Sewer Deaths

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

दिल्ली में सफाई करने के दौरान सेप्टिक टैंक में गिरने पर दो लोगों की मौत

दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में बदरपुर के मोलारबंद इलाके में हुआ हादसा. हादसे में बीमार हुए एक अन्य व्यक्ति का इलाज अस्पताल में चल रहा है. पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

Ghaziabad: Phoolu (45), a full-time worker shows his hands after cleaning a manhole, during the ongoing COVID-19 lockdown, in Ghaziabad, Friday, May 01, 2020. Phoolu has a daughter and has been working since he was 10 years of age. He continues choicelessly to work inside sewer lines to earn a living amid this pandemic, exposing his body to added risk. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI01-05-2020_000090B)

पिछले 10 वर्ष में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 631 लोगों की मौत हुई: आरटीआई

सूचना के अधिकार कानून के तहत राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने बताया है कि पिछले 10 वर्षों में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान सबसे ज़्यादा मौत तमिलनाडु में हुई. इसके बाद उत्तर प्रदेश और फिर दिल्ली तथा कर्नाटक में मौते हुई हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

दिल्लीः सीवर टैंक की मरम्मत के दौरान व्यक्ति की मौत

दक्षिण पूवी दिल्ली का मामला. ज़हरीली गैस की चपेट में आने से हुई मौत. पुलिस ने केस दर्ज किया. पुलिस ने बताया कि मृतक ने सुरक्षा संबंधी उपकरण नहीं पहने हुए थे.

(फोटो साभार: ट्विटर/भाजपा)

क्या संविधान ने हमें सम्मान से जीने के लिए पांव धोने की व्यवस्था दी है?

क्या किसी बेरोज़गार के घर समोसा खा लेने से बेरोज़गारों का सम्मान हो सकता है? उन्हें नौकरी चाहिए या प्रधानमंत्री के साथ समोसा खाने का मौक़ा? अगर पांव धोना ही सम्मान है तो फिर संविधान में संशोधन कर पांव धोने और धुलवाने का अधिकार जोड़ दिया जाना चाहिए.