Raghubar Das

झारखंड: आदिवासी अस्मिता पर चुनाव जीती सरकार के कार्यकाल में भी आदिवासियों का दमन क्यों जारी है?

चाहे केंद्र में यूपीए की सरकार रही हो या वर्तमान एनडीए की, नक्सल अभियान के नाम पर आदिवासियों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा हिंसा जारी रहती है. इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि झारखंड में माओवादी हिंसा एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन इसे रोकने के नाम पर निर्दोष आदिवासियों के दमन का क्या औचित्य है? क्यों अभी भी आदिवासियों की पारंपरिक व सांस्कृतिक व्यवस्थाओं को दरकिनार कर सुरक्षा बल उनके क्षेत्र में घुसपैठ कर उन्हें परेशान कर रहे हैं? 

Ranchi: Jharkhand Mukti Morcha (JMM) executive president Hemant Soren addresses a press conference ahead of Jharkhand Assembly Elections, in Ranchi, Sunday, Sept. 15, 2019. (PTI Photo) (PTI9_15_2019_000038B)

झारखंडः कैसा रहा हेमंत सोरेन का एक साल का कार्यकाल?

झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने पिछले एक साल में जन अपेक्षाओं के अनुरूप कुछ निर्णय तो लिए हैं, लेकिन चुनाव में गठबंधन द्वारा उठाए गए मुद्दों, घोषणा-पत्र में किए गए वादों एवं राज्य की आवश्यकताओं की तुलना में अभी भी कुछ ख़ास काम देखने को नहीं मिला है.

झारखंड: पहली कैबिनेट बैठक में हेमंत सरकार ने वापस लिए पत्थलगड़ी राजद्रोह मामले

पत्थलगड़ी आंदोलन की शुरुआत होने के बाद कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि उन्हें ‘पुलिस क्रूरता’ का सामना करना पड़ा. 172 लोगों के खिलाफ अन्य मामलों के साथ राजद्रोह के कुल 19 मामले दर्ज किए गए थे. सभी मामलों को वापस लेने का फैसला किया गया है.

देश में राजनीति के नई करवट लेने के संकेत मिल रहे हैं

सीएए और एनआरसी को लेकर हो रहे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन और व्यापक स्तर पर संविधान की बुनियाद पर हमले को लेकर बनी समझ भारतीय राजनीति को एक महत्वपूर्ण बिंदु पर ले आए हैं. इस पृष्ठभूमि में क्षेत्रीय और उप-राष्ट्रीय अस्मिताओं की बढ़ती मुखरता नई राजनीति के लिए एक मज़बूत ज़मीन तैयार कर रही है. तमाम संसाधनों और हिंदू वोट बैंक के बावजूद मोदी और शाह इसे हल्के में नहीं ले सकते.

झारखंड: हेमंत सोरेन 11वें मुख्यमंत्री बने, मौजूदगी दर्ज करा विपक्षी नेताओं ने दिखाई एकता

रांची के मोरहाबादी मैदान में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन 2013 के बाद दूसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने हैं. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा. रामेश्वर उरांव और कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम एवं राष्ट्रीय जनता दल के एक मात्र विधायक सत्यानंद भोक्ता ने भी मंत्री पद की शपथ ली.

क्या झारखंड चुनाव परिणाम नागरिकता क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ जनमत संग्रह है?

साल 2000 में झारखंड राज्य गठन के बाद ये पहला चुनाव है जब किसी ग़ैर-भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की अगुवाई वाला गठबंधन क्या एक स्थायी सरकार दे पाएगा.

हेमंत सोरेन की जाति पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर रघुबर दास के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की शिकायत पर रघुबर दास के ख़िलाफ़ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि रघुबर दास ने एक चुनावी रैली के दौरान सोरेन की जाति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मध्य प्रदेश में नागरिकता कानून लागू करने से किया इनकार

संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने बुधवार को कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की संविधान बचाओ यात्रा निकाली. कमलनाथ ने कहा कि एनपीआर को हम लाना चाहते हैं, लेकिन इसके साथ एनआरसी को जोड़कर नहीं.

झारखंड के हितों के ख़िलाफ़ रहा तो नागरिकता क़ानून और एनआरसी को लागू नहीं करेंगे: हेमंत सोरेन

झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने मंगलवार की रात राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया. 29 दिसंबर को लेंगे झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ.

झारखंड में भाजपा क्यों हारी?

वीडियो: झारखंड विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी भाजपा को करारी शिकस्त देते हुए झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन बड़ी जीत हासिल करने की ओर बढ़ रहा है. इस मुद्दे पर द वायर के डिप्टी एडिटर अजॉय आशीर्वाद से विशाल जायसवाल की बातचीत.

झारखंड में मिली हार के साथ भाजपा ने पिछले एक साल में गंवाए पांच राज्य

झारखंड हारने के बाद केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा का शासन देश के मात्र 35 प्रतिशत हिस्से तक सिमट गया है, जबकि 2017 में देश के 71 प्रतिशत हिस्से पर उसका नियंत्रण था. लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत झारखंड में 55 प्रतिशत से अधिक था तो हरियाणा में 58 प्रतिशत था. इन दोनों राज्यों में विधानसभा चुनावों में उसका वोट प्रतिशत गिरकर क्रमश: 33 एवं 36 प्रतिशत पर आ गया.

झारखंड चुनाव: झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन ने 47 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत किया हासिल

झारखंड विधानसभा की 81 सीटों के चुनावों के अंतिम परिणाम के अनुसार, जहां भाजपा को सिर्फ 25 सीटें प्राप्त हुईं, वहीं विपक्षी गठबंधन को कुल 47 सीटें प्राप्त हुईं. गठबंधन में 30 सीटें हासिल कर झामुमो राज्य में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, वहीं कांग्रेस को 16 और राजद को एक सीट प्राप्त हुई.

रघुबर दास को पटखनी देने वाले सरयू राय ने कहा, ज़रूरत पड़ी तो महागठबंधन को समर्थन दूंगा

झारखंड के पूर्व मंत्री सरयू राय ने टिकट न मिलने पर रघुबर दास मंत्रिमंडल और फिर भाजपा से इस्तीफ़ा दे दिया था. निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे सरयू राय जमशेदपुर (पूर्व) सीट पर झारखंड के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुबर दास से पांच हज़ार वोटों से आगे चल रहे हैं.

झारखंड चुनाव परिणाम लाइव: कांग्रेस-झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन ने बनाई मजबूत बढ़त, भाजपा पीछे

चुनाव आयोग के अनुसार, शुरुआती रूझानों में झारखंड मुक्ति मोर्चा-कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल का गठबंधन 41 सीटों पर आगे चल रहा है जबकि भाजपा को 28 सीटों पर बढ़त हासिल है. राज्य में सरकार बनाने के लिए किसी दल या गठबंधन को 41 सीटों की जरूरत होगी.

झारखंड में डायन बताकर महिलाओं की हत्या किसी भी राजनीतिक दल के लिए मुद्दा क्यों नहीं है?

डायन बताकर महिलाओं की हत्या किए जाने के मामले में झारखंड पिछले कई सालों से लगातार देश में शीर्ष पर है. इसके बावजूद किसी भी राजनीतिक दल की प्राथमिकता में यह मुद्दा नज़र नहीं आता.