Urdu poet

राहत इंदौरी. (फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स//Imfarhad7 CC BY SA 4.0)

राहत इंदौरी: ख़ामोश हो गए इक शाम और उसके बाद तमाम शहर में मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू हम थे

बहुत कम शायर अवाम की बेचेहरगी और अवसाद को सत्ता के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बनाने में कामयाब हुए. ऐसे में राहत ने ग़ज़ल के हाशिये में पड़ी भाषा और मुंहफट चरित्रों को सत्ता के सामने खड़ा कर दिया. उनसे पहले भी शायरोंं ने सत्ता को आईना दिखाने की कोशिश की, लेकिन उनकी ग़ज़लें ज़रा ज़्यादा मुंहफट साबित हुईं.

AKI 12 August 2020.00_31_54_20.Still002

‘किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’, राहत इंदौरी पर पुराने दोस्त मुनव्वर राना

वीडियो: शायर राहत इंदौरी का बीते 11 अगस्त को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वे कोरोना पॉजिटिव भी पाए गए थे. प्रख्यात शायर मुनव्वर राना ने राहत इंदौरी के साथ अपने पुराने दिनों को साझा किया.

राहत इंदौरी. (फोटो साभार: फेसबुक)

कोरोना संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती शायर राहत इंदौरी का दिल का दौरा पड़ने से निधन

डॉक्टरों का कहना है कि मशहूर शायर राहत इंदौरी के फेफड़े 70 फीसदी तक ख़राब हो गए थे. उन्हें हाइपरटेंशन और मधुमेह की भी समस्या थी.

गुलज़ार देहलवी. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

कोरोना से ठीक होने के पांच दिन बाद उर्दू शायर गुलज़ार देहलवी का निधन

पुरानी दिल्ली के गली कश्मीरियां में 1926 में जन्मे गुलज़ार देहलवी भारत सरकार द्वारा 1975 में प्रकाशित पहली उर्दू विज्ञान पत्रिका ‘साइंस की दुनिया’ के संपादक भी रह चुके थे.

पोस्टर साभार: ख़्वाब तन्हा कलेक्टिव

आईआईटी कानपुर की जांच समिति ने कहा, फ़ैज़ की नज़्म गाने का समय और स्थान सही नहीं था

आईआईटी कानपुर के छात्रों द्वारा जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई दिल्ली पुलिस की बर्बर कार्रवाई और जामिया के छात्रों के समर्थन में फ़ैज अहमद फ़ैज़ की नज़्म ‘हम देखेंगे’ को सामूहिक रूप से गाए जाने पर फैकल्टी के एक सदस्य द्वारा आपत्ति दर्ज करवाई गई थी.

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़.

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का ‘हम देखेंगे’ मज़हब का नहीं अवामी इंक़लाब का तराना है…

जो लोग ‘हम देखेंगे’ को हिंदू विरोधी कह रहे हैं, वो ईश्वर की पूजा करने वाले ‘बुत-परस्त’ नहीं, सियासत को पूजने वाले ‘बुत-परस्त’ हैं.

मिर्ज़ा ग़ालिब. (फोटो साभार: kachchachittha.com)

ग़ालिब और उनका ‘चिराग़-ए-दैर’ बनारस

बनारस को दुनिया के दिल का नुक़्ता कहना दुरुस्त होगा. इसकी हवा मुर्दों के बदन में रूह फूंक देती है. अगर दरिया-ए-गंगा इसके क़दमों पर अपनी पेशानी न मलता तो वह हमारी नज़रों में मोहतरम न रहता.

उर्दू शाहर मीर अनीस.

मीर अनीस: गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतिनिधि शायर

मीर अनीस उर्दू शायरी के उस दौर में हुए थे, जब ग़ज़लों का झंडा चहुंओर बुलंद था. उन्होंने ग़ज़लों से इतर मर्सियों की रचना का कठिन रास्ता चुना.

फ़हमीदा रियाज़

फ़हमीदा रियाज़: ख़ामोश हुई महिला अधिकारों की हिमायती आवाज़

फ़हमीदा रियाज़ को पाकिस्तान के साहित्यिक हलकों में महिला अधिकारों की सबसे साहसी पैरोकार माना जाता था, जिन्होंने कलम चलाते वक्त किसी सरहद, किसी बंधन को नहीं माना.

फ़हमीदा रियाज़. (फोटो साभार: फेसबुक/@NanbendaGroup)

भारत में जन्मीं पाकिस्तानी कवियित्री और लेखक फ़हमीदा रियाज़ का निधन

पूर्व सैन्य तानाशाह जनरल ज़िया-उल-हक़ के शासनकाल के दौरान नारीवादी संघर्ष की एक प्रमुख आवाज रहीं फ़हमीदा ने पाकिस्तान छोड़ दिया था और सात साल तक भारत में रही थीं.

vinod dua

‘ज़बान वो ख़त्म होती है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी से न निकली हो’

वीडियो: उर्दू को अवाम तक पहुंचाने में देवनागरी और हिंदी की भूमिका, हिंदी में नुक़्ते के चलन और उर्दू के भविष्य पर विनोद दुआ से द वायर उर्दू के फ़ैयाज़ अहमद वजीह की बातचीत.

उर्दू शायर असरार जामई. (फोटो: द वायर)

‘मुझ से बड़ा शायर ना होगा जामई, हिंद-ओ-पाकिस्तान में और ना क़ब्रिस्तान में’

वीडियो: किसी ज़माने में फ़ख़्र-ए-बिहार कहे जाने वाले हास्य व्यंग्य के प्रसिद्ध उर्दू शायर असरार जामई इन दिनों दयनीय स्थिति में ज़िंदगी गुज़ारने को मजबूर हैं. रिश्तेदारों ने मुंह मोड़ लिया और सरकार ने अपने रिकॉर्ड में उन्हें मृत बताकर उनका पेंशन भी बंद कर दिया.

शायर अनवर जलालपुरी. (फोटो साभार: यूट्यूब/उर्दू स्टूडियो)

अनवर जलालपुरी ऐसी दुनिया का ख़्वाब देखते थे, जिसमें ज़ुल्म और दहशत की जगह न हो

शायर अनवर जलालपुरी ऐसे गुलाब थे जिसकी ख़ुशबू जलालपुर की सरहदों को पार कर पूरी दुनिया में फैली और दिलों को महकाया.