Reliance Industries

New Delhi: Reliance Industries Limited Chairman Mukesh Ambani addresses the 24th Annual International Conference on Mobile Computing and Networking (ACM Mobicom) 2018, in New Delhi, Tuesday, Oct 30, 2018. (PTI Photo/Atul Yadav) (PTI10_30_2018_000038B)

रिलायंस के कर्मचारियों के वेतन में होगी 10-50 प्रतिशत की कटौती

मुकेश अंबानी ने अपने पूरे साल का वेतन छोड़ने का निर्णय किया है. कार्यकारी निदेशक, कार्यकारी समिति के सदस्यों समेत रिलायंस के निदेशक मंडल के सदस्यों का वेतन 30 से 50 प्रतिशत तक काटा जाएगा.

केवी चौधरी. (फोटो: पीटीआई)

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पूर्व सतर्कता आयुक्त केवी चौधरी को बनाया स्वतंत्र निदेशक

पिछले साल सीबीआई में पूर्व निदेशक आलोक वर्मा और पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच हुए विवाद के साथ कई अन्य मामलों के कारण पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त केवी चौधरी का चार साल का कार्यकाल विवादों से भरा रहा था.

(फोटो: रॉयटर्स)

भारत पेट्रोलियम के निजीकरण का रास्ता साफ, रिलायंस लगा सकती है बोली

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी भारत पेट्रोलियम के राष्ट्रीकरण संबंधी कानून को 2016 में रद्द कर दिया था. ऐसे में भारत पेट्रोलियम को निजी या विदेशी कंपनियों को बेचने के लिए सरकार को संसद की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी.

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया (फोटो: पीटीआई)

जियो इंस्टिट्यूट को ‘उत्कृष्ट संस्थान’ का दर्जा देना एक साहसिक निर्णय: अरविंद पनगढ़िया

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि भारत के माहौल को देखते हुए ऐसी कोई चीज़ जो अभी अस्तित्व में न हो, उसकी घोषणा करने से पहले कोई और प्रधानमंत्री दो-तीन बार सोचता.

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क्या कहता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘अंबानियों’ से यह अनुराग?

बेस्ट ऑफ 2018: प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने अपने बेशकीमती चार साल मुकेश अंबानी जैसे उद्योगपतियों व उनके परिवारों के प्रति अनुराग के प्रदर्शन और आम देशवासियों के तिरस्कार व ‘सबका साथ सबका विकास’ के अपने नारे के द्वेषपूर्ण क्रियान्वयन में बर्बाद कर दिया है.

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मोदी सरकार आने के बाद 16000 गुना बढ़ा अमित शाह के बेटे की कंपनी का टर्नओवर

विशेष रिपोर्ट: नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और अमित शाह के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद अमित शाह के बेटे जय शाह के व्यवसाय में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी दर्ज की गई.

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मीडिया का काम सवाल पूछना है, न कि सत्ता से गलबहियां करना

मोदी की पहचान एक ‘संवाद में माहिर’ नेता की है, लेकिन कुर्सी पर बैठने के बाद से अब तक उन्होंने एक भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं की है. किसी लोकतंत्र के प्रधानमंत्री द्वारा प्रेस कांफ्रेंस करना मीडिया पर किया जाने वाला एहसान नहीं है, बल्कि सरकार की ज़िम्मेदारी है.