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आयुर्वेद डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति देने के ख़िलाफ़ याचिका पर केंद्र को नोटिस

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से आयुर्वेद के डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति देने वाले नियमों को ख़ारिज करने का अनुरोध किया है. भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (पोस्ट ग्रेजुएट आयुर्वेद शिक्षा) नियमन, 2016 में संशोधन कर आयुर्वेदिक पढ़ाई में पीजी कर रहे छात्रों को ऑपरेशन करने का प्रशिक्षण देने का प्रावधान किया गया है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (सीसीआईएम) द्वारा आयुर्वेद से स्नातकोत्तर (मास्टर डिग्री) की पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति देने वाले आदेश के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यन की पीठ ने आयुष मंत्रालय, सीसीआईएम और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

आईएमए ने उच्चतम न्यायालय में अपील कर आयुर्वेद के डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति देने वाले संशोधनों/नियमों को खारिज करने या रद्द करने का अनुरोध किया है तथा घोषणा की है कि आयोग को पाठ्यक्रम में एलोपैथी को शामिल करने का अधिकार नहीं है.

स्क्रॉल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा मंत्रालय, यूनानी, सिद्ध एवं होम्योपैथी, केंद्रीय चिकित्सा परिषद और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को नोटिस भेज कर चार हफ्तों के भीतर हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है.

सुनवाई के दौरान इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद का यह निर्णय कहर पैदा कर देगा.

सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया, ‘यह चिंता बहुत लंबे समय से चली आ रही है. यह नागरिकों के स्वास्थ्य से संबंधित है, इसलिए मैं समझता हूं. हम जल्द ही जवाब दाखिल करेंगे.’

बता दें कि आयुष मंत्रालय के अधीन भारतीय चिकित्सा प्रणालियों के नियमन से जुड़ी सांविधिक इकाई सीसीआईएम ने पिछले साल 20 नवंबर को जारी अधिसूचना में 39 सामान्य सर्जरी प्रक्रियाओं को सूचीबद्ध किया था, जिनमें से 19 प्रक्रियाएं आंख, नाक, कान और गले से जुड़ी हैं.

इसके लिए भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (पोस्ट ग्रेजुएट आयुर्वेद शिक्षा) नियमन, 2016 में संशोधन किया गया है. अधिसूचना के मुताबिक, आयुर्वेदिक पढ़ाई के दौरान ‘शल्य’ और ‘शाल्क्य’ में पीजी कर रहे छात्रों को ऑपरेशन करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) इस कदम का लगातार विरोध कर रहा है. आईएमए ने पिछले साल 22 नवंबर को इस कदम की निंदा की थी और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों को पीछे की ओर ले जाने वाला कदम करार दिया था.

संगठन ने कहा था कि यह चिकित्सा शिक्षा या प्रैक्टिस का भ्रमित मिश्रण या ‘खिचड़ीकरण’ (मिक्सोपैथी) है. आईएमए ने संबंधित अधिसूचना को वापस लिए जाने की मांग की थी.

आईएमए ने बयान में कहा था कि आधुनिक चिकित्सा सर्जरी की लंबी सूची है, जिसे आयुर्वेद में शल्य तंत्र और शाल्क्य तंत्र के तहत सूचीबद्ध किया गया है, ये सभी आधुनिक चिकित्सा पद्धति के दायरे और अधिकार क्षेत्र में आते हैं.

हालांकि हाल ही में केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाईक ने कहा था कि आयुर्वेद चिकित्सकों को सामान्य सर्जरी की अनुमति कोई ‘मिक्सोपैथी’ नहीं है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)