Racism

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क्या गांधी नस्लवादी थे?

उम्र के दूसरे दशक में गांधी निस्संदेह एक नस्लवादी थे. वे सभ्यताओं के पदानुक्रम यानी ऊंच-नीच में यक़ीन करते थे, जिसमें यूरोपीय शीर्ष पर थे, भारतीय उनके नीचे और अफ्रीकी सबसे निचले स्थान पर. लेकिन उम्र के तीसरे दशक तक पहुंचते-पहुंचते उनकी टिप्पणियों में अफ्रीकियों के भारतीयों से हीन होने का भाव ख़त्म होता गया.

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चित्रकथा: अमेरिका के नस्लीय इतिहास के बर्बर चेहरे से रूबरू कराता पहला स्मारक

अमेरिका में सदियों से चले आ रहे अश्वेत उत्पीड़न और नस्लीय हिंसा के शिकार हज़ारों अश्वेत पीड़ितों की याद में देश का पहला स्मारक ‘द नेशनल मेमोरियल फॉर पीस एंड जस्टिस’ अलबामा के मॉन्टगोमेरी में पिछले हफ्ते खोला गया.

साभार: राधाकृष्ण प्रकाशन

क्या ‘जूठन’ पाठ्यक्रमों से बाहर कर दी जाएगी?

हिमाचल विश्वविद्यालय में ओम प्रकाश वाल्मीकि की ‘जूठन’ बीते 3 सालों से पढ़ाई जा रही थी, तब भावनाएं अचानक कहां से आहत हो गईं? क्या इसका ताल्लुक़ राज्य में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन से है?

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अन्य संस्कृतियों के प्रति अज्ञानता कट्टर राष्ट्रवाद को बढ़ावा देती है: नोबेल पुरस्कार विजेता

भारत आए नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर डेविड जोनाथन ग्रॉस ने कहा कि कट्टर राष्ट्रवाद के माहौल में ज्ञान की ज्योति जलाने की ज़िम्मेदारी युवाओं पर है.

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‘ये महसूस कराने के लिए धन्यवाद कि मुझे गोरे लोगों के साथ नहीं लिया जा सकता’

अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने एक ट्वीट कर कहा, मुझे गोरे और सुंदर लोगों के साथ फिल्म में नहीं लिया जा सकता क्योंकि मैं सांवला हूं और सुंदर नहीं दिखता.

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गोरापन और भारतीय मन

नोएडा में अफ्रीकी छात्रों पर हमले की रिपोर्टिंग के दौरान जब हम एक छात्र जेसन से मिले तो उन्होंने बताया कि पड़ोस की महिला बच्चों को डराने के लिए उनका नाम लेती हैं. वो हैरान थे कि वह किसी को डराने की चीज़ कैसे हो सकते हैं. मतलब मां-बाप ट्रेनिंग दे रहे होते हैं कि वो काला है, वो तुम्हें नुकसान पहुंचाएगा.

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अगर समाज में आलोचना सहन करने की क्षमता कम हो जाएगी तो इसका असर संगीत पर भी पड़ेगा: अनुष्का शंकर

मशहूर सितार वादक पंडित रविशंकर की बेटी अनुष्का शंकर ख़ुद भी एक सफल सितारवादक और संगीतकार हैं. भारतीय मूल की अनुष्का लंदन में पैदा हुईं और तीन अलग-अलग महाद्वीपों में पली-बढ़ीं. अलग-अलग संस्कृतियों में हुई इस परवरिश पर वे कहती हैं, ‘इन मिली-जुली संस्कृतियों के बगैर मैं वो नहीं होती जो मैं हूं- मेरा पासपोर्ट महज़ कागज़ का टुकड़ा है.’