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भारतीय ऑटो उद्योग सबसे कठिन दौर से गुज़र रहा है, सरकारी मदद की ज़रूरत: मारुति सु​ज़ुकी एमडी

मारुति सुज़ुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ केनिची आयुकावा ने कहा कि हम कह सकते हैं कि अगस्त में हमने पिछले साल की तुलना में वापसी की है. हालांकि, पिछले साल से तुलना करना सही नहीं होगा, क्योंकि उस दौरान उद्योग ने 15-25 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की थी. इस नकारात्मक वृद्धि ने उद्योग को कई साल पीछे कर दिया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ केनिची आयुकावा ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय ऑटो उद्योग इतिहास में सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है और उसे जीएसटी में कमी तथा प्रोत्साहन आधारित स्क्रैपेज नीति के रूप में सरकारी मदद की जरूरत है.

आयुकावा, जो ऑटो उद्योग की संस्था सियाम के अध्यक्ष भी बनाए गए हैं, ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी और पिछले वित्त वर्ष से जारी सुस्ती के चलते यह क्षेत्र कई साल पीछे चला गया है.

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्वास्थ्य संकट के सामने आने पर भारतीय ऑटो उद्योग ने वेंटिलेटर, निजी सुरक्षा उपकरण (पीपीई) के निर्माण में अपनी भूमिका निभाई और कोरोना वायरस से लड़ने के लिए विदेशों से परीक्षण किट का आयात भी किया.

आयुकावा ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (सियाम) के 60वें वार्षिक सम्मेलन में कहा, ‘हम कह सकते हैं कि अगस्त में हमने पिछले साल की तुलना में वापसी की है. हालांकि, पिछले साल से तुलना करना सही नहीं होगा, क्योंकि उस दौरान उद्योग ने 15-25 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की थी. इस नकारात्मक वृद्धि ने उद्योग को कई साल पीछे कर दिया है.’

यह सम्मेलन ऑनलाइन आयोजित किया गया था.

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में कमी की ऑटो उद्योग की पुरानी मांग को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि आयुकावा ने कहा, ‘हम इतिहास में सबसे कठिन समय का सामना कर रहे हैं. उद्योग को आपकी (सरकार) मदद की जरूरत है.’

उन्होंने कहा, ‘हम जीएसटी में कटौती और प्रोत्साहन योजना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. हमारा मानना है कि बढ़ते कारोबार पर मिलने वाला कर सरकार की स्क्रैपेज योजना और जीएसटी में कटौती से ज्यादा होगा.’

इस मौके पर उन्होंने भारी उद्योग मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को धन्यवाद दिया, जिन्होंने सम्मेलन में यह भरोसा दिया कि वह जीएसटी कटौती के मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष उठाएंगे.

केनिची आयुकावा सियाम के नए अध्यक्ष बने

घरेलू वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम ने शुक्रवार को कहा कि उसके सदस्यों ने मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) केनिची आयुकावा को संगठन का नया अध्यक्ष चुना है. आयुकावा का कार्यकाल दो वर्ष का होगा.

सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (सियाम) ने एक बयान में कहा कि उसकी कार्यकारी समिति ने आयुकावा का चुनाव किया.

आयुकावा देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता मारुति सुजुकी इंडिया के 2013 से प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं. वह महिंद्रा एंड महिंद्रा के वरिष्ठ परामर्शक राजन वढेरा का स्थान लेंगे.

शुक्रवार को सियाम की वार्षिक आम सभा के दौरान कार्यकारी समिति की बैठक में नए पदाधिकारियों का चुनाव किया गया. इसी के साथ अशोक लीलैंड के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विपिन सोंधी को सियाम का नया उपाध्यक्ष चुना गया.

वोल्वो आयशर कॉमर्शियल ह्वीकल लिमिटेड (वीईसीवी) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनोद अग्रवाल सियाम के कोषाध्यक्ष बने रहेंगे.

ऑटो उद्योग नए मानदंडों के लिए और निवेश करने की स्थिति में नहीं: सियाम

सियाम ने शुक्रवार को कहा कि विनिर्माता आगामी सरकारी विनियमों को लागू करने के लिए निवेश करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि उद्योग बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है.

सियाम ने यह भी कहा कि ऑटोमोटिव मिशन योजना 2026 (एएमपी 2026) के तहत तय लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सरकारी सहायता की आवश्यकता है.

सियाम के पूर्व अध्यक्ष राजन वढेरा ने यहां संगठन के वार्षिक अधिवेशन में कहा कि आगामी विनियमों को लागू करने के लिए काफी निवेश करना है और उपभोक्ता मांग में कमी के कारण उद्योग को आमदनी नहीं हो रही है.

उन्होंने कहा कि इसलिए 2022 के बाद कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता (सीएएफई) मानदंडों जैसे नए विनियमों को लागू करने के लिए उद्योग के पास निवेश करने की क्षमता नहीं है.

वढेरा ने यह भी कहा कि विनियमों की अधिकता नहीं होनी चाहिए क्योंकि भारत के उत्सर्जन मानक पहले ही दुनिया में सबसे सख्त हैं.

उन्होंने कहा कि एएमपी 2026 में सूचीबद्ध लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उद्योग को मांग प्रोत्साहन देना जरूरी है.