Sand Mining

मध्य प्रदेश: वन विभाग की अधिकारी को क्या रेत खनन माफिया पर नकेल कसने की सज़ा मिली है

विशेष रिपोर्ट: मुरैना ज़िले के राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में बतौर अधीक्षक तैनात श्रद्धा पांढरे ने अप्रैल में पदभार संभालने के बाद से ही क्षेत्र के रेत खनन माफिया के ख़िलाफ़ लगातार कार्रवाई की. इस दौरान उन पर ग्यारह हमले भी हुए. अब तीन महीनों के कार्यकाल के बाद ही ‘रूटीन कार्रवाई’ बताते हुए उनका तबादला कर दिया गया.

मध्य प्रदेश: खनन अधिकारी से विवाद के बाद छह पत्रकारों के ख़िलाफ़ केस दर्ज

मध्य प्रदेश के खरगोन ज़िले का मामला. ज़िला खनन अधिकारी की शिकायत के आधार पर यह एफ़आईआर दर्ज की गई है, जिन्होंने छह पत्रकारों पर अभद्रता करने और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. पत्रकारों ने इससे इनकार​ किया है. पत्रकार दो ठेकेदारों से संबंधित अवैध रेत खनन के मामले को लेकर उनसे बयान लेने गए थे.

यूपी: बांदा में अवैध बालू खनन की रिपोर्ट करने पर पत्रकार को धमकी, मां से कहा- समझा लेना बेटे को

पत्रकार आशीष सागर पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले में केन नदी में अवैध बालू खनन की रिपोर्टिंग कर रहे हैं. आरोप है कि ज़िले के पैलानी क्षेत्र की अमलोर मौरम खदान से नियमों का उल्लंघन कर बालू निकाला जा रहा है, जिसके चलते नदी एवं पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है. इस संबंध में ज़िला प्रशासन से शिकायत की गई है. वहीं इलाके के एसडीएम का कहना है कि अवैध खनन नहीं हो रहा है.

राजस्थान: सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने रेत खनन में बंदरबाट पर लगाई फटकार, सरकार पर सवाल उठाए

सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2020 में इसके द्वारा नियुक्त सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी को निर्देश दिया था कि वे राज्य में रेत खनन से संबंधित आरोपों पर विचार कर इसे रोकने के लिए एक रिपोर्ट पेश करें. रिपोर्ट में कमेटी ने राज्य सरकार के साथ पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की भी आलोचना की है.

राजस्थान: नीति बनने के बाद भी सिलिकोसिस मरीज़ और उनके आश्रित असहाय हैं

ग्राउंड रिपोर्ट: सिलिकोसिस बीमारी की रोकथाम के लिए अक्टूबर 2019 में राजस्थान सरकार ने नीति बनाई थी. इस तहत इस बीमारी से पीड़ित लोगों को मिलने वाली सहायता राशि इनके लिए नाकाफ़ी साबित हो रही है. इलाज के दौरान इससे कहीं ज़्यादा की राशि का इन पर क़र्ज़ हो गया है.

प्रधानमंत्री जी! आप ही बताएं कि हम लोग कोरोना से लड़ें कि भूख से…

उत्तर प्रदेश और बिहार के 34 मज़दूर कर्नाटक के शिमोगा ज़िले में फंसे हैं. बालू खनन का काम करने वहां गए मज़दूरों का कहना है कि जो थोड़े-बहुत पैसे थे, वो अब तक के लॉकडाउन के दौरान ख़त्म हो चुके हैं. अब अगर यहां से नहीं निकाला गया तो भुखमरी जान ले लेगी.

राजस्थान के कॉबल मज़दूरों को क्या ‘बंधुआ’ कहना ज़्यादा उचित होगा?

ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान के बूंदी ज़िले का बुधपुरा गांव कॉबल यानी फर्श पर लगाए जाने वाले पत्थरों के लिए जाना जाता है. पत्थर के खदानों से निकले मलबे से कॉबल बनाने के काम की स्थिति ये है कि एक बार जब मज़दूर यहां काम करना शुरू कर देता है, तो ठेकेदारों के चंगुल में फंसकर कभी यहां से निकल नहीं पाता.