंद होगा कि परिपक्व राष्ट्र युद्ध के समय भी साधारण व्यक्तियों या सुपरस्टारों को भी आधिकारिक ‘लकीर’ से अलग चलने की आज़ादी देता है.

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द मिनिस्ट्री आॅफ अटमोस्ट हैपीनेस: प्रेम, हिंसा और भय का आख्यान

अरुंधति रॉय आज के भारत के सीमांत पर उपज रही कल्पनाओं, हसरतों, प्रतिरोधों और गरिमा से जीने की ललक को इस नये उपन्यास में उकेरने का प्रयास करती हैं.

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‘अनशन में चतुर खिलाड़ी नहीं मरते. वे एक आंख मेडिकल रिपोर्ट पर और दूसरी मध्यस्थ पर रखते हैं’

हरिशंकर परसाई का व्यंग्य: बाबा ने शान्ति से कहा, ‘देवी, तू तो ‘इशू’ है. ‘इशू’ से थोड़े ही पूछा जाता है. गोरक्षा आंदोलन वालों ने गाय से कहां पूछा था कि तेरी रक्षा के लिए आंदोलन करें या नहीं.’

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दूसरे देशों में गाय दूध के लिए होती है, हमारे यहां दंगा करने के लिए

जनता जब आर्थिक न्याय की मांग करती है, तब उसे किसी दूसरी चीज में उलझा देना चाहिए. क्रांति की तरफ बढ़ती जनता को हम रास्ते में ही गाय के खूंटे से बांध देते हैं.

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क्या मोदी सरकार में एक मुसलमान के सामने ज़िंदा बचे रहना ही सबसे बड़ी चुनौती है?

नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले तीन साल के राज में ऐसा बहुत कुछ हुआ जिसने मुसलमानों में असुरक्षा और भय की तीव्र भावना पैदा करने का काम किया.

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आख़िरकार दुनिया ने विश्वगुरु के ‘स्मार्ट कल्चर’ का लोहा मान लिया

‘जनता की मांग पूरी करने में इतनी बुद्धि, वक़्त और पैसा ठोंक दोगे तो अगला चुनाव कैसे लड़ोगे? जनता जो मांग रही है, वो सच में दे दिया तो अगले चुनावी घोषणापत्र में क्या सबको मंगल की सैर कराने का वादा करोगे?’

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विधायिका में मुसलमानों की घटती नुमाइंदगी लोकतंत्र के लिए बेहतर संकेत नहीं है

आंकड़े बताते हैं कि देश में मुसलमानों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बहुत तेज़ी से गिरता जा रहा है, जिसका मतलब होगा कि वह पूरी तरह से हाशिये पर चले जाएंगे.

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राजस्थान में पार्टी चापलूसों का दरबार बनती जा रही है: भाजपा विधायक

सांगानेर विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने दावा किया कि संघ से जुड़े सभी संगठन वसुंधरा सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही.

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इंदिरा गांधी आज तक की सबसे स्वीकार्य प्रधानमंत्री: प्रणब

‘इंडियाज इंदिरा: अ सेंटेनियल ट्रिब्यूट’ नाम की किताब का विमोचन करते हुए राष्ट्रपति ने देश की पहली महिला प्रधानमंत्री से जुड़े अनुभव साझा किए.

फाइल फोटो पीटीआई

क्या भाजपा को वाक़ई मुसलमानों की चिंता हैं?

मुसलमानों के एक तबके में भाजपा को लेकर स्वीकार्यता बढ़ी है, लेकिन भाजपा की तरफ़ से ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला है कि मुसलमानों के लिए कुछ किया हो.

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संघ, योगी आदित्यनाथ और हिंदू राष्ट्र का सपना

यूपी के चुनावों की जीत ने हिंदुत्व की ताकतों को यह आत्मविश्वास दिया है कि वह अपने बुनियादी सांस्कृतिक एजेंडे को लेकर अब अस्पष्टता न रखें बल्कि खुलकर सामने आएं.

INDIA ELECTION

आख़िर लालू बहुजन समाज को शंकराचार्य बनने का सपना क्यों दिखा रहे हैं?

आप शंकराचार्यों की बेअसर पड़ चुकी पीठों पर काबिज़ होने के बजाय ज्ञान, विचार और सत्ता की नई पीठों की रचना के लिए क्यों नहीं आवाज़ उठाते, लालू जी!