Union Finance Ministry

भारतीय रिज़र्व बैंक ऑफिस दिल्ली (फोटो: रॉयटर्स)

राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए आरबीआई से 30000 करोड़ का अंतरिम लाभांश ले सकती है सरकार

केंद्र सरकार पहले भी राजकोषीय घाटा कम करने के लिए आरबीआई से अंतरिम लाभांश ले चुकी है. पिछले साल सरकार ने आरबीआई से 28 हजार करोड़ रुपये का अंतरिम लाभांश लिया था. इससे पहले 2017-18 में इस तरह से 10 हजार करोड़ रुपये लिए गए थे.

राहुल गांधी. (फोटो: पीटीआई)

‘आर्थिक त्रासदी’ पर प्रधानमंत्री-वित्त मंत्री बेखबर, आरबीआई से कर रहे चोरी: राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री इसको लेकर बेखबर हैं कि उनके खुद के द्वारा पैदा की गई आर्थिक त्रासदी को कैसे दूर किया जाए. आरबीआई से चुराने से काम नहीं चलने वाला है. यह किसी दवाखाने से बैंड-एड चुराकर, गोली लगने से हुए घाव पर लगाने जैसा है.

भारतीय रिज़र्व बैंक (फोटो: रॉयटर्स)

आरबीआई ने मोदी सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये देने का फैसला किया

आरबीआई के निदेशक मंडल ने केंद्रीय बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद यह कदम उठाया है. आरबीआई ने सरकार को जो राशि देने का फैसला किया है वह पिछले पांच सालों के मुकाबले तीन गुना अधिक है.

गौतम अडाणी. (फोटो: पीटीआई)

हवाई अड्डों के निजीकरण में वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के दिशानिर्देशों को किया गया नजरअंदाज

इस साल फरवरी में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत देश के छह हवाई अड्डों के संचालन का ठेका 50 साल के लिए अडाणी समूह को मिला था.

New Delhi: Reserve Bank of India Governor Shaktikanta Das interacts with the media at the RBI office, in New Delhi, Monday, Jan. 7, 2019.(PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI1_7_2019_000090B)

चुनाव से पहले अंतरिम लाभांश के रूप में सरकार को 28 हजार करोड़ रुपये देगी आरबीआई

आरबीआई में वित्त वर्ष जुलाई से जून की अवधि में होता है और अमूमन वह अगस्त में खाता बंद होने के बाद ही सरकार को लाभांश देता है. हालांकि, आरबीआई ने अंतरिम लाभांश की रकम तय करने के लिए पहली बार अपने छमाही खातों का ऑडिट कराया है.

An employee counts Indian currency notes at a cash counter inside a bank in Mumbai. File picture: Rupak De Chowdhuri

नोटबंदी के बाद बैंकों को मिले सबसे ज़्यादा जाली नोट, संदिग्ध लेन-देन के मामले भी बढ़े: रिपोर्ट

फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट की रिपोर्ट के अनुसार, जाली मुद्रा रिपोर्ट (सीसीआर) की संख्या 2015-16 के 4.10 लाख से बढ़कर 2016-17 में 7.33 लाख पर पहुंच गई. संदिग्ध लेन-देन में भी 480 प्रतिशत से भी अधिक का इज़ाफ़ा.