राजनीति

बंगाल: टीएमसी ने तीनों चरणों का मतदान एक साथ कराने की चुनाव आयोग से फ़िर की अपील

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बाद कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ी चुनावी रैलियां नहीं करने का फ़ैसला किया. नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा है कि बंगाल को अपनी बागडोर केंद्रीय नेताओं को सौंप कर ‘राष्ट्रीय पतन’ का हिस्सा नहीं बनना चाहिए. एमएनएम प्रमुख कमल हासन ने तमिलनाडु में ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम परिसर में ‘रहस्यमय’ वाहनों और व्यक्तियों के होने की शिकायत की.

(प्रतीकात्मक फोटो: द वायर)

(प्रतीकात्मक फोटो: द वायर)

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने मंगलवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को पत्र लिखकर कोविड-19 के मामलों में तेज वृद्धि के मद्देनजर विधानसभा चुनाव के शेष तीनों चरणों का मतदान एक साथ कराने के उसके अनुरोध को स्वीकार करने का आग्रह किया है.

इससे पहले मुख्यमंत्री तथा पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने सोमवार को अपनी रैलियों में निर्वाचन आयोग से तय कार्यक्रम के अनुसार चुनाव कराने के उसके निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था.

टीएमसी नेताओं डेरेक ओ’ ब्रायन, सुखेंदु शेखर रॉय, प्रतिमा मंडल और पुर्णेंदु बोस के द्वारा हस्ताक्षर हस्ताक्षरित इस पत्र में उच्च न्यायालय के आदेश को रेखांकित किया है, जिसमें मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ’घातक त्रासदी’ से बचने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया गया है.

साथ ही पत्र में कहा गया है कि ‘यदि तीनों चरणों का मतदान एक साथ करा दिया जाए तो किसी के साथ कोई पक्षपात नहीं होगा.’

टीएमसी नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा, ‘कोविड की स्थिति को देखते हुए 15 अप्रैल को हमारी पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से बाकी बचे चुनावी चरणों को एक साथ कराने का अनुरोध किया था. वहीं चीज उन्होंने कल दोहराई थी. इस स्थिति पर विचार करने और उसकी समीक्षा के लिए हमने राज्य चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपा है.’

मालूम हो कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर आने के बाद से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक समेत चुनाव मैदान में उतरे दो प्रत्याशियों की मौत इसके संक्रमण के कारण हो चुकी है.

बीते 17 अप्रैल को पांचवें चरण के चुनाव के दौरान बीरभूम जिले के मुरारई सीट से टीएमसी के निर्वतमान विधायक अब्दुर रहमान की कोरोना वायरस की वजह से मौत हो गई.

अब्दुर रहमान से पहले रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) की ओर से मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुरा सीट से चुनाव मैदान में उतरे प्रदीप कुमार नंदी की मौत भी बीते 16 अप्रैल को कोरोना संक्रमण की वजह से हो गई थी. उनसे पहले 15 अप्रैल को मुर्शिदाबाद जिले की शमशेरगंज सीट से उम्मीदवार रेजाउल हक की भी संक्रमण से मौत हो चुकी है.

निर्वाचन आयोग ने शमशेरगंज और जंगीपुरा विधानसभा सीट पर मतदान स्थगित कर दिया है.

पिछले हफ्ते में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से बचे हुए चरणों के चुनाव एक साथ कराने का अनुरोध किया था. बीते 16 अप्रैल को राज्य के चुनाव आयोग के साथ हुई सर्वदलीय बैठक में भी यह मांग उठाई गई थी, लेकिन आयोग ने इसे ठुकरा दिया. हालांकि बैठक में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव का भाजपा ने विरोध किया था.

इस महीने के पहले 15 दिनों में पश्चिम बंगाल में संक्रमण के 49,970 नए मामले आए हैं, जबकि महामारी से 151 लोगों की मौत हुई है.

बंगाल में भाजपा अब नहीं करेगी बड़ी चुनावी रैलियां

नई दिल्ली: कोविड-19 संक्रमण के प्रतिदिन बढ़ रहे मामलों के मद्देनजर भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब बड़ी चुनावी रैलियां नहीं करने का फैसला किया है. इसकी जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य नेताओं की छोटी-छोटी रैलियां होंगी और उनमें 500 से अधिक लोगों की मौजूदगी नहीं होगी.

कोरोना के बढ़ते मामलों के बाद भी बड़ी-बड़ी रैलियों के आयोजन के लिए पार्टी की चौतरफा आलोचना हो रही थी.

पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा, ‘कोरोना के इस कठिन दौर को देखते हुए संक्रमण की कड़ी को तोड़ना बहुत जरूरी है. इसके तहत भाजपा ने तत्काल प्रभाव से बड़ी रैलियों, जन-सभाओं एवं आयोजनों पर रोक लगाने का निर्णय लिया है.’

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

पार्टी ने कहा कि चूंकि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं और इस संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पूर्ण होना भी बहुत जरूरी है.

भाजपा ने कहा, ‘इसे ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा नड्डा ने निर्णय लिया है कि प्रधानमंत्री सहित सभी केंद्रीय नेताओं की पश्चिम बंगाल में छोटी जन-सभाएं ही आयोजित होंगी, जिसमें 500 से अधिक व्यक्तियों की उपस्थिति नहीं होगी.’

पार्टी ने यह निर्णय लिया है कि ये छोटी जनसभाएं भी खुले स्थान में एवं सभी कोविड-19 दिशा-निर्देशों के अनुरूप होंगी.

पार्टी ने इस चुनावी राज्य में छह करोड़ मास्क और सैनिटाइजर वितरण का लक्ष्य भी रखा है.

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल में अपनी सभी चुनावी रैलियां स्थगित कर दी थीं. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से भी ऐसा करने का आग्रह किया था ताकि कोरोना संक्रमण को और अधिक फैलने से रोका जा सके.

तृणमूल कांग्रेस ने भी कहा है कि उसके नेता अब छोटी जनसभाएं करेंगे. पार्टी ने कहा कि जिन क्षेत्रों में मतदान बाकी है, वहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भाषण भी छोटा कर दिया जाएगा.

बंगाल को अपनी बागडोर केंद्रीय नेताओं के हाथों में नहीं देनी चाहिए: अमर्त्य सेन

कोलकाता: नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा है कि पश्चिम बंगाल को अपनी बागडोर स्थानीय नेताओं के बजाय केंद्रीय नेताओं को सौंप कर ‘राष्ट्रीय पतन’ का हिस्सा नहीं बनना चाहिए, क्योंकि इससे उन हाथों में सत्ता की पकड़ मजबूत होगी, जिनका आर्थिक नीतियों और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में रिकॉर्ड ‘बेहद खराब’ है.

अमर्त्य सेन. (फोटो: रॉयटर्स)

अमर्त्य सेन. (फोटो: रॉयटर्स)

सेन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों की सराहना की, खासतौर पर लड़कियों के लिए चलाए गए कार्यक्रम, ग्रामीण ढांचे के विस्तार और खाद्य सुरक्षा के आश्वासन के लिए भी सरकार की सराहना की, लेकिन उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार के मुद्दे से निपटने पर जोर दिया.

उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा को दिए साक्षात्कार में इस बात पर अफसोस जताया कि पहचान की राजनीति ने बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में अपना सिर उठा लिया है और उन्होंने सांप्रदायिक विभेद के लिए हिंदुत्व के ध्वजवाहकों को जिम्मेदार ठहराया.

सेन ने कहा, ‘अगर बंगाल में स्थानीय नेताओं के बजाय केंद्रीय नेताओं का शासन आता है तो इससे भारत में उन हाथों में सत्ता की पकड़ और मजबूत होगी, जिनकी अल्पसंख्यकों के अधिकारों की अवधारणा बेहद सीमित है और जिनका आर्थिक नीतियों और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में रिकॉर्ड ‘बेहद दोषपूर्ण’ है.’

उन्होंने जोर दे कर कहा कि बंगाल को एकता चाहिए, विभाजन नहीं.

राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा शुरू किए गए ‘बाहरी-भीतरी’ के मुद्दे पर उन्होंने कहा, ‘यह वास्तव में बहुत खराब बात है’ क्योंकि बाहरियों के लिए सहिष्णुता रखना बंगाल का इतिहास रहा है.

भाजपा ने निर्वाचन आयोग से ममता बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया

कोलकाता: भाजपा ने सोमवार को निर्वाचन आयोग से शिकायत की कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने एक बयान दिया है, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में ‘विद्रोह’ पैदा करने के प्रयास के समान है.

भगवा दल ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित बनर्जी की टिप्पणी को लेकर उन पर आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग से उनके खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की.

भाजपा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने नदिया जिले में एक जनसभा में सीएपीएफ जवानों से ‘भाजपा के आदेश पर गोलियां नहीं चलाने’ की अपील की और कहा कि ‘वे आज हैं कल नहीं होंगे.’

भाजपा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि उनका बयान निर्वाचन आयोग की शक्तियों पर आक्षेप लगाने वाला है.

भाजपा ने कहा, ‘चुनाव ड्यूटी के दौरान सीएपीएफ जवानों आयोग की निगरानी में काम करते हैं और उनके आला अधिकारी जमीन पर काम करते हैं.’

चुनाव लड़ रही किसी भी पार्टी के पास बलों की तैनाती का कोई अधिकार नहीं है. बनर्जी के कथित बयान को लेकर भाजपा की शिकायत में कहा गया है, ‘यह दबी जुबान में विद्रोह भड़काने के समान है.’

एमएनएम ने स्ट्रॉन्ग रूम परिसर में ‘रहस्यमय’ वाहनों और व्यक्तियों के होने की शिकायत की

चेन्नई: मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) प्रमुख कमल हासन ने मंगलवार को आरोप लगाया कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए 6 अप्रैल को हुए मतदान के बाद जहां ईवीएम सुरक्षित रखे गए हैं, उस परिसर और स्ट्रॉन्ग रूम में कई अनियमितताएं हो रही हैं. साथ ही पार्टी ने निर्वाचन आयोग से इस संबंध में कार्रवाई करने की मांग की.

Chennai: Makkal Needhi Maiam (MGM) President Kamal Haasan addresses at the 'NASSCOM HR Summit 2018', in Chennai on Thursday, July 26, 2018. (PTI Photo/R Senthil Kumar)(PTI7_26_2018_000251B)

कमल हासन. (फोटो: पीटीआई)

इन केंद्रों पर ‘रहस्यमय’ वाहनों और व्यक्तियों की मौजूदगी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह निर्वाचन आयोग का कर्तव्य है कि वह मतदाताओं, राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों में यह भरोसा कायम करे कि चुनाव सही तरीके से हुए हैं और परिणामों की घोषणा ईमानदारी से की गई.

इससे पहले द्रमुक ने भी ऐसे ही आरोप लगाए थे और मामले को निर्वाचन आयोग के समक्ष उठाया था.

पार्टी ने कहा कि हासन ने इस संबंध में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) सत्यब्रत साहू को एक ज्ञापन भी सौंपा है.

ज्ञापन में शामिल मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करते हुए पार्टी द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि एक व्यक्ति द्वारा एक से ज्यादा बार मतदान करने की घटनाएं हुई हैं, स्ट्रॉन्ग रूम के सीसीटीवी कैमरों ने अचानक काम करना बंद कर दिया, जिन परिसरों में ईवीएम रखे गए हैं वहां ‘रहस्यमय कंटेनर’ लॉरी ‘गोपनीय’ तरीके से लाए गए और लोग स्ट्रॉन्ग रूम के पास घूमते हुए मिले.

हासन ने बाद में पत्रकारों से कहा, ‘स्ट्रॉन्ग रूम वाकई स्ट्रॉन्ग रूम होना चाहिए. सीसीटीवी कैमरे बार-बार खराब हो रहे हैं, अचानक रहस्यमय कंटेनर परिसर में प्रवेश कर रहे हैं, परिसर के भीतर-बाहर वाई-फाई सुविधा उपलब्ध है, स्ट्रॉन्ग रूम के आसपास लैपटॉप लिए रहस्यमय लोग घूम रहे हैं, जिससे सवाल पैदा होते हैं.’

उन्होंने कहा कि पहले ही 30 प्रतिशत मतदाता वोट डालने नहीं जाते हैं और जब ऐसे ‘रहस्य और संदेह’ रहेंगे तो डर है कि लोकतंत्र में लोगों का योगदान और कम हो जाएगा.

उन्होंने कहा, ‘अंत में यह लोकतंत्र के लिए खतरा बन जाएगा.’

 (समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)