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उत्तर प्रदेश: खेत में मिला दलित किशोरी का शव, बलात्कार की आशंका

मामला अलीगढ़ ज़िले के अकराबाद का है, जहां रविवार को पशुओं के लिए चारा लेने गई सोलह साल की किशोरी का शव देर शाम एक खेत में अर्द्धनग्नावस्था में पड़ा मिला. अंदेशा है कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ है. पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर हत्या व बलात्कार का मामला दर्ज किया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गुजरात: दलित व्यक्ति की बारात में शामिल लोगों पर पथराव, नौ के ख़िलाफ़ प्राथमिकी

गुजरात के अरवल्ली ज़िले का मामला है. पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बारात में शामिल दलित पुरुषों और महिलाओं के परंपरागत साफा पहनने पर आपत्ति जताई थी. राजपूत समुदाय के नौ लोगों के ख़िलाफ़ दंगा, हमला, आपराधिक धमकी देने और एससी/एसटी एक्ट के तहत के तहत मामला दर्ज किया गया है.

(फोटो: पीटीआई)

जम्मू कश्मीर: कोरोना पीड़ित के अंतिम संस्कार के दौरान भीड़ का हमला, परिजन अधजली लाश लेकर भागे

डोडा जिले के रहने वाले व्यक्ति की जम्मू स्थित राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में कोविड-19 की वजह से मौत हो गई थी. परिजनों ने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों ने कोई मदद नहीं की. उनका कहना है कि सरकार को वायरस से मरने वालों के अंतिम संस्कार करने के लिए बेहतर योजना बनानी चाहिए.

A Kashmiri man holds stones during clashes with Indian security forces, after scrapping of the special constitutional status for Kashmir by the Indian government, in Srinagar, August 23, 2019. REUTERS/Adnan Abidi

जम्मू कश्मीर में 2017 और 2018 के मुकाबले 2019 में पत्थरबाज़ी की घटनाएं बढ़ीं, 1996 मामले दर्ज: आरटीआई

जम्मू कश्मीर में साल 2018 में पत्थर फेंकने की 1458 और 2017 में 1412 घटनाएं दर्ज की गईं. पिछले साल पांच अगस्त को विशेष राज्य का दर्जा हटाने के बाद से यहां 1193 घटनाएं दर्ज की गई हैं. अगस्त 2019 में राज्य में पत्थरबाज़ी की कुल 658 घटनाएं सामने आईं, जबकि उससे पहले जुलाई में सिर्फ़ 26 घटनाएं हुई थीं.

नजीर अहमद रोंगा. (फोटो: फेसबुक)

मतदान के लिए प्रोत्साहित करने वाले कश्मीरी वकील विरोध प्रदर्शन के डर से हिरासत में

कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नजीर अहमद रोंगा को जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म करने से एक दिन पहले 4 अगस्त को पीएसए के तहत गिरफ़्तार किया गया था. आरोप है कि वे इस निर्णय को लेकर लोगों को प्रभावित कर सकते थे.

A Kashmiri man holds stones during clashes with Indian security forces, after scrapping of the special constitutional status for Kashmir by the Indian government, in Srinagar, August 23, 2019. REUTERS/Adnan Abidi

अनुच्छेद 370: सरकार ने कश्मीरियों के घाव पर मरहम की जगह नमक रगड़ दिया है

श्रीनगर से ग्राउंड रिपोर्ट: मुख्यधारा के मीडिया में आ रही कश्मीर की ख़बरों में से 90 प्रतिशत झूठी हैं. कश्मीर के हालात मामूली प्रदर्शनों तक सीमित नहीं हैं और न ही यहां कोई सड़कों पर साथ मिलकर बिरयानी खा रहा है.

**EDS: RPT WITH DATE CORRECTION** Srinagar: A view of a deserted street during restrictions in Srinagar, Wednesday, Aug 7, 2019. Restrictions have been imposed in several districts of Jammu and Kashmir as a precautionary measure after the state lost its special status and was bifurcated on Tuesday as Parliament approved a resolution scrapping Article 370 of the Constitution and passed a bill to split the state into two Union Territories. (PTI Photo/S. Irfan)(PTI8_9_2019_000010B)

अनंतनाग में पथराव से एक व्यक्ति की मौत, कश्मीर में 22वें दिन भी जनजीवन प्रभावित

कश्मीर घाटी में 22वें दिन भी दुकानें और अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे. श्रीनगर के लाल चौक और प्रेस एन्क्लेव क्षेत्र में अब भी लैंडलाइन टेलीफोन सेवाएं बंद हैं. मोबाइल सेवाएं और बीएसएनएल ब्रॉडबैंड तथा इंटरनेट संबंधी अन्य सेवाएं पांच अगस्त से ही बंद हैं.

Aurangabad: A scene of arson after violent clashes between two groups during a Ramnavmi procession in Aurangabad district on Monday. PTI Photo   (PTI3_26_2018_000132B)

औरंगाबाद: दंगा पीड़ित दुकानदारों को क्यों लग रहा है कि नीतीश सरकार उन्हें ठग रही है?

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार के औरंगाबाद में मार्च महीने में रामनवमी के समय हुई सांप्रदायिक हिंसा में कई दुकानों में लूटपाट कर आग लगा दी गई थी. उस समय नीतीश सरकार ने पीड़ित दुकानदारों को मुआवज़ा देने की बात कही थी, लेकिन चार महीने बाद भी ज़्यादातर दुकानदारों को एक रुपया भी मुआवज़ा नहीं मिला है.

सेना द्वारा मानव ढाल बनाए गए फ़ारूक़ अहमद डार.

सेना द्वारा मानव ढाल बनाए गए फ़ारूक़ को वोट डालने पर सामाजिक बहिष्कार भी सहना पड़ा

कश्मीर में पिछले साल नौ अप्रैल को सेना ने फ़ारूक़ को पत्थरबाज़ बताते हुए जीप की बोनट से बांधकर कई गांवों में घुमाया था. घटना के एक साल बाद भी फ़ारूक़ अवसाद में हैं.

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एक साल बीतने के बाद भी सेना के ‘मानव ढाल’ को इंसाफ़ का इंतज़ार है

9 अप्रैल 2017 को सेना द्वारा जीप पर बांधकर घुमाए गए फ़ारूक़ अहमद डार साल भर बाद भी अपनी सामान्य ज़िंदगी में लौटने के लिए जूझ रहे हैं.

जम्मू कश्मीर के फोटो पत्रकार कामरान यूसुफ़. (फोटो साभार: फेसबुक)

कश्मीरी फोटो पत्रकार को मिली ज़मानत, एनआईए ने पत्थरबाज़ी के आरोप में किया था गिरफ़्तार

एनआईए ने फोटो पत्रकार कामरान यूसुफ़ की गिरफ़्तारी के पक्ष में दलील दी थी कि एक पत्रकार की ज़िम्मेदारी होती है कि वह सरकारी विभागों के विकास कार्यों, स्कूल और अस्पताल के उद्घाटन या सत्तारूढ़ दल के बयान को कवरेज दे.

जम्मू कश्मीर के फोटो पत्रकार कामरान यूसुफ़. (फोटो साभार: फेसबुक)

‘सच्चा पत्रकार’ वो होता है जो सरकार के विकास कार्यों को कवर करे: एनआईए

कश्मीर के फोटो पत्रकार कामरान यूसुफ़ की गिरफ़्तारी को जायज़ ठहराते हुए एनआईए ने अदालत में उन्हें पत्रकार मानने से इनकार किया है.

Srinagar: Protesters throw stones on security forces amid tear smoke during a protest against the alleged killing of two youth in Army firing in Shopian district of South Kashmir, in Srinagar on Sunday. PTI Photo by S Irfan    (PTI1_28_2018_000158B)

शोपियां में दो लोगों की मौत पर सेना के ख़िलाफ़ केस दर्ज, जम्मू कश्मीर विधानसभा में हंगामा

बीते शनिवार को शोपियां ज़िले में सेना की गोलीबारी के दौरान दो आम नागरिकों की मौत हो गई थी.