Uddhav Thackeray

लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन के बाहर उमड़ी प्रवासी मजदूरों की भीड़. (फोटो: रॉयटर्स)

महाराष्ट्र: 15 दिन की पाबंदी की घोषणा के बाद मुंबई के स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़

मध्य रेलवे ने लोगों से परेशान नहीं होने और रेलवे स्टेशन पर भीड़ नहीं लगाने की अपील की है. महाराष्ट्र सरकार ने महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 14 अप्रैल रात आठ बजे से 15 दिनों के राज्यव्यापी प्रतिबंधों की घोषणा की है. सरकार ने फिल्म और टीवी शूटिंग पर रोक लगा दी है.

मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वाजे पुलिस आयुक्त से मुलाकात की. (फोटो: पीटीआई)

मुंबई: वझे ने देखमुख पर फिर लगाए आरोप, एनआईए ने मनसुख हिरेन को सह-साज़िशकर्ता बताया

उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास वाहन मिलने व व्यवसायी मनसुख हिरेन की मौत मामलों में गिरफ़्तार निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वझे ने दावा किया कि अनिल देशमुख ने मुंबई पुलिस में उनकी सेवाएं जारी रखने के लिए उनसे दो करोड़ रुपये मांगे थे. वझे ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य मंत्री अनिल परब ने उनसे मुंबई के कुछ ठेकेदारों से पैसे एकत्र करने को कहा था.

अनिल देशमुख. (फोटो: ट्विटर/@AnilDeshmukhNCP)

कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश के बाद महाराष्ट्र के गृहमंत्री का इस्तीफ़ा

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ सीबीआई जांच की मांग की थी. सोमवार को अदालत ने सीबीआई को पंद्रह दिनों के अंदर एक आरंभिक जांच पूरी करने का निर्देश दिया है. परमबीर का आरोप है कि गृहमंत्री देशमुख ने पुलिस से हर महीने बार और होटलों से 100 करोड़ की वसूली करने को ​कहा था.

मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह. (फाइल फोटो: पीटीआई)

कोर्ट ने मुंबई पुलिस के पूर्व प्रमुख से पूछा, गृहमं​त्री देशमुख के ख़िलाफ़ केस क्यों नहीं किया

मुंबई पुलिस के पूर्व प्रमुख परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया था कि उन्होंने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वझे से मुंबई के बार और होटलों से प्रति माह 100 करोड़ रुपये की वसूली करने को कहा था. मामले में केस दर्ज न कराने पर हाईकोर्ट ने सिंह से कहा कि आप वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं. ग़लत काम के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराना आपकी ज़िम्मेदारी थी.

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महाराष्ट्र: परमबीर सिंह द्वारा गृह मंत्री पर लगाए आरोपों की जांच के लिए समिति का गठन

राज्य सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज कैलाश उत्तमचंद चांदीवाल करेंगे, जिन्हें छह महीने में रिपोर्ट देने को कहा गया है. मुंबई पुलिस आयुक्त पद से तबादले के बाद परमबीर सिंह ने गृह मंत्री अनिल देशमुख पर सचिन वझे को सौ करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य देने का आरोप लगाया था.

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महाराष्ट्र: गृहमंत्री के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह

परमबीर सिंह ने शीर्ष अदालत से महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख के कथित कदाचार की पूर्वाग्रह रहित और स्वतंत्र सीबीआई जांच करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है. सिंह ने मुंबई के पुलिस आयुक्त पद से उनके तबादले को ‘मनमाना’ और ‘ग़ैर क़ानूनी’ बताते हुए इसे रद्द करने का निवेदन भी किया है.

एनसीपी प्रमुख शरद पवार. (फोटो: पीटीआई)

अनिल देशमुख पर परमबीर सिंह के आरोप गंभीर, उद्धव ठाकरे करेंगे फ़ैसला: शरद पवार

मुंबई के पुलिस आयुक्त पद से हटाए गए परमबीर सिंह ने दावा किया है कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख चाहते हैं कि पुलिस अधिकारी हर महीने बार और होटलों से कम से कम 100 करोड़ रुपये की वसूली करें. देखमुख ने इस आरोप को ख़ारिज करते हुए कहा कि वह उनके ख़िलाफ़ मानहानि का मामला दर्ज कराएंगे.

सचिन वझे. (फोटो साभार: ट्विटर)

मनसुख हिरेन हत्या: महाराष्ट्र एटीएस का केस सुलझाने का दावा, सचिन वझे को मुख्य आरोपी बताया

व्यवसायी मनसुख हिरेन की कथित हत्या के मामले में महाराष्ट्र एटीएस ने एक पुलिसकर्मी और एक सट्टेबाज़ को गिरफ़्तार किया है. एक अधिकारी ने बताया कि मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वझे ने अपराध में मुख्य भूमिका निभाई थी और वह मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आए हैं.

मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह. (फाइल फोटो: पीटीआई)

मुंबई: पूर्व पुलिस आयुक्त ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री देशमुख पर लगाया 100 करोड़ की वसूली का आरोप

उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटकों से भरा वाहन मिलने का मामला और उलझ गया है. मुंबई के पुलिस आयुक्त पद से हाल ही में हटाए गए परमबीर सिंह ने दावा किया है कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख चाहते हैं कि पुलिस अधिकारी हर महीने बार और होटलों से कम से कम 100 करोड़ रुपये की वसूली करें. देखमुख ने इस आरोप को ख़ारिज करते हुए कहा कि वह उनके ख़िलाफ़ मानहानि का मामला दर्ज कराएंगे.

मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वाजे पुलिस आयुक्त से मुलाकात की. (फोटो: पीटीआई)

एंटीलिया विस्फोटक मामला: विवादों में घिरे पुलिस अधिकारी को क्राइम ब्रांच से हटाया गया

बीते 25 फरवरी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक से लदी एसयूवी मिली थी. इसके दस दिन बाद कार के मालिक और कारोबारी मनसुख हिरेन का शव ठाणे में मिला. इस दौरान हिरेन की पत्नी ने मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वझे का नाम लिया था, जिसके बाद से विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है.

गृहमंत्री अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

महाराष्ट्र: अमित शाह बोले- नहीं किया था मुख्यमंत्री पद का वादा, शिवसेना ने कहा- अब तक चुप क्यों थे

गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को महाराष्ट्र की महाविकास अघाडी सरकार को ‘तीन-पहिया वाली ऑटो-रिक्शा’ कहते हुए उस पर सभी मोर्चों पर नाकाम रहने का आरोप लगाया था. शिवसेना का कहना है कि इस बारे में लंबी बहस हो जाने के डेढ़ साल बाद शाह को इस पर प्रतिक्रिया देने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा.

(फोटो साभारः फेसबुक)

महाराष्ट्र: आदिवासी नेताओं ने चिड़ियाघर का नाम बाल ठाकरे के नाम पर रखने पर आपत्ति जताई

महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर के गोरेवाडा अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर का नाम बदलकर बालासाहेब ठाकरे गोरेवाडा अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान कर दिया है. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि पार्क के नाम पर चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है. उन्होंने गोंड जनजाति की संस्कृति और इतिहास को चित्रित करते हुए गोंडवाना थीम पार्क की स्थापना की घोषणा की.

(फोटो: गूगल मैप)

महाराष्ट्र: पालघर मॉब लिंचिंग मामले में 89 आरोपियों को ज़मानत मिली

पालघर के गढ़चिंचले गांव में 16 अप्रैल, 2020 को भीड़ ने बच्चा चोर होने के शक में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. मामले में कुल 201 लोग गिरफ़्तार किए गए थे, जिनमें से 75 मुख्य आरोपी जेल में हैं.

महाराष्ट्र का भंडारा जिला अस्पताल (फोटोः एएनआई)

महाराष्ट्रः भंडारा ज़िला अस्पताल में आग लगने से दस नवजातों की मौत, जांच के आदेश

शनिवार तड़के भंडारा ज़िला अस्पताल के सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट में आग लग गई. यहां कुछ दिनों की उम्र से लेकर कुछ महीनों के 17 नवजात बच्चे थे, जिनमें से सात को ही बचाया जा सका. आग की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है.

(फोटो: पीटीआई)

अर्णब गोस्वामी बनाम अन्य: क्या सुप्रीम कोर्ट की नज़र में सभी नागरिक समान नहीं हैं?

हाल ही में रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को ज़मानत देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट एवं ज़िला न्यायालयों को निर्देश दिया कि वे बेल देने पर जोर दें, न कि जेल भेजने में. सवाल ये है कि क्या ख़ुद शीर्ष अदालत हर एक नागरिक पर ये सिद्धांत लागू करता है या फिर रसूख वाले और सत्ता के क़रीबी लोगों को ही इसका लाभ मिल पा रहा है?