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मामलों की जांच के लिए सीबीआई द्वारा राज्यों को भेजे गए अनुरोधों के लंबित रहने पर कोर्ट चिंतित

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे मामलों में अपीलीय अदालतों के स्थगन आदेश पर भी चिंता ज़ाहिर की और कहा कि इससे सुनवाई की गति प्रभावित होती है.

भारत अगले महीने से अतिरिक्त कोविड-19 टीके का निर्यात बहाल करेगा

देश के लोगों के टीकाकरण को सरकार की शीर्ष प्राथमिकता बताते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि अतिरिक्त टीकों का निर्यात अगली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में ‘वैक्सीन मैत्री’ कार्यक्रम के तहत और ‘कोवैक्स’ पहल के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए शुरू होगा.

2020 में कोविड वैक्सीन के ट्रायल में शामिल कई लोगों को अब तक नहीं मिले टीकाकरण सर्टिफिकेट

टीकाकरण सर्टिफिकेट न मिलने के कारण ट्रायल में शामिल हुए लोगों को आवागमन समेत विभिन्न दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ट्रायल के दौरान उन्हें जो सर्टिफिकेट मिला था, उसे अक्सर ‘फ़र्ज़ी’ बता दिया जा रहा है.

कोविड टीकाकरण में आई 60 फीसदी की कमी, कई राज्यों ने कहा- नहीं बचीं खुराक

साल के अंत तक सभी भारतीय वयस्कों को पूरी तरह से कोविड टीका लगाने की केंद्र की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए हर दिन कम से कम अस्सी लाख खुराक दी जानी है. हालांकि, खुराक की कमी के कारण कई राज्यों को टीकाकरण केंद्रों को बंद करना पड़ा है.

कोविड-19 के कारण 30,000 से अधिक बच्चों ने अपने माता या पिता या फ़िर दोनों को खोया: एनसीपीसीआर

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोविड-19 के कारण माता-पिता में से किसी एक या फ़िर दोनों को खोने वाले बच्चों में 15,620 लड़के, 14,447 लड़कियां और चार ट्रांसजेंडर शामिल हैं. इनमें से अधिकतर बच्चे आठ से 13 आयु वर्ग के हैं. महाराष्ट्र में ऐसे बच्चों की संख्या सर्वाधिक है. इसके बाद उत्तर प्रदेश में और राजस्थान हैं.

कोरोना के दौरान अनाथ हुए बच्चों को अवैध तरीके से गोद लेने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना काल में अभिभावक को खोने वाले या बेसहारा, अनाथ हुए बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के लिए कई निर्देश जारी करते हुए कहा कि अनाथ बच्चों को गोद लिए जाने का आमंत्रण देना कानून के प्रतिकूल है, क्योंकि केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की भागीदारी के बिना गोद लेने की अनुमति नहीं है.

कर्मचारियों को निकालने के लिए वित्तीय संकट या महामारी के प्रभाव को आधार नहीं बना सकते: कोर्ट

बीते साल एयर इंडिया के कुछ पायलटों ने इस्तीफ़े देने के बाद उन्हें स्वीकार किए जाने से पहले ही वापस ले लिया था पर कंपनी ने इसके बावजूद इस्तीफ़े स्वीकार कर लिए. उनका तर्क था कि इस्तीफ़ों को दी गई स्वीकृति पूरी तरह से उचित है क्योंकि कंपनी कई वर्षों से वित्तीय संकट से जूझ रही है.

कोविड के कारण नौ हज़ार से अधिक बच्चे बेसहारा, अनाथ हुए: एनसीपीसीआर

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 29 मई तक राज्यों की ओर से प्रदान किए गए आंकड़ों के मुताबिक 9,346 ऐसे बच्चे है, जो कोरोना महामारी के कारण बेसहारा और अनाथ हो गए हैं या फिर अपने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया है. ऐसे सबसे ज़्यादा 2,110 बच्चे उत्तर प्रदेश में हैं.

यह कल्पना नहीं कर सकते कि कोविड-19 के कारण कितने बच्चे अनाथ हुए हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने कहीं पढ़ा था कि महाराष्ट्र में 2,900 से अधिक बच्चों ने कोविड-19 के कारण अपने माता-पिता में से किसी एक को या दोनों को खो दिया है. हमारे पास ऐसे बच्चों की सटीक संख्या नहीं है. न्यायालय ने कहा कि ऐसे बच्चों के साथ सड़कों पर भूख से तड़प रहे बच्चों की देखभाल करने का निर्देश राज्य सरकारों और संबंधित प्राधिकारियों को दिया है.

भारत में चीन जैसा अनुशासन संभव नहीं, स्वास्थ्य ढांचे को सुधारने पर ध्यान दें: गुजरात हाईकोर्ट

अदालत ने कहा कि गुजरात सरकार को इस बात को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र के ढांचे का विकास करना चाहिए कि महामारी की तीसरी या चौथी लहर आ सकती है, क्योंकि लोग मास्क पहनना, सामाजिक दूरी बनाए रखना और स्वच्छता जैसे नियमों का पालन नहीं करने जा रहे. अदालत ने ब्लैक फंगस के इलाज के लिए अस्पतालों को संबंधित इंजेक्शन के वितरण को लेकर राज्य सरकार की अधिसूचना अस्पष्ट और दोषपूर्ण बताया है.

केंद्र और राज्य के बीच रेमडेसिविर को लेकर समन्वय की कमी: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर गुजरात की मांग क्यों नहीं पूरी की जा रही है. हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले एक महीने से राज्य को प्रतिदिन करीब 16,000 शीशियों की आपूर्ति जारी रखी है, जबकि मांग प्रतिदिन लगभग 25,000 शीशियों की थी.

पिछले पांच सालों में केंद्र सरकार पर कैग रिपोर्ट्स में 75 फीसदी की कमी आई: आरटीआई

अपनी रिपोर्ट्स के ज़रिये वित्तीय जवाबदेही तय करने और सरकारी अनियमितताओं को सामने लाने वाली कैग ने 2जी, कोयला आवंटन, 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स समेत कई घोटालों को उजागर किया था. आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार 2015 में कैग ने 55 रिपोर्ट्स पेश की थीं, जिनकी संख्या 2020 घटकर 14 हो गई.

शैक्षणिक संसाधनों में ग़ैर बराबरी: शिक्षा या शिक्षा का भ्रम

शिक्षा में साधनों की असमानता का एक पक्ष यह भी है कि जिन अकादमिक या बौद्धिक चिंताओं पर हम महानगरीय शिक्षा संस्थानों में बहस होते देखते हैं, वे राज्यों के शिक्षा संस्थानों की नहीं हैं. राज्यों के कॉलेजों के लिए अकादमिक स्वतंत्रता का प्रश्न ही बेमानी है क्योंकि अकादमिक शब्द ही उनके लिए अजनबी है.

वित्त वर्ष 2019 की कई कैग ऑडिट रिपोर्ट के सार्वजनिक पटल पर न आने की वजह क्या है

बीते कुछ सालों में विधानसभाओं में ऑडिट रिपोर्ट्स पेश करने में ख़ासी देर हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट पेश होने में हुई देर इसके प्रभाव को तो कम करती ही है, साथ ही सरकार में ग़ैर-जवाबदेही के चलन को बढ़ावा भी मिलता है.

केंद्र ने राज्यों से कहा- स्वयं सहायता समूहों को दिए बैंक क़र्ज़ों को तेज़ी से वसूलें, एनपीए में हो रहे तब्दील

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की प्रदर्शन समीक्षा समिति बैठक में पेश एजेंडा पेपर के अनुसार, मार्च के अंत तक देशभर में 54.57 लाख स्वयं सहायता समूहों को 91,130 करोड़ रुपये के बैंक क़र्ज़ दिए गए, जिनमें से 2,168 करोड़ रुपये एनपीए में तब्दील हो गए.