Society

A signboard is seen outside the premises of Supreme Court in New Delhi, India, September 28, 2018. REUTERS/Anushree Fadnavis/File Photo

हिंसा अदालत को सोचने से रोक रही है, लेकिन हिंसा हो कैसे रही है?

हिंसा के सबसे ज्यादा, सबसे ताकतवर और कारगर हथियार किसके पास हैं? किसके पास एक संगठित शक्ति है जो हिंसा कर सकती है? उत्तर प्रदेश में किसने आम शहरियों के घर-घर घुसकर तबाही की? किसने कैमरे तोड़कर चेहरे ढंककर लोगों को मारा? गोलियां कहां से चलीं? अदालत से यह कौन पूछे और कैसे? जब उसके पास ये सवाल लेकर जाते हैं तो वह हिंसा से रूठ जाती है.

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आरफ़ा का इंडिया: दीपिका पादुकोण और बॉलीवुड का जेएनयू कनेक्शन

वीडियो: अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों से मिलने के बाद इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. जहां कुछ लोग दीपिका के इस कदम को सराह रहे हैं, वहीं कुछ उनकी आगामी फिल्म ‘छपाक’ का बहिष्कार करने की बात कर रहे हैं. इस बारे में द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी का नज़रिया.

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: रॉयटर्स)

अगर पुलिस राज आ गया तो क्या न्याय मिलेगा?

संविधान निर्माताओं ने व्यवस्था के तीन भाग किए थे- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, ताकि किसी एक के हाथ में सारी शक्तियां न जाएं. लेकिन आज ऐसी परिस्थितियां बना दी गई हैं कि हम इस व्यवस्था के मरने पर सवाल उठाने की बजाय उस पर खुशी मना रहे हैं.

एक फिल्म के दृश्य में ऋत्विक घटक. (फोटो साभार: विकीपीडिया)

नागरिकता क़ानून के समर्थन में भाजपा द्वारा ऋत्विक घटक की फिल्मों के उपयोग पर परिजनों की आपत्ति

भारतीय जनता पार्टी के यूथ विंग द्वारा हाल ही में नागरिकता क़ानून के पक्ष में जारी किए वीडियो में बंगाली फिल्मकार ऋत्विक घटक की फिल्मों के क्लिप इस्तेमाल किए गए हैं. घटक के परिवार ने इसकी निंदा करते हुए कहा है कि ऋत्विक सेकुलर थे और यह क़ानून उन सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है, जिन्हें वे मानते थे.

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी. (फोटो: पीटीआई)

मुसलमानों के पास रहने के लिए 150 देश, हिंदुओं के पास सिर्फ भारतः विजय रूपाणी

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने साबरमती आश्रम में नागरिकता कानून के समर्थन में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि जब आजादी मिली तब भारत में मुस्लिमों की आबादी कुल जनसंख्या का महज नौ फीसदी थी, जो 70 साल में बढ़कर 14 फीसदी हो गई है.

Demonstrators attend a protest march against the National Register of Citizens (NRC) and a new citizenship law, in Kolkata, December 19, 2019. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

मैं एनआरसी में शामिल होने से इनकार करता हूं…

अगर नागरिकता संशोधन क़ानून दूसरे देशों के मुसलमानों के साथ भेदभाव करता है, तो एनआरसी भारत के मौजूदा नागरिकों के प्रति शत्रुतापूर्ण है, जिसके कारण यह कहीं ज़्यादा ख़तरनाक है.

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आईआईटी मद्रास के जर्मन छात्र ने कहा, प्रदर्शन में शामिल होने के चलते भारत छोड़ने को कहा गया

आईआईटी मद्रास से फिजिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे जर्मन छात्र जैकब लिंडेनथल ने कहा है कि वे नागरिकता क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ कैंपस में हुए एक प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जिसके बाद उन्हें चेन्नई में विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय से भारत छोड़ने के निर्देश मिले.

New Delhi: Protestors hold placards during a demonstration against the Citizenship (Amendment) Act, at Mandi House, in New Delhi, Thursday, Dec. 19, 2019. (PTI Photo/Manvender Vashist)(PTI12_19_2019_000118B)

नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ छिड़ा जन आंदोलन और इसके मायने

नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ शुरू हुए आंदोलन का हासिल यह है कि आज हर कोई यह सवाल कर रहा कि आख़िर इस क़ानून की ज़रूरत क्या थी, एनआरसी क्यों लाई जाएगी. इस पर भी चर्चा शुरू हो गई है कि अगर वोटर कार्ड है, आधार है तो अब रजिस्ट्रेशन किस बात का.

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पश्चिम बंगाल: लुंगी-टोपी पहनकर ट्रेन पर पत्थर फेंक रहे भाजपा कार्यकर्ता समेत पांच गिरफ़्तार

मुर्शिदाबाद पुलिस ने बताया कि राधामाधबतला गांव के कुछ लोगों ने सियालदाह-लालगोला लाइन पर जा रहे एक रेल इंजन पर लुंगी-टोपी पहने कुछ लड़कों को पत्थर फेंकते देखा और पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया. इनमें एक स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता भी शामिल है.

Guwahati: Protestor’s burn hoardings and other materials during their march against the Citizenship (Amendment) Bill, 2019, in Guwahati, Wednesday, Dec. 11, 2019. (PTI Photo)

सीएबी, एनआरसी की खींचतान के बीच व्यवस्था से प्रताड़ित लोगों की चिंता किसे है?

राज्य सरकारों से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि लोगों को बाहर जाकर रोजी क्यों तलाशनी पड़ती है? लोग अपने परिवार के साथ अपने इलाके में गरिमामय जीवन और शांति का माहौल चाहते हैं. राज्य सरकारें उनके राज्यों में रहने-जीने की सही व्यवस्था और अपराधमुक्त माहौल क्यों नहीं मुहैया करा पातीं?

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हिंदू धर्म का अपहरण

वीडियो: राजनीतिक दलों द्वारा अपने फायदे के लिए धर्म की राजनीति को बढ़ावा देने के बारे में बता रहे हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद.

Students shout slogans during a protest against the alleged rape and murder of a 27-year-old woman, in Kolkata, India, December 2, 2019. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

देश में असुरक्षित महिलाएं और नेताओं के बिगड़े बोल

महिलाओं की सुरक्षा की चिंता और उनको हिंसा, बलात्कार आदि से बचाने को लेकर कड़े क़ानून बनाने का नेताओं का आश्वासन उनके दिए महिला-विरोधी बयानों के बरक्स बौना नज़र आता है.

Mumbai: Students display placards during a demonstration over rape incidents in the view of the recent rape and murder of Hyderabad veterinarian, at Labaug in Mumbai, Sunday, Dec. 1, 2019. (PTI Photo)  (PTI12_1_2019_000127B)

वे सात कारण, जो बताते हैं कि बलात्कार के मामले में मौत की सज़ा क्यों कारगर नहीं है

भारत जैसे देश में, जहां बलात्कार के मामलों में अदालत की सुनवाई आरोपी के बजाय पीड़ित के लिए ज्यादा मुश्किल भरी होती हैं, वहां कुछ चर्चित मामलों में सज़ा कड़ी कर देने से किसी और को ऐसा करने से रोकना मुश्किल है. ऐसे अधिकतर मामले या तो अदालतों की फाइलों में दबे पड़े हैं या सबूतों के अभाव में ख़ारिज कर दिए जाते हैं.

कृश्न चंदर. (फोटो साभार: अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू हिंद)

‘अगर कृश्न चंदर आज लिख रहे होते तो तिहाड़ जेल में होते’

बीते दिनों आईसीएसई ने प्रसिद्ध कहानीकार कृश्न चंदर की कहानी ‘जामुन का पेड़’ को दसवीं कक्षा के पाठ्यक्रम से हटा दिया था. उनकी लेखनी और ज़िंदगी की महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में उनके भतीजे पवन चोपड़ा से द वायर के फ़ैयाज़ अहमद वजीह की बातचीत.

Shaukat Kaifi Umrao Jaan You Tube

शौकत आपा ज़िंदाबाद…

वरिष्ठ कलाकार शौकत कैफ़ी को याद कर रही हैं पूर्व सांसद सुभाषिनी अली. सुभाषिनी फिल्म उमराव जान की कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर थीं, जिसमें शौकत कैफ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका थी.

शौकत कैफ़ी. (फोटो साभार: राजकमल प्रकाशन)

शौकत कैफ़ी: फ़क़त बहार नहीं हासिल-ए-बहार

बेपनाह प्रेम के एहसास में हर तरह के अभाव से लड़ते हुए जीवन की जद्दोजहद से कभी हौसला न हारने वाली शौकत कैफ़ी की पूरी ज़िंदगी एक इंक़लाबी किताब है. असीमित उड़ान के सपने देखने वालों के लिए वे ख़ुद एक संस्मरण हैं.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: शोम बसु)

जेएनयू एक सामूहिक उपलब्धि है

जेएनयू कोई द्वीप नहीं है, वहां हमारे ही समाज से लोग पढ़ने जाते हैं. जो बात उसे विशिष्ट बनाती है, वो है उसके लोकतांत्रिक मूल्य. इनका निर्माण किसी एक व्यक्ति, पार्टी या संगठन ने नहीं, बल्कि भिन्न प्रकृति और विचारधारा के लोगों ने किया है. यदि ऐसा नहीं होता, तब किसी भी सरकार के लिए इसे ख़त्म करना बहुत आसान होता.

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छत्तीसगढ़ में प्राथमिक शिक्षा के ज़रिये गोंडी भाषा को सहेजने का प्रयास

आदिवासी बहुल इलाकों में वृहद रूप से बोली जाने वाली गोंडी भाषा का कोई लिखित साहित्य न होने के चलते यह अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है. ऐसे में छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के दो स्कूलों में इस भाषा में प्राथमिक शिक्षा देकर इसे सहेजने की कोशिश की जा रही है.

New Delhi: Jawaharlal Nehru University  President Aishe Ghose addresses during a protest march towards Parliament, on the first day of the Winter Session, in New Delhi, Monday, Nov. 18, 2019. The students have been protesting for nearly three weeks against the draft hostel manual, which has provisions for a hostel fee hike, a dress code and curfew timings. (PTI Photo/Shahbaz Khan)(PTI11_18_2019_000290B)

हमारे घरों के बच्चे जेएनयू आकर ‘देशद्रोही’ क्यों हो जाते हैं?

ऐसा क्यों है कि अलग-अलग जगहों से आने वाले बच्चे यहां आकर लड़ने वाले बच्चे बन जाते हैं? बढ़ी हुई फीस का मसला सिर्फ जेएनयू का नहीं है. घटी हुई आज़ादी का मसला भी सिर्फ जेएनयू का नहीं है.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: शोम बसु)

जेएनयू बराबरी के समाज की सबसे ख़ूबसूरत संभावना है…

ऐसे सामाजिक पारिवारिक परिवेश, जिसमें उच्च शिक्षा की कल्पना डॉक्टरी-इंजीनियरिंग के दायरे से पार नहीं गई और नौकरी से परे शिक्षा को देखना एक तरह से अय्याशी और दूर की कौड़ी समझा जाता था, जेएनयू ने समझाया कि ये एक साज़िश है- समाज के बड़े तबके को बराबरी महसूस न होने देने की.

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बिहार: रंगदारी देने से इनकार करने पर मवेशी ले जा रहे व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या

घटना कटिहार ज़िले की है, जहां एक मवेशी व्यवसायी के कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर रंगदारी देने से मना करने पर मारपीट की गई, जिसके बाद उसकी मौत हो गई.

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झारखंडः चोरी के आरोप में भीड़ ने दो युवकों को पीटा, एक की मौत

मामला बोकारो थर्मल थाना क्षेत्र की गोविंदपुर कॉलोनी का है, जहां बैटरी चुराने के आरोप में भीड़ ने दो लोगों को बांधकर पीटा. पुलिस ने मामले में पांच लोगों को गिरफ़्तार किया है.

कृश्न चंदर. (फोटो साभार: अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू हिंद)

जामुन का पेड़: कृश्न चंदर की वो कहानी, जिसे आईसीएसई ने पाठ्यक्रम से हटा दिया है

आईसीएसई ने प्रसिद्ध कहानीकार कृश्न चंदर की कहानी ‘जामुन का पेड़’ को दसवीं कक्षा के पाठ्यक्रम से हटा दिया है. काउंसिल का कहना है कि यह दसवीं के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त नहीं है.

(फोटो: पीटीआई)

आज हिंदुस्तानी मुसलमान को एक नए सामाजिक आंदोलन की ज़रूरत है

आज बहुत सुनियोजित ढंग से आरएसएस परिवार को छोड़कर सारी आवाज़ों को दबा दिया गया है. अगर कोई आवाज़ उठती भी है तो वह सिर्फ उनकी होती है, जो मुसलमानों को पिछड़ा, दकियानूसी और क़बायली साबित करती हैं.

प्रतीकात्मक फोटो (साभार: https://dpsbdn.org)

सड़कों पर नाम-पता पूछने वाला ‘जय श्रीराम’ अब भेस बदलकर स्कूलों में पांव पसार रहा है

मुल्क की सियासत अब ज़्यादा शिद्दत से पहचान की राजनीति के गिर्द नाच रही है. राम को इमाम-ए-हिंद कहने वाले इक़बाल की दुआ को मदरसे की दुआ कहकर सीमित किया जा रहा है, लेकिन देश के बच्चे शायद इक़बाल की दुआ के सबक़ के माने समझ रहे हैं.

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क्या नौकरशाही देश के गरीबों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है?

वीडियो: देश के प्रशासन में नौकरशाही पर आई पूर्व आईएएस अधिकारी नरेश चंद्र सक्सेना से उनकी किताब ‘व्हाट एल्स द आईएएस एंड व्हाय इट फेल्स टू डिलीवर’ पर बात कर रहे हैं द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु.

दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों की कार्यवाहक सहायक विदेश मंत्री एलिस जी वेल्स. (फोटो: ट्विटर)

अल्पसंख्यकों को क़ानूनी संरक्षण के बावजूद भारत में हो रहीं हिंसा-भेदभाव की घटनाएं: अमेरिका

दक्षिण और मध्य एशिया के मामलों के लिए अमेरिका के विदेश मंत्रालय की राजदूत एलिस वेल्स ने अमेरिकी सदन में कहा कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव की घटनाएं, स्वयंभू गो-रक्षकों द्वारा दलितों और मुस्लिमों पर हमले जैसी घटनाएं भारत द्वारा अल्पसंख्यकों को प्रदत्त कानूनी संरक्षण के अनुरूप नहीं हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

महिला सशक्तिकरण पर भारतीय जनता पार्टी के खाने के दांत अलग हैं और दिखाने के अलग

ऐसे में जब देश में महिलाओं का कोई वास्तविक प्रतिनिधित्व ही नहीं बचा और सरकार में नारी शक्ति की मिसाल मानी जाने वाली तथाकथित जुझारू नेता भाजपा नेताओं या समर्थकों द्वारा किए उत्पीड़न के कई मामलों पर मुंह सिलकर बैठ चुकी हैं, तो कैसे सरकार से किसी न्याय की उम्मीद लगाई जाए?

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

यह प्रार्थना पर नहीं बल्कि हिंदू समाज के दिलो-दिमाग के सिकुड़ने पर दुख मनाने का वक़्त है

विश्व हिंदू परिषद ने पीलीभीत के एक प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर पर राष्ट्रगान की जगह इक़बाल की प्रार्थना गवाने का आरोप लगाया. उनसे शिकायत नहीं पर जिलाधीश से है. उन्होंने जिस प्रार्थना के लिए हेडमास्टर को दंडित किया, क्या उसके बारे में उन्हें कुछ मालूम नहीं? क्या अब हम ऐसे प्रशासकों की मेहरबानी पर हैं जो विश्व हिंदू परिषद का हुक्म बजाने के अलावा अपने दिल और दिमाग का इस्तेमाल भूल चुके हैं?

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क्या मुस्लिम लड़कियों को तालीम के नाम पर ग़ुलाम बनाने की कोशिश की गई है?

वीडियो: मुस्लिम लड़कियों को लड़कों से अलग शिक्षा दिए जाने के सवाल उठने पर चंद मुस्लिम महिलाओं की सफलता की मिसाल दी जाती है, लेकिन क्या एक आम घर की मुस्लिम लड़की को शिक्षा का वही अधिकार और माहौल मिलता है, जिसके दावे किए जाते हैं?

Tezpur: Bollywood actor Naseeruddin Shah perform during Kartik Hazarika National Theatre Festival, in Tezpur, Thursday, Jan 10, 2019. (PTI Photo) (PTI1_10_2019_000133B)

समाज में खुलेआम नफरत की भावना परेशान करने वाली है: नसीरूद्दीन शाह

मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखने वाली 49 हस्तियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने की निंदा करने वाले साहित्य और कला क्षेत्र की 180 से अधिक हस्तियों में अभिनेता नसीरूद्दीन शाह भी शामिल थे.

Young girls dressed as Kumari sit in front of the idols of Hindu goddess Durga before being worshipped as part of a ritual during the Durga Puja festival celebrations at a pandal in Kolkata (Image: Reuters)

दुर्गा पूजा में राम की जयकार के क्या मायने हैं?

दुर्गा अब राष्ट्रवाद की गुलाम बना ली गई हैं. फिर उनसे वही काम लिया जा रहा है, जो कभी डरपोक-कपटी देवताओं ने उनकी आड़ में महिषासुर पर वार करके लिया था. अब दुर्गा की आड़ में आक्रमण मुसलमानों पर किया जा रहा है और हम, जो खुद को दुर्गा का भक्त कहते हैं, यह होने दे रहे हैं.

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झारखंड: चोरी के संदेह में युवक की पीट-पीटकर हत्या

मामला झारखंड के कोडरमा जिले का है. रेलवे कॉलोनी में चोरी के शक में स्थानीय लोगों ने करीब 30 वर्षीय सुनील कुमार यादव की कथित तौर पर पिटाई कर दी. इसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान सुनील की मौत हो गई.

A painting by Roger de La Fresnaye. (साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

एक दिन देश के अराजनीतिक बुद्धिजीवियों से भोली-भाली जनता करेगी कुछ सवाल…

‘अराजनीतिक बुद्धिजीवी’ शीर्षक की यह कविता ग्वाटेमाला के क्रांतिकारी कवि ओतो रेने कास्तियो ने लिखी थी, जिन्हें ग्वाटेमाला की फौज ने 19 मार्च 1967 को जान से मार दिया था.

Mohalla Clinic Delhi The Wire

दिल्ली की आम जनता की उम्मीदों पर कितने खरे उतरे मोहल्ला क्लीनिक?

ग्राउंड रिपोर्ट: स्वास्थ्य सेवाओं को जन सुलभ बनाने के उद्देश्य से 2016 में दिल्ली सरकार ने मोहल्ला क्लीनिक की शुरुआत की थी. सरकार का वादा एक हज़ार क्लीनिक खोलने का था, लेकिन फिलहाल दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे 210 क्लीनिक काम कर रहे हैं.

Mohalla Clinic Delhi The Wire

​ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक की ज़मीनी हक़ीक़त

वीडियो: दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने 2016 में मोहल्ला क्लीनिक की शुरुआत की थी. सरकार का वादा पूरे दिल्ली में हज़ार मोहल्ला क्लीनिक खोलने का था, लेकिन वर्तमान में दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में 210 मोहल्ला क्लीनिक काम कर रहे हैं. द वायर की संतोषी मरकाम ने ऐसे ही कुछ मोहल्ला क्लीनिक का दौरा किया और उनकी स्थिति जानी.

Khunti

झारखंड में फिर से मॉब लिंचिंग, एक युवक की हत्या, दो की हालत गंभीर

यह घटना झारखंड के खूंटी जिले की है. पुलिस का कहना है कि रविवार सुबह लगभग 10 बजे के आसपास भीड़ ने तीन लोगों पर उस वक्त हमला किया, जब ये लोग कथित तौर पर एक जानवर के शव से मांस निकाल रहे थे.

Darang Assam Map

असम: थाने में गर्भवती महिला सहित तीन बहनों के कपड़े उतारकर पीटा, दो पुलिसकर्मी सस्पेंड

घटना असम के दरांग ज़िले की है. महिलाओं के भाई पर कथित तौर पर एक हिंदू महिला को अगवा करने का आरोप है, जिसकी पूछताछ के लिए उन्हें पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था.

गृहमंत्री अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

अमित शाह की हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने की अपील, विपक्षी नेताओं ने जताया विरोध

हिंदी दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अनेक भाषा और बोलियां हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत हैं, परंतु ज़रूरत है कि देश की एक भाषा हो, जिसके कारण विदेशी भाषाओं को जगह न मिले.