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बिहार: कथित तौर पर ज़हरीली शराब पीने से तीन दिन में पांच लोगों की मौत

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले का मामला. मृतक के परिजनों के दावे के इतर ज़िला प्रशासन ने शराब से मौत होने की बात से इनकार किया है. एफ़आईआर दर्ज करने के बाद थानाध्यक्ष को निलंबित करने के साथ सर्किल इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया गया है. बिहार में साल 2016 से शराबबंदी है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में पिछले तीन दिन में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से पांच लोगों की मौत हो चुकी है. बिहार में शराब की बिक्री और शराब पीने पर रोक है.

पीड़ित परिवार के एक सदस्य खेलावन मांझी ने शनिवार को बताया कि कटरा थाना क्षेत्र के दरगाह गांव में शराब पीने के बाद लोगों की मौत हो गई.

भाजपा विधायक सहित कई राजनीतिक नेताओं ने भी मांझी के दावे का समर्थन किया.

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पांचों मृतकों की पहचान रामचंद्र मांझी, मंजू देवी, अजय मांझी, विनोद मांझी और सोनल सिंह के रूप में हुई है. पुलिस सिर्फ विनोद मांझी के शव को ही बरामद कर सकी थी. अन्य शवों का परिजनों और ग्रामीणों ने आनन-फानन में दाह संस्कार कर दिया था. विनोद मांझी के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, शराब बनाने के मामले में दर्ज एफआईआर में मृतक सोनल सिंह का भी नाम शामिल किया गया. इस मामले में शराब बनाने वाले मुख्य आरोपित मुकेश सिंह व अन्य पर एफआईआर दर्ज कराई गई है. मुकेश के साले एवं मुकेश के सहयोगी प्रमोद की पत्नी को गिरफ्तार किया गया है.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जयंत कांत ने इस बात की पुष्टि की कि गांव में पांच लोगों की मौत हो गई है, लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि मौत जहरीली शराब पीने की वजह से हुई है.

एसएसपी ने हालांकि इस घटना के बाद कटरा पुलिस स्टेशन के थानाधिकारी सिकंदर कुमार को निलंबित कर दिया है. सर्किल इंस्पेक्टर मिथिलेश कुमार झा को लाइन हाजिर कर दिया गया है.

कांत ने कहा कि अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. जिलाधिकारी प्रणव कुमार, एसएसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शनिवार को गांव पहुंचे और उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की.

भाजपा और राजद के नेताओं ने गांव जाकर घटना की जानकारी ली.

मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने एक बयान जारी कर कहा है कि पांचों व्यक्ति किसी अन्य बीमारी से पीड़ित नहीं थे. उनकी मौत का कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा.

बयान में कहा गया है कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि उन लोगों ने कुछ पेय पदार्थ लिया था और गांव में देशी शराब बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

राजस्व और भूमि सुधार मंत्री तथा स्थानीय भाजपा विधायक राम सूरत कुमार ने गांव का दौरा कर कहा कि शराब बनाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

राजद नेता और विधायक निरंजन राय ने भी गांव का दौरा किया. उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन घटना को दबाने की कोशिश कर रहा है. राय ने कहा कि वह इस घटना की जानकारी विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को देंगे और वर्तमान में जारी विधानसभा के बजट सत्र में इस मुद्दे को उठाएंगे.

जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता वेद प्रकाश ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.

नीतीश कुमार सरकार ने पांच अप्रैल 2016 को बिहार में शराब (भारत में निर्मित विदेशी शराब सहित) बनने, उसके व्यापार, भंडारण, परिवहन, बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगा दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)