RTI

The Union Minister for Agriculture & Farmers Welfare, Rural Development and Panchayati Raj, Food Processing Industries, Shri Narendra Singh Tomar addressing a press conference on Farmers’ Welfare, in New Delhi on December 10, 2020.

ग़ैर क़ानूनी आधार पर कृषि मंत्रालय ने कृषि क़ानूनों के दस्तावेज़ सार्वजनिक करने से इनकार किया

विशेष रिपोर्ट: नए कृषि क़ानूनों के विरोध के बीच केंद्र सरकार ने कहा था कि इसे काफ़ी विचार-विमर्श के बाद बनाया गया है. आरटीआई के तहत इससे जुड़े दस्तावेज़ मांगे जाने पर कृषि मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में मामले के विचाराधीन होने का हवाला देते हुए इससे इनकार किया. आरटीआई एक्ट में कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं है.

(फोटो: पीटीआई)

आवेदक की प्रामाणिकता के लिए आरटीआई के तहत मक़सद बताना ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

हाईकोर्ट की यह टिप्पणी आरटीआई एक्ट के उस प्रावधान के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें कहा गया है कि सूचना मांगने के लिए आवेदक को कोई कारण बताने की ज़रूरत नहीं है.

(फोटो साभार: फेसबुक)

बिहार सूचना आयोग की वेबसाइट 2017 से ख़स्ताहाल, चार साल से कोई रिपोर्ट पेश नहीं की

बिहार राज्य सूचना आयोग के सचिव ने कहा कि वेबसाइट से जुड़ीं समस्याओं को सुलझाने की कोशिश की जा रही है. यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि वार्षिक रिपोर्ट तैयार हो.

(फोटो: रॉयटर्स/पीआईबी)

दस्तावेज़ दर्शाते हैं कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में मनमानी बरती गई, बिना आवेदन एक का चयन

विशेष रिपोर्ट: पिछले साल नवंबर महीने में मुख्य सूचना आयुक्त और तीन सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हुई थी. इससे जुड़े दस्तावेज़ दर्शाते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद सर्च कमेटी ने बिना स्पष्ट प्रक्रिया और मानक के नामों को शॉर्टलिस्ट किया था. प्रधानमंत्री पर दो किताब लिख चुके पत्रकार को बिना आवेदन के सूचना आयुक्त बना दिया गया.

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चुनावी बॉन्ड से राजनीतिक दलों को दान देने वालों का खुलासा करने में कोई जनहित नहीं: सीआईसी

सूचना के अधिकार कानून के तहत चुनावी बॉन्ड बेचने के लिए निर्धारित भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं के बहीखातों से इन बॉन्ड को ख़रीदने वालों और इन्हें प्राप्त करने वालों की जानकारी मांगी गई थी. एसबीआई द्वारा जानकारी दिए जाने से इनकार करने के बाद केंद्रीय सूचना आयोग का रुख़ किया गया था.

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‘भाजपा भ्रष्टाचार मुक्त भारत का वादा पूरा करने में नाकाम रही है’

वीडियो: आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार ऐसा कहा गया है कि पिछले साढ़े छह सालों में मोदी सरकार ने सूचना का अधिकार क़ानून को बेजान करके भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ इस लड़ाई को कमज़ोर किया है. इस बारे में विस्तार से बता रही हैं सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज.

उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय. (फोटो साभार: ट्विटर)

उत्तराखंड: आरटीआई कार्यकर्ता की मौत पर परिवार के हत्या का संदेह जताने के बाद एफआईआर दर्ज

उत्तराखंड के आरटीआई कार्यकर्ता चार दिसंबर को हरिद्वार में एक घर में मृत पाए गए थे. मृतक कार्यकर्ता ने 2013 में उत्तराखंड में करोड़ों रुपयों के छात्रवृत्ति घोटाले को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

(फोटो साभार: फेसबुक)

छात्रा ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी तो गुजरात विश्वविद्यालय ने कहा- पहले नागरिकता साबित करें

गुजरात विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त एक कॉलेज की छात्रा ने आरटीआई दायर कर इंटर्नल परीक्षा के मार्कशीट की प्रतियां मांगी थीं, लेकिन संस्थान ने कहा कि पहले वे अपनी भारतीय नागरिकता साबित करें. छात्रा का कहना है कि संविधान या आरटीआई एक्ट में ऐसा कोई नियम नहीं है और वह इसे हाईकोर्ट में चुनौती देंगी.

शरजील इमाम और उमर खालिद. (फोटो साभार: फेसबुक/द वायर)

दिल्ली दंगा: उमर ख़ालिद और शरजील इमाम के ख़िलाफ़ यूएपीए मामले में चार्जशीट दाख़िल

पुलिस ने दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर ख़ालिद को 14 सितंबर और छात्र शरजील इमाम को 25 अगस्त को यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किया था.

(फोटो: रॉयटर्स)

बिहार चुनाव से पहले अधिकतर चुनावी बॉन्ड एक करोड़ रुपये की राशि के बेचे गए: आरटीआई

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले 19-28 अक्टूबर के दौरान एक-एक करोड़ रुपये के 279 चुनावी बॉन्ड बेचे गए. इसके अलावा 32 चुनावी बॉन्ड 10-10 लाख रुपये, नौ चुनावी बॉन्ड एक-एक लाख रुपये और एक चुनावी बॉन्ड एक हज़ार रुपये का बेचा गया.

एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेखा शर्मा और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (फोटो साभारः ट्विटर)

महिला आयोग अध्यक्ष के ‘बढ़ते लव जिहाद के मामले’ के दावे के बाद आयोग ने कहा- ऐसा कोई डेटा नहीं

बीते अक्टूबर में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की थी और बताया था कि इस दौरान राज्य में लव जिहाद के बढ़ रहे मामलों सहित कई मुद्दों पर बात हुई थी. अब एक आरटीआई के जवाब में आयोग ने कहा है कि वह इस तरह का कोई डेटा नहीं रखता है.

सीआईसी. (फोटो साभार: पीआईबी)

सीआईसी ने सीबीआई से कहा, सिर्फ़ छूट वाली धारा का ज़िक्र कर सूचना देने से मना नहीं कर सकते

एक मामले की सुनवाई करते हुए सीआईसी ने कहा कि जांच एजेंसी को सूचना देने से इनकार करते वक्त ठोस कारण देना चाहिए कि ऐसा करने से जांच या आरोपी के खिलाफ मुकदमे पर कैसे असर पड़ सकता है.