Ravish Kumar

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मीडिया बादशाह की जूती हो चुकी है

क्या आम्रपाली और जेपी समूह के सताए फ्लैट ओनर पुलिस की गोली से मारे जा रहे किसानों को लेकर व्यथित हुए होंगे, क्या जंतर मंतर पर होने वाले धरनों से सहानुभूति रखते होंगे? क्या कभी नर्मदा के विस्थापितों के लिए अनशन कर रहीं मेधा पाटकर के लिए कुछ सोचा होगा?

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Nation on the occasion of 71st Independence Day from the ramparts of Red Fort, in Delhi on August 15, 2017.

प्रधानमंत्री से कौन पूछेगा कि पनामा पेपर मामले में क्या प्रगति हुई है?

अगर दो लाख शेल कंपनियां बंद हुई हैं, जो ब्लैक मनी को व्हाइट कर रही थीं तो क्या प्रधानमंत्री बता सकते हैं कि कितने लाख लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज हुए है?

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‘सबसे बड़ा झूठ यह कहना है कि भारत का कोई दल भ्रष्टाचार से लड़ रहा है’

अगर सारे दल बीजेपी में शामिल हो जाएं तो हो सकता है कि प्रधानमंत्री टीवी पर ऐलान कर दें कि भारत से राजनीतिक भ्रष्टाचार ख़त्म हो गया है क्योंकि सब मेरे साथ आ गए हैं.

फोटो: पीटीआई

क्या भारत की राजनीति आयकर विभाग और सीबीआई तय करेंगे?

आयकर विभाग और सीबीआई भारत की राजनीति तय कर रहे हैं. भ्रष्टाचार तो मिटा नहीं, राजनीति तय कर देना भी कम बड़ा योगदान नहीं है.

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ममता बनर्जी से पूछा जाना चाहिए कि सांप्रदायिकता से निपटने का आपका बेंचमार्क क्या है?

ममता न तो अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के आरोपों-अफवाहों पर लगाम कस पा रही हैं और न ही बहुसंख्यक उग्रता पर. आखिर सांप्रदायिकता को रोकने में बहुसंख्यक वोटों की सरकारों की तरह अल्पसंख्यक वोटों की सरकारें भी क्यों लाचार नज़र आती हैं?

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प्रोपेगैंडा तय करता है कि ख़ून का दाग़ भीड़ पर लगे और नेता निर्दोष नज़र आएं

भारत में सब हत्या करने वाली भीड़ को ही दोष दे रहे हैं. कोई नहीं जांच करता कि बिना आदेश के जो भीड़ बन जाती है उसमें शामिल लोगों का दिमाग़ किस ज़हर से भरा हुआ है.

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मीडिया बोल, एपिसोड 04: हिंदी मीडिया आज इतना बेदम और ग़ैर-पेशेवर क्यों?

मीडिया बोल की चौथी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, एनडीटीवी के सीनियर एंकर रवीश कुमार और वरिष्ठ पत्रकार विद्या सुब्रह्मण्यम के साथ हिंदी मीडिया के ग़ैर-पेशेवर रवैये पर चर्चा कर रहे हैं.

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कौन हैं जो देवता होने की योग्यता रखते हैं, जिनके लिए पत्रकार नारद बन जाएं: रवीश कुमार

मुसलमान को मारने के लिए आपको तैयार नहीं किया जा रहा है. एक दिन किसी को भी मारने के लिए आपका इस्तेमाल किया जाएगा.

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‘एंटी रोमियो दस्ते के लोगों को किसी से प्रेम हो गया तो क्या होगा’

एंटी रोमियो दस्ते के किसी को प्रेम हो जाए तो प्रेम की तड़प में वे किसी पुराने कुर्ते की तरह चराचरा कर फट जाएंगे. दुआ करूंगा कि इस दस्ते को कभी किसी से प्यार न हो. प्रार्थना करूंगा कि उन्हें कम से कम किशोर कुमार के गाने सुनने की सहनशक्ति मिले.