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(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

यूपी: 212 करोड़ रुपये का बकाया छोड़ बंद हो गईं पूर्वांचल की चार चीनी मिलें

शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर 1966 कहता है कि चीनी मिलें किसान को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के अंदर भुगतान करेंगी, यदि वे ऐसा न करें तो उन्हें बकाया गन्ना मूल्य पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा. यूपी सरकार इस नियम का पालन न तो निजी चीनी मिलों से करवा पा रही है न उसकी अपनी चीनी मिलें इसे मान रही हैं.

Karad: Bullock carts loaded with sugarcane move towards a sugar mill, in Karad, Maharashtra, Monday, Nov 05, 2018. (PTI Photo)(PTI11_5_2018_000061B)

उत्तर प्रदेश: गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर पिछले साल का 8400 करोड़ रुपये बकाया

पिछले साल भी गन्ने की पेराई शुरू होने से पहले चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के बकाया थे लेकिन वह रकम इतनी अधिक नहीं थी. साल 2018-19 में राज्य मिलों पर गन्ना किसानों का 4,941 करोड़ रुपये बकाया था.

(फोटो: पीटीआई)

उत्तर प्रदेश: क्यों परेशान हैं पूर्वांचल के गन्ना किसान

यूपी के बड़े गन्ना उत्पादक ज़िलों में से एक कुशीनगर और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश से हुए जलजमाव के चलते गन्ने की फसल सूखने की ख़बरें आ रही हैं. सरकारी सर्वेक्षण भी बड़े पैमाने पर फसल के नुक़सान की तस्दीक कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक किसानों को किसी तरह की मदद देने की बात नहीं कही है.

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उत्तर प्रदेश: आर्थिक तंगी से परेशान गन्ना किसान ने की आत्महत्या, किसानों का प्रदर्शन

मामला मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले के सिलौली का है, जहां एक पचास वर्षीय किसान का शव खेत में लटका मिला. उनके परिजनों ने बताया कि वह लॉकडाउन के कारण गन्ने की फसल न बेच पाने की वजह से अवसाद में थे.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

यूपी: महराजगंज में बंद पड़ी चीनी मिल से प्रभावित 48,000 किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं

भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में वादा किया था कि फसल बेचने के 14 दिन के भीतर गन्ना किसानों का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा और सरकार बनने के 120 दिनों के भीतर गन्ना किसानों का बकाया भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन उत्तर प्रदेश में पार्टी की सरकार बनने के बाद भी ये वादे काग़ज़ों से बाहर नहीं निकल सके हैं.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

चीनी उद्योग को मिले 8,500 करोड़ रुपये के पैकेज से किसानों को ​क्या कोई फायदा होगा?

इतिहास यही रहा है कि सरकारें जब भी चीनी उद्योग के लिए राहत पैकेज जारी करती हैं तो उसमें किसानों के हित गौण हो जाते हैं और लाभ मिलों को पहुंचता है.

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सरकार चीनी मिलों को दे सकती है 7,000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज

सूत्रों के मुताबिक, खाद्य मंत्रालय ने 30 लाख टन चीनी के बफर स्टॉक बनाने का प्रस्ताव दिया है. चीनी स्टॉक को बनाए रखने की लागत सरकार द्वारा वहन की जाएगी.

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क्यों गन्ने की खेती पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी मुद्दा नहीं है?

गन्ने की खेती का मसला राजनीतिक दलों के लिए ही नहीं आश्चर्यजनक रूप से खुद किसानों के लिए भी चुनावी मुद्दा नहीं है.