Rape Victim

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बुलंदशहर: ‘प्रशासन ने अगर सुनी होती तो हमारी बेटी ज़िंदा होती’

वीडियो: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले में कथित तौर पर बलात्कार के बाद 17 नवंबर को नाबालिग को ज़िंदा जला दिया गया था, जिसके बाद दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. द वायर के शेखर तिवारी और ज़ोबिया सलाम की रिपोर्ट.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

क्या महिलाओं की सुरक्षा उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में भी है?

उन्नाव ज़िले की बांगरमऊ विधानसभा सीट पर 3 नवंबर को उपचुनाव है. यह सीट नाबालिग के बलात्कार के दोषी पाए गए विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सदस्यता रद्द होने पर ख़ाली हुई थी. महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते अपराधों के बीच यहां हुई एक चुनावी सभा में मुख्यमंत्री के भाषण से उनकी सुरक्षा की बात नदारद रही.

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उत्तर प्रदेश: रेप आरोपी ने की पीड़िता के पिता की हत्या, पुलिस पर लापरवाही का आरोप

मामला फिरोज़ाबाद ज़िले का है. अगस्त 2019 में आरोपी ने एक नाबालिग लड़की से बलात्कार किया था. परिजनों का कहना है कि आरोपी लगातार उन पर केस वापस लेने के लिए दबाव बनाते हुए धमकियां दे रहा था, लेकिन शिकायत के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की.

(फोटो साभार: IndiaRail Info)

उन्नावः आरोपियों को ज़मानत मिलने पर खुद को आग लगाने वाली बलात्कार पीड़िता की अस्पताल में मौत

उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले में पुलिस कार्यालय के सामने 16 दिसंबर को युवती ने ख़ुद को आग लगा ली थी. पीड़िता ने दो अक्टूबर को अवधेश नाम के शख्स पर बलात्कार का आरोप लगाकर उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया था. इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से उसे ज़मानत मिल गई थी.

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बिहार: गैंगरेप की कोशिश के दो दिन बाद नाबालिग को घर में घुसकर मारी गोली

मामला रोहतास ज़िले के रामोडीह गांव का है, जहां चार लोगों ने रविवार सुबह एक नाबालिग से बलात्कार का प्रयास किया. मंगलवार को ख़ुद को मीडियाकर्मी बताकर आरोपियों के परिजन पीड़िता के घर पहुंचे और उसे गोली मार दी.

(फोटो साभार: IndiaRail Info)

यूपी के उन्नाव में आरोपियों को ज़मानत मिलने से आहत बलात्कार पीड़िता ने ख़ुद को आग लगाई

तेइस वर्षीय युवती ने उन्नाव ज़िला पुलिस कार्यालय के सामने ख़ुद को आग लगा ली. पीड़िता ने इस साल दो अक्‍टूबर को चार लोगों के ख़िलाफ़ बलात्कार का मामला दर्ज कराया था. हाल ही में इस मामले में आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई थी.

Students shout slogans during a protest against the alleged rape and murder of a 27-year-old woman, in Kolkata, India, December 2, 2019. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

देश में असुरक्षित महिलाएं और नेताओं के बिगड़े बोल

महिलाओं की सुरक्षा की चिंता और उनको हिंसा, बलात्कार आदि से बचाने को लेकर कड़े क़ानून बनाने का नेताओं का आश्वासन उनके दिए महिला-विरोधी बयानों के बरक्स बौना नज़र आता है.

Mumbai: Students display placards during a demonstration over rape incidents in the view of the recent rape and murder of Hyderabad veterinarian, at Labaug in Mumbai, Sunday, Dec. 1, 2019. (PTI Photo)  (PTI12_1_2019_000127B)

वे सात कारण, जो बताते हैं कि बलात्कार के मामले में मौत की सज़ा क्यों कारगर नहीं है

भारत जैसे देश में, जहां बलात्कार के मामलों में अदालत की सुनवाई आरोपी के बजाय पीड़ित के लिए ज्यादा मुश्किल भरी होती हैं, वहां कुछ चर्चित मामलों में सज़ा कड़ी कर देने से किसी और को ऐसा करने से रोकना मुश्किल है. ऐसे अधिकतर मामले या तो अदालतों की फाइलों में दबे पड़े हैं या सबूतों के अभाव में ख़ारिज कर दिए जाते हैं.

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बच्चों का यौन शोषण रोकने के लिए करीब 1500 रेप पीड़िताओं ने सुप्रीम कोर्ट को लिखा पत्र

देश में बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं पर देश की 1500 बलात्कार और यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर दखल देने की मांग की है.

मद्रास हाईकोर्ट (फोटो: पीटीआई)

बलात्कार पीड़िता मेडिकल बोर्ड की सहमति के बिना करा सकती हैं गर्भपात: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी कानून, 1971 की धारा तीन के प्रावधानों के तहत गर्भपात कराया जा सकता है. पीड़िता को बेवजह अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.

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उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में यौन उत्पीड़न के बाद दलित महिला ने की आत्महत्या

महिला जब पति के साथ थाने शिकायत करने गई तो उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई. घटनास्थल से एक सुसाइड नोट मिला है जिसमें दो व्यक्तियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है.

(फोटो: पीटीआई)

पिता ने दुष्कर्म किया तो पीड़िता की गवाही के आधार पर हो सकती है सज़ा: दिल्ली हाईकोर्ट

अदालत ने एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की, जिसे अपनी 17 साल की बेटी से बलात्कार के आरोप में सज़ा सुनाई गई थी.

(फोटो: पीटीआई)

बलात्कार पीड़िता की चुप्पी सहमति का सबूत नहीं: उच्च न्यायालय

बलात्कार के एक मामले में सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी की यह दलील आधारहीन है कि घटना के बारे में पीड़िता की चुप्पी उसके सहमति से यौन संबंध बनाने का प्रमाण है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रायटर्स)

बलात्कार के मामलों की सुनवाई दो महीने में पूरी करना संभव नहीं: रिपोर्ट

कानून मंत्रालय द्वारा कराए एक अध्ययन में कहा गया है कि पीड़िता का ही बयान आने में औसतन आठ महीने का वक्त लग जाता है.