आईएनएस ने गूगल से भारतीय अख़बारों की सामग्री का इस्तेमाल करने के लिए भुगतान करने को कहा

गूगल इंडिया के देश में प्रबंधक संजय गुप्ता को लिखे पत्र में इंडियन न्यूज़पेपर सोसाइटी की ओर से कहा गया है कि अख़बरों के छपी ख़बरों के लिए गूगल को भुगतान करना चाहिए. अख़बार हज़ारों पत्रकारों को नियुक्त करते हैं और उनके ज़रिये ख़बरें प्राप्त करते हैं. इसमें काफी ख़र्च होता है.’

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(फोटो: रॉयटर्स)

गूगल इंडिया के देश में प्रबंधक संजय गुप्ता को लिखे पत्र में इंडियन न्यूज़पेपर सोसाइटी की ओर से कहा गया है कि अख़बरों के छपी ख़बरों के लिए गूगल को भुगतान करना चाहिए. अख़बार हज़ारों पत्रकारों को नियुक्त करते हैं और उनके ज़रिये ख़बरें प्राप्त करते हैं. इसमें काफी ख़र्च होता है.’

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नई दिल्ली: इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (आईएनएस) ने बृहस्पतिवार को गूगल से कहा कि भारतीय अखबारों की सामग्री का इस्तेमाल करने के लिए वह उन्हें भुगतान करे और कहा कि कंपनी विज्ञापन राजस्व में प्रकाशक की हिस्सेदारी बढ़ाकर 85 फीसदी करे.

गूगल को लिखे पत्र में आईएनएस के अध्यक्ष एल. आदिमूलम ने कहा कि प्रकाशकों को काफी अपारदर्शी विज्ञापन व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनके पास गूगल की विज्ञापन मूल्य श्रृंखला का ब्योरा नहीं है.

आईएनएस ने गूगल से भारतीय अखबारों में छपी खबरों के उपयोग को लेकर व्यापक रूप से क्षतिपूर्ति देने और विज्ञापन से प्राप्त आय के मामले में समुचित रूप से हिस्सा देने को कहा.

आईएनएस ने बयान जारी कर कहा, ‘सोसायटी ने कहा कि गूगल को विज्ञापन राजस्व में प्रकाशक की हिस्सेदारी बढ़ाकर 85 फीसदी करनी चाहिए और गूगल द्वारा प्रकाशकों को मुहैया कराई जाने वाली राजस्व रिपोर्ट में ज्यादा पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए.’

सोसाइटी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से दुनिया भर के प्रकाशक विषयवस्तु के लिए उचित भुगतान और गूगल के साथ विज्ञापन राजस्व में उचित साझेदारी की मांग कर रहे हैं.

संस्था ने कहा कि हाल में गूगल ने फ्रांस, यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया में प्रकाशकों को बेहतर भुगतान पर सहमति जताई है.

बयान के अनुसार, अखबार जो खबर प्रकाशित करते हैं, उस पर अच्छा-खासा खर्च आता है और यह वही भरोसेमंद खबरें हैं, जिसने गूगल को शुरुआत से ही विश्वसनीय बनाया.

गूगल इंडिया के देश में प्रबंधक संजय गुप्ता को लिखे पत्र में आईएनएस ने कहा, ‘अखबरों के छपी खबरों के लिए गूगल को भुगतान करना चाहिए. अखबार हजारों पत्रकारों को नियुक्त करते हैं और उनके जरिये खबरें प्राप्त करते हैं और उसका सत्यापन करते हैं. इसमें काफी खर्च होता है.’

आईएनएस ने फर्जी सूचना से निपटने के लिए पंजीकृत समाचार प्रकाशकों की संपादकीय विषय वस्तु को ज्यादा महत्व देने का भी मुद्दा उठाया.

आईएनएस की ओर से यह बयान फेसबुक और गूगल द्वारा खबरों के इस्तेमाल को लेकर ऑस्ट्रेलिया में लाए गए एक कानून के बाद आया है.

ऑस्ट्रेलिया की संसद ने सोशल मीडिया पर समाचार साझा किए जाने के बदले बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा मीडिया संस्थानों को भुगतान संबंधी कानून में संशोधन पारित कर दिया है जिसके बाद डिजिटल क्षेत्र की बड़ी कंपनियों गूगल और फेसबुक को समाचार के लिए उचित भुगतान करना होगा.

ऑस्ट्रेलिया की संसद ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को न्यूज मीडिया बारगेनिंग कोड में संशोधन को पारित कर दिया. इस संबंध में ट्रेजरर जोश फ्रेडेनबर्ग और फेसबुक के कार्यकारी प्रमुख मार्क जुकरबर्ग के बीच मंगलवार को सहमति बनी थी.

बता दें कि पिछले सप्ताह इस कानून का प्रस्ताव आने के बाद फेसबुक ने कड़े तेवर दिखाते हुए ऑस्ट्रेलिया में समाचार साझा करने पर पाबंदी लगा दी थी. सोशल मीडिया कंपनी के इस कदम से सरकार, मीडिया और शक्तिशाली प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच तकरार बढ़ गई थी.

गूगल पहले ही ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख समाचार व्यवसाय के साथ हाल ही में समझौते कर चुका है. इनमें न्यूज कॉर्प और सेवन वेस्ट मीडिया शामिल हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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