Right to Information Act

आरटीआई क़ानून पर जस्टिस लोकुर ने चिंता जताई, कहा- कोई नहीं जानता पीएम केयर्स फंड कहां जा रहा

आरटीआई क़ानून की 16वीं वर्षगांठ के मौक़े पर एक कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन लोकुर ने कहा कि एक लोकतांत्रिक गणराज्य के कामकाज के लिए सूचना महत्वपूर्ण है. इसका उद्देश्य सुशासन, पारदर्शिता व जवाबदेही को स्थापित करना है. पीएम केयर्स फंड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस पर आरटीआई एक्ट लागू न होने के चलते नागरिकों को पता ही नहीं है कि इसका पैसा कहां जा रहा है.

आरटीआई क़ानून: सूचना आयोगों ने संभावना के बावजूद 95 फ़ीसदी मामलों में जुर्माना नहीं लगाया

आरटीआई क़ानून की 16वीं वर्षगांठ के मौके पर पारदर्शिता की दिशा में काम करने वाले संगठनों सतर्क नागरिक संगठन और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट इस क़ानून के कार्यान्वयन की दयनीय तस्वीर पेश करते हैं. आलम ये है कि देश के 26 सूचना आयोगों में 2,55,602 अपील तथा शिकायतें लंबित हैं. इसमें कहा गया है कि आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती सूचना चाहने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

कोर्ट द्वारा सूचना आयोग के फ़ैसलों पर रोक लगाना आरटीआई के लिए ख़तरनाक: पूर्व सूचना आयुक्त

पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेष गांधी ने कहा कि आरटीआई क़ानून में स्पष्ट रूप से लिखा है कि सूचना आयोग के फ़ैसलों के ख़िलाफ़ कोई अपील दायर नहीं की जा सकती है, इसके बावजूद विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर रोक लगाई जा रही है.

सीआईसी ने ऑक्सीजन आपूर्ति संंबंधी समिति की जानकारी मांगी तो केंद्र ने कहा- ऐसी समिति बनी ही नहीं

सीआईसी के आदेश के अनुपालन में एक पत्र में सरकार की ओर से लिखा गया है कि कोविड-19 के मद्देनज़र ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) सचिव की अध्यक्षता में ऐसी कोई समिति गठित नहीं की गई थी. इस पर आरटीआई के तहत जानकारी मांगने वाले कार्यकर्ता ने कहा है कि जब ऐसी कोई समिति अस्तित्व में ही नहीं थी फ़िर सरकार ने सीआईसी के समक्ष उस समिति के रिकॉर्ड को सार्वजनिक न करने की लड़ाई क्यों लड़ी.

केंद्र सरकार 10 दिनों के भीतर मेडिकल ऑक्सीजन से जुड़ा आंकड़ा जारी करे: सीआईसी

देश में अप्रैल-मई में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन की कमी की वजह से देशभर के कई कोविड-19 मरीजों की मौत हो गई थी. इनमें से दिल्ली के दो अस्पतालों में ही 40 से अधिक कोरोना मरीजों की ऑक्सीजन की कमी से मौत हुई थी.

एमपी: कॉलेज ने दस्तावेज़ों के कमरे को ‘भूतहा’ बताते हुए आरटीआई का जवाब देने से इनकार किया

मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर के एक मेडिकल कॉलेज का मामला. आरटीआई कार्यकर्ता ग्वालियर स्थित गजरा राजा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रवेश में कथित विसंगतियों की जांच चाहते हैं कि बाहरी लोगों ने धोखाधड़ी करके स्थानीय निवासियों के कोटे में प्रवेश हासिल कर लिया है.

योगी सरकार का पूर्व आईपीएस अफ़सर की अनिवार्य सेवानिवृत्ति संबंधी दस्तावेज़ देने से इनकार

पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को गृह मंत्रालय द्वारा बीते 23 मार्च को अनिवार्य सेवानिवृति दी गई थी. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इससे संबंधित दस्तावेज़ देने से मना कर दिया है. ठाकुर ने कहा है कि सरकार द्वारा मनमाने ढंग से उन्हें सेवा से निकाला जाना और अब उनकी जीविका से संबंधित सूचना भी नहीं देना दुखद है तथा सरकार की ग़लत मंशा को दिखाता है.

आरटीआई की पहली और दूसरी अपील पर जवाब देने के लिए समयसीमा निर्धारित होः मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता को यह भी कहा है कि वे बताएं कि क्या एक ऐसी ईमेल आईडी बना सकते हैं जो कम से कम समय के भीतर ‘जीवन और स्वतंत्रता’ से जुड़े मामलों का निपटारा कर सके.

दिल्ली पुलिस ने अपने कर्मियों के ख़िलाफ़ मिली 92 फीसदी शिकायतों पर नहीं की कार्रवाई: आरटीआई

एक आरटीआई के जवाब में दिल्ली पुलिस ने बताया कि बीते साढ़े तीन साल में उन्हें अपने कर्मचारियों के ख़िलाफ़ क़रीब उन्नीस हज़ार शिकायतें मिलीं, जिनमें से 8.2 प्रतिशत पर कार्रवाई की गई.

वित्त मंत्रालय ने गोपनीयता के आधार पर भारतीयों के स्विस बैंक खातों का ब्योरा देने से मना किया

आरटीआई के तहत वित्त मंत्रालय से स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारतीयों के खातों के बारे में मिली जानकारी का ब्योरा मांगा गया था. मंत्रालय से दूसरे देशों से काले धन के बारे में उसे मिली सूचना के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी.

सीबीआई भ्रष्टाचार मामलों में सूचना से इनकार के लिए आरटीआई में छूट की आड़ नहीं ले सकती: सीआईसी

सूचना आयुक्त दिव्य प्रकाश सिन्हा ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि आयोग मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में सहमत है और सूचना देने से इनकार के लिए आरटीआई कानून की धारा 24 का सहारा नहीं लिया जा सकता है.

आरटीआई के तहत मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आने से जुड़े मामले का घटनाक्रम

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने एकमत होकर ये फैसला दिया और साल 2010 के दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें कोर्ट ने कहा था कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई एक्ट के दायरे में है.

मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई के दायरे में: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का चौतरफा स्वागत

आरटीआई कार्यकर्ताओं ने शीर्ष न्यायालय के इस फैसले की सराहना की और साथ ही कहा कि ‘कानून से ऊपर कोई नहीं है.’

जज कानून से ऊपर नहीं हैं, न्यायिक नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए: जस्टिस चंद्रचूड़

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ऐसा करने से नियुक्ति प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बढ़ेगा और फैसले लेने में न्यायपालिका एवं सरकार के सभी स्तरों पर उच्च स्तर की पारदर्शिता और जवाबदेही तय हो सकेगी.

आरटीआई के दायरे में आया सीजेआई कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया

दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2010 में अपने फैसले में शीर्ष अदालत की इस दलील को खारिज कर दिया था कि सीजेआई कार्यालय को आरटीआई के दायरे में लाए जाने से न्यायिक स्वतंत्रता बाधित होगी.