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गुजरात का सियासी फेरबदल क्या भाजपा की चुनाव-पूर्व असुरक्षा का सूचक है

पिछले दशकों में गुजरात भाजपा का सबसे सुरक्षित गढ़ रहा है और आज की तारीख़ में वह प्रधानमंत्री व गृहमंत्री दोनों का गृह प्रदेश है. अगर उसमें भी भाजपा को हार का डर सता रहा है तो ज़ाहिर है कि उसने अपनी अजेयता का जो मिथक पिछले सालों में बड़े जतन से रचा था, वह दरक रहा है.

केरलः कन्नूर यूनिवर्सिटी में नहीं पढ़ाए जाएंगे सावरकर व गोलवलकर की किताबों के अंश

एमए के शासन एवं राजनीति के पाठ्यक्रम में सावरकर के ‘हिंदुत्व: हिंदू कौन है?’ और गोलवलकर के ‘बंच ऑफ थॉट्स’ व ‘वी ऑर अवर नेशनहुड डिफाइंड’ के हिस्सों को शामिल करने पर विवाद हुआ था. कुलपति गोपीनाथ रविंद्रन ने कहा है कि पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए गठित समिति की सिफ़ारिशों के बाद इन्हें न पढ़ाने का फ़ैसला लिया गया है.

गुजरात: 24 मंत्रियों ने शपथ ली, नए मंत्रिपरिषद में विजय रूपाणी सरकार का कोई सदस्य नहीं

बीते 11 सितंबर को विजय रूपाणी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था, जिसके बाद 13 सितंबर को भूपेंद्र पटेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. नए मंत्रिपरिषद में किसी पुराने मंत्री को जगह न मिलने पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा है कि दोनों ने अपनी नाकामियां छिपाने के लिए रूपाणी कैबिनेट के सभी मंत्रियों को बाहर कर दिया.

इंफोसिस की आलोचना करने वाले ‘पाञ्चजन्य’ के लेख पर निर्मला सीतारमण ने कहा- यह सही नहीं था

आरएसएस से जुड़ी पत्रिका ‘पाञ्चजन्य’ के 5 सितंबर के संस्करण के लेख में भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस पर निशाना साधते हुए इसे ‘ऊंची दुकान, फीका पकवान’ क़रार दिया गया था. इसमें यह भी आरोप लगाया गया था कि इंफोसिस का ‘राष्ट्र-विरोधी’ ताकतों से संबंध है और इसके परिणामस्वरूप सरकार के जीएसटी तथा आयकर पोर्टल में गड़बड़ की गई है.

गुजरातः विजय रूपाणी के इस्तीफ़े के बाद बेटी बोलीं- क्या नेताओं को संवेदनशील नहीं होना चाहिए

दिसंबर 2017 में दूसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने विजय रूपाणी ने 11 सितंबर को पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. रूपाणी की बेटी राधिका ने एक फेसबुक पोस्ट के ज़रिये उन सभी लोगों को जवाब दिया है, जो उनके पिता की सरल छवि को लेकर उन पर निशाना साधे हुए थे.

केरल: कन्नूर विश्वविद्यालय के पीजी पाठ्यक्रम में सावरकर, गोलवलकर का काम शामिल करने पर विवाद

यह विवाद एमए के शासन एवं राजनीति के पाठ्यक्रम को लेकर है, जिसमें सावरकर के ‘हिंदुत्व: हिंदू कौन है?’ और गोलवलकर के ‘बंच ऑफ थॉट्स’ एवं ‘वी ऑर अवर नेशनहुड डिफाइंड’ के हिस्सों को शामिल किया गया है. कांग्रेस की छात्र शाखा केरल स्टूडेंट यूनियन ने माकपा के नियंत्रण वाले विश्वविद्यालय पर संघ परिवार के एजेंडे का लागू करने का आरोप लगाया है.

इंफोसिस लेख विवाद: आरएसएस के सह सरकार्यवाह ने कहा- धर्मयुद्ध का शंखनाद है पाञ्चजन्य

आरएसएस के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब संगठन से जुड़ी ‘पाञ्चजन्य’ पत्रिका सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस की आलोचना करने से जुड़े एक लेख से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार प्रमुख ने दूरी बना ली थी. पत्रिका ने लेख में जीएसटी और आयकर पोर्टल में आ रहीं गड़बड़ियों को लेकर इंफोसिस पर निशाना साधते हुए कहा था कि कंपनी टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ काम कर रही है.

New Delhi: RSS chief Mohan Bhagwat speaks on the 2nd day at the event titled 'Future of Bharat: An RSS perspective', in New Delhi, Tuesday, Sept 18, 2018. (PTI Photo) (PTI9_18_2018_000190B)

‘समझदार’ मुस्लिम नेता कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ दृढ़ता से खड़ें होंः मोहन भागवत

आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में कहा कि हिंदुओं और मुसलमानों के पूर्वज एक ही थे और हर भारतीय हिंदू है. हिंदू शब्द मातृभूमि, पूर्वज और भारतीय संस्कृति के बराबर है. यह अन्य विचारों का अनादर नहीं है. हमें मुस्लिम वर्चस्व के बारे में नहीं बल्कि भारतीय वर्चस्व के बारे में सोचना है.

हाथ जोड़कर माफ़ी मांगने तक जावेद अख़्तर की कोई फिल्म प्रदर्शित नहीं होने देंगे: भाजपा विधायक

भाजपा विधायक राम कदम ने लेखक-गीतकार जावेद अख़्तर से उनकी उस टिप्पणी को लेकर उनसे माफ़ी की मांग की है, जिसमें उन्होंने आरएसएस की तुलना कथित तौर पर तालिबान के साथ की थी. इसके बाद अख़्तर के मुंबई स्थित आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

आरएसएस ने इंफोसिस की आलोचना करने वाले ‘पाञ्चजन्य’ के लेख से ख़ुद को अलग किया

आरएसएस से जुड़ी एक पत्रिका ‘पाञ्चजन्य’ के 5 सितंबर के संस्करण के लेख में भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस पर निशाना साधा गया था और इसे ‘ऊंची दुकान, फीका पकवान’ क़रार दिया गया था. इसमें यह भी आरोप लगाया गया था कि इंफोसिस का ‘राष्ट्र-विरोधी’ ताकतों से संबंध है और इसके परिणामस्वरूप सरकार के जीएसटी तथा आयकर पोर्टल में गड़बड़ की गई है.

संघ से जुड़ी ‘पाञ्चजन्य’ ने इंफोसिस साधा निशाना, कहा- कंपनी टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ काम कर रही

इंफोसिस द्वारा विकसित जीएसटी और आयकर पोर्टलों में खामियों को लेकर आरएसएस से संबंधित साप्ताहिक पत्रिका ‘पाञ्चजन्य’ ने स्वदेशी सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी पर हमला किया है और पूछा है कि क्या कोई ‘राष्ट्र-विरोधी’ शक्ति इसके माध्यम से भारत के आर्थिक हितों को आघात पहुंचाने की कोशिश कर रही है.

संस्कृति के कथित रक्षकों को कामसूत्र नहीं, अपनी कुंठा जलानी चाहिए

बजरंग दल को कृष्ण और गोपियों या राधा की रति-क्रीड़ा या किसी अन्य देवी-देवता के शृंगारिक प्रसंगों के चित्रण से परेशानी है तो वे भारत के उस महान साहित्य का क्या करेंगे जो ऐसे संदर्भों से भरा पड़ा है? वे कालिदास के ‘कुमारसंभवम्’ का क्या करेंगे जिसमें शिव-पार्वती की रति-क्रीड़ा विस्तार से वर्णित है. संस्कृत काव्यों के उन मंगलाचरणों का क्या करेंगे जिनमें देवी-देवताओं के शारीरिक प्रसंगों का उद्दाम व सूक्ष्म वर्णन है?

आम आदमी पार्टी की तिरंगा यात्रा बहुसंख्यकवादी राष्ट्रवाद का ही नमूना है

आम आदमी पार्टी का दावा है कि उसके तिरंगे के रंग पक्के हैं. शुद्ध घी की तरह ही वह शुद्ध राष्ट्रवाद का कारोबार कर रही है. भारत और अभी उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को राष्ट्रवाद का असली स्वाद अगर चाहिए तो वे उसकी दुकान पर आएं. उसकी राष्ट्रवाद की दाल में हिंदूवाद की छौंक और सुशासन के बघार का वादा है.

पूर्व सीजेआई बोबडे ने नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय में मोहन भागवत से मुलाकात की: रिपोर्ट

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरएसएस के अधिकारियों ने ऐसी किसी भी मुलाकात से इनकार किया तो वहीं विश्वस्त सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि पूर्व सीजेआई एसए बोबडे और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बीच मुलाकात हुई है.

सरकारी समिति की ‘मोपला शहीदों’ को इतिहास की किताब से हटाने की मांग, कहा- विद्रोही सांप्रदायिक थे

भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद की समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि 1921 का मालाबार विद्रोह हिंदू समाज के ख़िलाफ़ था और केवल असहिष्णुता के चलते किया गया था.