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राज्यों की सहमति के बिना सीबीआई का अधिकारक्षेत्र नहीं बढ़ा सकती केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट

एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के महीनों में विपक्ष शासित आठ राज्य सरकारों द्वारा उनके राज्य में मामलों की जांच के लिए सीबीआई को दी गई ‘आम सहमति’ वापस ली गई है.

New Delhi: Central Bureau of Investigation (CBI) logo at CBI HQ, in New Delhi, Thursday, June 20, 2019. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI6_20_2019_000058B)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि केंद्र अपनी मर्जी से राज्यों की सहमति के बिना केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का दायरा नहीं बढ़ा सकती है. इसके साथ ही सीबीआई जांच केंद्र और संबंधित राज्य की सहमति के बिना शुरू नहीं हो सकती है.

यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्ष शासित आठ राज्यों ने अपने राज्यों में केसों की जांच के लिए सीबीआई को दी गई ‘आम सहमति’ सहमति वापस ले ली है. इसमें राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब और मिजोरम शामिल हैं.

राज्यों ने यह कदम उन आरोपों के बाद उठाया था जिसमें कहा गया था कि एजेंसी विपक्षी नेताओं और असहमति जताने के वालों के खिलाफ प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है.

जस्टिस एएम खानविलकर और बीआर गवई की पीठ ने कहा, ‘कानून के अनुसार, राज्यों की सहमति आवश्यक है और केंद्र राज्यों की सहमति के बिना सीबीआई का अधिकार क्षेत्र नहीं बढ़ा सकती है.’

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, जजों ने दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (डीएसपीई) का भी उल्लेख किया.

उन्होंने कहा, ‘हालांकि धारा 5 केंद्र सरकार को केंद्र शासित प्रदेशों से परे डीएसपीई (सीबीआई) के सदस्यों की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र का विस्तार करने में सक्षम बनाता है. लेकिन इसी कानून के तहत इसे तब तक मंजूरी नहीं मानी जा सकती है जब तक एक राज्य डीएसपीई अधिनियम की धारा 6 के तहत संबंधित राज्य के क्षेत्र के भीतर इस तरह के विस्तार के लिए अपनी सहमति नहीं देता है. जाहिर है, प्रावधान संविधान के संघीय चरित्र के अनुरूप हैं, जिन्हें संविधान के बुनियादी ढांचे में से एक माना गया है.’

दरअसल सीबीआई ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम’ द्वारा शासित है. सीबीआई इस अधिनियम की धारा छह के तहत काम करती है.

सीबीआई और राज्यों के बीच सामान्य सहमति होती है, जिसके तहत सीबीआई अपना काम विभिन्न राज्यों में करती है, लेकिन अगर राज्य सरकार सामान्य सहमति को रद्द कर दे, तो सीबीआई को उस राज्य में जांच या छापेमारी करने से पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी.

अदालत का यह फैसला उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों द्वारा दायर एक मामले में आया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ‘आरोपी ने कहा कि इस मामले को सीबीआई को सौंपने से पहले राज्य सरकार की मंजूरी नहीं मांगी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील को खारिज कर दिया क्योंकि उत्तर प्रदेश राज्य मामलों की जांच के लिए सीबीआई को सामान्य सहमति प्रदान करता है.

इस मामले में दो राज्य अधिकारियों और कई अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. सरकारी कर्मचारियों ने कहा कि उनके खिलाफ मामले के लिए ‘आम सहमति’ सहमति पर्याप्त नहीं थी और इसे लेने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता थी.

हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि जांच को वैध ठहराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वव्यापी प्रभाव से यह सहमति दी थी और सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा.

पीठ ने बुधवार को कहा, ‘फैसले में हमें राज्य सरकार की पूर्व सहमति प्राप्त नहीं करने के संबंध में हाईकोर्ट के नतीजे में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिलता है.’