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हरियाणा के भाजपा नेता ने कहा- तीनों कृषि क़ानून रद्द कर एमएसपी को क़ानूनी रूप दे केंद्र सरकार

भाजपा नेता और राज्य के पूर्व गृहमंत्री संपत सिंह ने कहा कि इस समय किसी भी राजनीतिक दल में किसानों को उकसाने की ताक़त नहीं है. यह पूरी तरह से किसानों के अस्तित्व के लिए उनका संघर्ष है इसलिए आंदोलन के लिए विपक्षी दलों को ज़िम्मेदार ठहराना बेतुका है.

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन. (फोटो: पीटीआई)

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः भाजपा नेता और राज्य के पूर्व गृहमंत्री संपत सिंह ने केंद्र सरकार से अड़ियल रवैया छोड़कर तीनों विवादित कृषि कानूनों को रद्द करने का आग्रह किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने रविवार को केंद्र सरकार से आग्रह करते हुए कहा था कि वे सोमवार को आंदोलन कर रहे किसानों के साथ होने वाली बैठक से पहले तीनों कानूनों को रद्द कर दें.

सिंह ने कहा, ‘इन कृषि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए और इसके स्थान पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा फसलों की खरीद की गारंटी देने वाला नया कानून लाना चाहिए. जब सरकार यह आश्वासन दे रही थी कि एमएसपी जारी रहेगा तो ऐसा कोई कारण नहीं था कि इसके लिए कोई कानून न बनाया जाए. एमएसपी को कानूनी रूप देने से किसानों को आश्वासन दिया जाएगा कि वे सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर अपनी फसलें बेच सकेंगे.’

छह बार विधायक रहे सिंह कांग्रेस से टिकट न मिलने के बाद अक्टूबर 2019 में हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए थे.

भाजपा नेता ने कहा, ‘केंद्र को किसानों के आंदोलन को विपक्षी दलों द्वारा चलाए गए राजनीतिक अभियान के तौर पर नहीं देखना चाहिए बल्कि किसानों के आंदोलन को राजनीतिक दलों से जोड़ना किसानों का अपमान है.’

उन्होंने कहा कि सरकार को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को फिर से याद करना चाहिए.

सिंह ने कहा कि किसान एक महीने से अधिक समय से कड़ाके की ठंड का सामना कर रहे हैं और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘इस समय किसी भी राजनीतिक दल में किसानों को उकसाने या उनका समर्थन करने की ताकत नहीं है. यह पूरी तरह से किसानों के अस्तित्व के लिए उनका संघर्ष है इसलिए इस आंदोलन के लिए विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराना बेतुका है.’

पूर्व मंत्री ने कहा, ‘ये वही किसान और खेतिहर मजदूर हैं जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने में मदद की थी. ये वही हैं, जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान घर लौट रहे लाखों प्रवासी मजदूरों को खाना खिलाने के लिए लंगर चलाए थे.’

भाजपा नेता ने कहा कि इस संघर्ष में पहले ही लगभग पचास किसान अपनी जान गंवा चुके हैं.

वहीं, हरियाणा से राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने विवादित कृषि कानूनों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने के लिए केंद्र सरकार से संसद का विशेष सत्र को बुलाए जाने की मांग की.

वह और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला किसानों के प्रति समर्थन जताने के लिए रविवार को विभिन्न टोल प्लाजा पहुंचे थे.