Sexual Harassment

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: नाबालिग के साथ बलात्कार, परिजनों ने पीड़िता और आरोपी को बांधकर निकाला जुलूस

मध्य प्रदेश के अलीराजपुर ज़िले का मामला है. इस मामले में बलात्कार के आरोपी सहित छह लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. नाबालिग की शिकायत पर दो मामले दर्ज किए गए हैं. पहला मामला बलात्कार के आरोपी के ख़िलाफ़, जबकि दूसरा मामला पीड़िता के परिजनों एवं रिश्तेदारों के विरुद्ध दर्ज किया गया है.

(फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स /CC BY-SA 2.0)

लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा की शिकायतों में हुई बढ़ोतरी बरक़रार: राष्ट्रीय महिला आयोग

लॉकडाउन ख़त्म होने के एक साल बाद भी आयोग को हर महीने महिलाओं के विरुद्ध अपराध की दो हज़ार से अधिक शिकायतें मिल रही हैं, जिनमें से लगभग एक चौथाई घरेलू हिंसा से संबंधित हैं. राष्ट्रीय महिला आयोग को वर्ष 2019 में आयोग को घरेलू हिंसा से संबंधित 2,960 शिकायतें मिली थीं, जबकि 2020 में 5,297 शिकायतें प्राप्त हुई हैं.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

यौन अपराध मामले में ज़मानत शर्त के तौर पर राखी बांधने को कहना अस्वीकार्य: सुप्रीम कोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बीते साल यौन उत्पीड़न के आरोपी को पीड़िता से राखी बंधवाने के शर्त पर ज़मानत दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने इसे निरस्त करते हुए कहा यह यौन उत्पीड़न के अपराध को कमतर करता है. कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामलों में ज़मानत देने के दिशानिर्देश भी दिए हैं.

(फोटो: पीटीआई)

यौन उत्पीड़न के फ़र्ज़ी मामले दर्ज कराना ट्रेंड बन गया है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली के वसंत कुंज में पार्किंग संबंधी विवाद के सिलसिले में दो पक्षों ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवाई थी. इन्हें रद्द करने की मांग की याचिका सुनते हुए अदालत ने कहा कि समय आ गया है कि इन धाराओं के तहत झूठी शिकायतें दर्ज कराने वालों पर कार्रवाई की जाए.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

अपर्याप्त सबूतों के कारण प्रतिदिन बाल यौन उत्पीड़न के चार पीड़ित न्याय से वंचित: अध्ययन

कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन द्वारा के अध्ययन के अनुसार हर साल बाल यौन उत्पीड़न के क़रीब तीन हज़ार मामले सुनवाई के लिए अदालत नहीं पहुंच पाते क्योंकि पुलिस पर्याप्‍त सबूत न होने के कारण आरोपपत्र दायर करने से पहले ही जांच बंद कर देती है. इसमें 99 फीसदी मामले बच्चियों के यौन शोषण के ही होते हैं.

Bengaluru: BJP leader B S Yeddyurappa during his swearing in ceremony as Karnataka Chief Minister, at Raj Bhavan in Bengaluru, Friday, July 26, 2019. (PTI Photo/Shailendra Bhojak)(PTI7_26_2019_000212B)

कर्नाटक: 68 मीडिया हाउसों को छह मंत्रियों के ख़िलाफ़ अपमानजनक सामग्री प्रसारित करने पर रोक लगाई

कर्नाटक की बीएस येदियुरप्पा सरकार में मंत्री रमेश जारकिहोली ने एक आपत्तिजनक सीडी बरामद होने और यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच इस्तीफ़ा दे दिया था. इसके बाद भाजपा सरकार के छह अन्य मंत्रियों ने अदालत का रुखकर मीडिया को उनके ख़िलाफ़ कोई भी अपमानजनक सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकने का अनुरोध किया था.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

दिल्ली: नेशनल बुक ट्रस्ट के संपादक के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज

पुलिस ने बताया कि नेशनल बुक ट्रस्ट के मलयालम विभाग के एक संपादक के ख़िलाफ़ एक महिला ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि संपादक से कथित यौन उत्पीड़न मामले में पूछताछ की गई है, लेकिन उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया गया है.

रमेश जा​रकिहोली. (फोटो साभार: फेसबुक)

कर्नाटक: यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद भाजपा सरकार में मंत्री रमेश जारकिहोली ने इस्तीफ़ा दिया

कर्नाटक विधानसभा के बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के पहले जल संसाधन मंत्री रमेश जारकिहोली के ख़िलाफ़ इस तरह के आरोप लगने से बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार आलोचनाओं से घिर गई थी. राज्य में विपक्षी कांग्रेस और जेडीएस मंत्री के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे.

हत्या के आरोप में गिरफ्तार मुख्य आरोपी का रिश्तेदार ललित शर्मा. (फोटो साभार: ट्विटर/@hathraspolice)

उत्तर प्रदेश: ज़मानत पर छूटे छेड़छाड़ के आरोपी ने कथित तौर पर युवती के पिता की हत्या की

उत्तर प्रदेश के हाथरस ज़िले का मामला है. पुलिस ने बताया कि जिस आदमी की मौत हुई है. उन्होंने जुलाई, 2018 में मुख्य आरोपी गौरव शर्मा के ख़िलाफ़ छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया था. आरोपी जेल गया था, लेकिन उसके एक महीने बाद से वह ज़मानत पर है. हत्या के संबंध में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

यौन उत्पीड़न के आरोपों को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकताः सुप्रीम कोर्ट

शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी साल 2018 के एक मामले के संबंध में आई है, जहां मध्य प्रदेश के एक पूर्व जिला जज पर एक जूनियर महिला अधिकारी ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. जज ने उनके ख़िलाफ़ हाईकोर्ट द्वारा शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई (फोटो: पीटीआई)

पूर्व सीजेआई गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोप के बाद शुरू हुए ‘साज़िश’ के मामले की जांच बंद

2019 में तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई पर सुप्रीम कोर्ट की एक कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, जिसके बाद अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उन्हें फंसाने के किसी ‘गहरे षड्यंत्र’ की जांच शुरू की थी. अब इसे बंद करते हुए कोर्ट ने कहा कि दो साल बाद जांच के लिए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड मिलना मुश्किल है.

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी. (फोटो: पीटीआई)

तीन साल में यौन उत्पीड़न, घृणा से जुड़े साइबर अपराध के 93 हज़ार से अधिक मामले आए: गृह राज्य मंत्री

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्यसभा में बताया कि इंटरनेट का उपयोग बढ़ने के साथ ही साइबर अपराध की संख्या में भी वृद्धि हो रही है. उन्होंने कहा कि देश में होने वाले साइबर अपराध के पीछे जो मंशा रही है, उनमें व्यक्तिगत शत्रुता, धोखाधड़ी, यौन उत्पीड़न, घृणा फैलाना, पायरेसी का विस्तार, सूचनाओं की चोरी आदि शामिल हैं.

बॉम्बे हाईकोर्ट (फोटो: पीटीआई)

एक व्यक्ति द्वारा पीड़िता का मुंह बंद करना, बिना हाथापाई उसके कपड़े उतरना असंभवः हाईकोर्ट

बाॅम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ की जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला ने नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार के दो आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि पीड़िता की गवाही आरोपी को अपराधी ठहराने का भरोसा कायम नहीं करती है. इसी पीठ ने लड़की के वक्षस्थल को छूने के एक आरोपी को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि ‘त्वचा से त्वचा’ का संपर्क नहीं हुआ था.

बॉम्बे हाईकोर्ट (फोटो: पीटीआई)

नाबालिग का हाथ पकड़ना, पैंट की जिप खोलना पॉक्सो के तहत यौन हमला नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बीते 19 जनवरी को एक अन्य मामले में बाॅम्बे हाईकोर्ट की इसी पीठ ने अपने एक बेहद विवादित फैसले में कहा था कि त्वचा से त्वचा का संपर्क हुए बिना नाबालिग पीड़िता का स्तन स्पर्श करना, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम (पॉक्सो) के तहत यौन हमला नहीं कहा जा सकता. इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट रोक लगा चुका है.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

पाॅक्सो के तहत यौन उत्पीड़न के दोषी को बरी करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने एक बच्ची के यौन उत्पीड़न के लिए पॉक्सो और आईपीसी के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति को पॉक्सो से जुड़े मामले में बरी करते हुए कहा था कि स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट के बिना यौन हमला नहीं माना जा सकता. इस फैसले पर विवाद होने के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख़ कर फ़ैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था.