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Ayodhya Janmsthan Temple Story

अयोध्या: नये राम मंदिर के लिए ढहाया गया तीन सौ साल पुराना ऐतिहासिक राम जन्मस्थान मंदिर

300 साल पुराना जन्मस्थान मंदिर 1980 के दशक में शुरू हुए रामजन्मभूमि आंदोलन के पहले राम के जन्म से जुड़ा था और एक मुस्लिम ज़मींदार द्वारा दान दी गई ज़मीन पर बनाया गया था. यह राम की सह-अस्तित्व वाली उस अयोध्या का प्रतीक था, जिसका नामो-निशान अब नज़र नहीं आता.

राम जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: यूट्यूब/दूरदर्शन/वीडियोग्रैब)

राम जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रमुख कोरोना पॉजिटिव, प्रधानमंत्री के साथ साझा किया था मंच

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना संक्रमित पाए गए राम जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रमुख महंत नृत्य गोपालदास के स्वास्थ्य की जानकारी ली और मेदांता अस्पताल से तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है.

अक्टूबर 1990 में बाबरी मस्जिद के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी. (फाइल फोटो: एपी/पीटीआई)

5 अगस्त 2020 को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक त्रासदी के तौर पर याद किया जाएगा

जिस जगह पर 500 से अधिक सालों तक एक मस्जिद थी, वहां भव्य मंदिर बनेगा. इस मंदिर की आलीशान इमारत की परछाई में मुझे वो भारत डूबता दिख रहा है, जहां मैं पला-बढ़ा. फिर भी मेरा विश्वास है कि यह देश अपने मौजूदा शासकों के नफ़रत से कहीं अधिक बड़ा है.

(फोटो: पीटीआई)

‘मंदिरों के निर्माण से विकास हुआ करता, तो अयोध्या में कब का ‘रामराज्य’ आ चुका होता’

बीते पांच अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए हुए भूमि पूजन समारोह और शहर के विकास के दावों के बीच अयोध्यावासी सिर्फ वैसा नहीं सोच रहे हैं, जैसा अधिकतर मीडिया माध्यमों द्वारा बताया जा रहा है.

अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

राम मंदिर भूमि पूजन: नरेंद्र मोदी बोले- सदियों का इंतज़ार आज पूरा हुआ

अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा. टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से राम जन्मभूमि आज मुक्त हो गई.

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एक दलित कार्यकर्ता के संघ छोड़ने और उसके ख़िलाफ़ लड़ने की कहानी

वीडियो: राजस्थान के सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक भंवर मेघवंशी ने आरएसएस में अपने कार्यकाल और फिर इस संगठन को छोड़ने से जुड़े अपने अनुभवों को द वायर उर्दू के संपादक महताब आलम से साझा किया.

New Delhi: RSS chief Mohan Bhagwat speaks on the 2nd day at the event titled 'Future of Bharat: An RSS perspective', in New Delhi, Tuesday, Sept 18, 2018. (PTI Photo) (PTI9_18_2018_000190B)

आरएसएस भारत की 130 करोड़ आबादी को हिंदू मानता हैः मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने तेलंगाना में कहा कि ये देश परंपरा से हिंदुत्ववादी है. हम विविधता में एकता नहीं तलाश रहे बल्कि ऐसी एकता तलाश रहे हैं जिसमें विविधता हो और एकता हासिल करने के विभिन्न रास्ते हो.

A make shift Ram temple comes up in place of Babri Masjid which was demolished by the Kar Sewaks a day before, Paramilitary force personal at the Make shift temple on 7th Dec 1992.

बाबरी विध्वंस: आज़ाद भारत का ख़त्म न होने वाला शर्मनाक अध्याय

इस अपराध की साज़िश रचने वालों ने खूब तरक्की की है और आज वे सत्ता में हैं. एक हिंदू वोट बैंक की कल्पना को साकार करने का अभियान उतनी ही शिद्दत से जारी है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

अयोध्या: इंसाफ के बजाय इंसाफ से फासला बढ़ाने वाला फ़ैसला

सुप्रीम कोर्ट भी विवादित भूमि रामलला को देते हुए यह नहीं सोचा कि उसका फ़ैसला न सिर्फ छह दिसंबर, 1992 के ध्वंस बल्कि 22-23 दिसंबर, 1949 की रात मस्जिद में मूर्तियां रखने वालों की भी जीत होगी. ऐसे में अदालत का इन दोनों कृत्यों को ग़ैर-क़ानूनी मानने का क्या हासिल है?

New Delhi: A group photo of the five-judge bench comprised of Chief Justice of India Ranjan Gogoi (C) flanked by (L-R) Justice Ashok Bhushan, Justice Sharad Arvind Bobde, Justice Dhananjaya Y Chandrachud, Justice S Abdul Nazeer after delivering the verdict on Ayodhya land case, at Supreme Court in New Delhi, Saturday, Nov. 9, 2019. (PTI Photo) (PTI11_9_2019_000298B)

क्या अयोध्या मामले में न्याय को तरजीह नहीं दी गई?

बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि ज़मीन विवाद में ‘सार्वजनिक शांति और सौहार्द’ बनाए रखने के लिए विवादित ज़मीन को न बांटने का जजों का निर्णय बहुसंख्यक दबाव से प्रभावित लगता है, जिसमें मुस्लिम पक्षकारों के क़ानूनी दावे को नज़रअंदाज़ कर दिया गया.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi offers flower petals at Mahatma Gandhi bust, at the Sabarmati Ashram, in Ahmedabad, Gujarat on June 29, 2017.

क्या प्रधानमंत्री मोदी गांधी के विचारों की हत्या कर रहे हैं?

गांधी के विचार उनकी मृत्यु के बाद भी संघ की कट्टरता की विचारधारा के आड़े आते रहे, इसलिए अपने पहले कार्यकाल में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी के सारे मूल्यों को ताक में रखकर उनके चश्मे को स्वच्छता अभियान का प्रतीक बनाकर उन्हें स्वच्छता तक सीमित करने का अभियान शुरू कर दिया था.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi paying respects to Dr. Babasaheb Ambedkar, at Chaitya Bhoomi, in Mumbai on October 11, 2015. 
The Governor of Maharashtra, Shri C. Vidyasagar Rao, the Chief Minister of Maharashtra, Shri Devendra Fadnavis and the Union Minister for Road Transport & Highways and Shipping, Shri Nitin Gadkari and other dignitaries are also seen.

मोदी ख़ुद को आंबेडकर का ‘शिष्य’ बताते हैं, लेकिन मनु पर दोनों के नज़रिये में फ़र्क़ दिखता है

पुस्तक अंश: मोदीनामा किताब का पांचवां अध्याय ‘मनु का सम्मोहन’ बताता है कि भारत के संविधान के ऐलान को डाॅ. आंबेडकर ने मनु के शासन की समाप्ति कहा था, बावजूद इसके मनु की वापसी हो रही है.

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आरक्षण पर पक्ष और विपक्ष वालों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत होनी चाहिए: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण पर दिए बयान पर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि ग़रीबों के अधिकारों पर हमला, संविधान सम्मत अधिकारों को कुचलना, दलितों-पिछड़ों के अधिकार छीनना…यही असली भाजपाई एजेंडा है.

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती. (फोटो: पीटीआई)

राम मंदिर को लेकर जनता को मूर्ख बना रही है केंद्र सरकार: स्वामी स्वरूपानंद

पश्चिम बंगाल में ‘जय श्री राम’ के नारों पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आक्रोशित प्रतिक्रिया पर द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि इसे राम के ख़िलाफ़ उनके विरोध के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. ममता राम का विरोध नहीं कर रहीं बल्कि भाजपा का विरोध कर रही हैं.

कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. (फोटो साभार: ट्विटर)

कांग्रेस की पराजय के पीछे क्या कारण हैं?

लोकसभा चुनाव के नतीजे आ जाने के बाद देश में दिलचस्प बहस शुरू हो गई है कि कांग्रेस का क्या हो. कुछ लोग पार्टी की समाप्ति चाहते हैं. कई दूसरे लोग राहुल गांधी को उसके अध्यक्ष पद से हटाना चाहते हैं.