कोविड-19

कोविड: सामाजिक बहिष्कार के बाद बुज़ुर्ग को पत्नी का शव साइकिल पर लाद ले जाने को मजबूर होना पड़ा

इसी तरह राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में भी सामाजिक बहिष्कार का एक मामला सामने आया है. नोएडा में घर की रखवाली का काम करने वाले एक व्यक्ति के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद कोई भी मदद के लिए आगे नहीं. पश्चिम बंगाल के इस परिवार ने पुलिस की मदद से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी.

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में सामाजिक बहिष्कार के बाद बुजुर्ग पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए उनका शव साइकिल से ले जा रहे थे, जो रास्ते में गिर गया. (फोटो साभार: फेसबुक)

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में सामाजिक बहिष्कार के बाद बुजुर्ग पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए उनका शव साइकिल से ले जा रहे थे, जो रास्ते में गिर गया. (फोटो साभार: फेसबुक)

जौनपुर/नोएडा: उत्तर प्रदेश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच सामाजिक बहिष्कार की दो घटनाएं सामने आई हैं. पहली घटना जौनपुर की है, जबकि दूसरी घटना नोएडा की है.

जौनपुर जिले में हुई घटना में कोविड-19 से पत्नी की मौत के बाद एक बुजुर्ग की मदद के लिए कोई नहीं आया, लिहाजा उन्हें शव साइकिल पर लादकर ले जाने पर मजबूर होना पड़ा.

दूसरी घटना में पिता के संक्रमित होने के बाद नोएडा में रह रहे पश्चिम बंगाल के एक परिवार की किसी ने मदद नहीं की. अस्पताल में पिता की मौत के बाद उनकी 15 वर्षीय बेटी ने पुलिस की मदद से उनका अंतिम संस्कार किया.

सोशल मीडिया पर जौनपुर जिले में हुई घटना की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. एक तस्वीर में बुजुर्ग व्यक्ति साइकिल पर अपनी पत्नी का शव ले जाते दिख रहा है जो रास्ते में गिर गया. एक अन्य फोटो में महिला का शव बीच सड़क पर पड़ा हुआ और बुजुर्ग व्यक्ति सड़क के किनारे सिर पकड़े बैठा हुआ दिख रहा है.

बाद में पुलिस ने बुजुर्ग की मदद की और शव को श्मशान घाट पहुंचा कर विधि विधान से उसका अंतिम संस्कार कराया.

पुलिस सूत्रों ने बृहस्पतिवार को बताया कि यह वाकया जिले के मड़ियाहू थाना क्षेत्र के अंबरपुर गांव में पेश आया, जहां 70 वर्षीय बुजुर्ग तिलकधारी की पत्नी की गत 26 अप्रैल को जिला अस्पताल में कोविड-19 संक्रमण की वजह से मृत्यु हो गई थी. उसके बाद शव को एंबुलेंस के जरिये उसके गांव भेजा गया था.

मड़ियाहू के थानाध्यक्ष मुन्नालाल धुसिया ने बताया कि जैसे ही तिलकधारी की पत्नी का शव गांव पहुंचा, ग्रामीणों ने कोरोना वायरस के डर से उसका अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि अस्पताल में महिला का शव एंबुलेंस से भेज दिया था, लेकिन गांववालों ने स्थानीय श्मशान में अंतिम संस्कार करने की अनुमति नहीं दी. उनका कहना था कि इससे गांव में संक्रमण फैल जाएगा.

गांववालों को समझा पाने में असमर्थ होने के बाद तिलकधारी ने पत्नी के शव का अंतिम संस्कार पास के साई नदी के किनारे करने का निर्णय लिया था, लेकिन गांववालों ने शव ले जाने में भी मदद नहीं की.

इसके बाद तिलकधारी ने खुद ही अंतिम संस्कार की ठानी और अपनी पत्नी के शव को साइकिल पर रखकर श्मशान घाट ले जाने की कोशिश की, मगर साइकिल पर शव को ले जाना संभव नहीं था और असंतुलन की वजह से शव रास्ते में ही गिर गया.

रिपोर्ट के अनुसार, मड़ियाहू थाने के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पी. उपाध्याय ने बताया कि शव को ले जाते वक्त यह साइकिल से गिर गया और तिलकधारी असहाय होकर सड़क किनारे बैठ गए थे. वहां से गुजर रहे एक पुलिसकर्मी ने अपने वरिष्ठ को इसकी जानकारी दी. जिसके बाद पुलिस अंतिम संस्कार की सभी सामग्री साथ ले गई और एक मुस्लिम व्यक्ति की मदद से उनका अंतिम संस्कार किया गया.

थानाध्यक्ष ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस फौरन मौके पर पहुंची और जौनपुर के राम घाट पर शव का अंतिम संस्कार कराया.

पिता के कोरोना संक्रमित होने के बाद कोई मदद को नहीं आया, मौत के बाद बेटी ने दी मुखाग्नि

इसी तरह नोएडा में 15 साल की लड़की ने कोविड-19 से जान गंवाने वाले 52 वर्षीय पिता की चिता को पुलिसकर्मियों की मदद से मुखाग्नि दी. स्थानीय निवासियों ने जब किशोरी और उसकी मां की मदद करने से इनकार कर दिया तो पुलिस ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था की.

आर्थिक रूप से कमजोर परिवार पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना से संबंध रखता है. पीड़ित अपनी पत्नी और बेटी के साथ नोएडा सेक्टर-19 में रहता था, जहां वह एक घर की रखवाली का काम करता था. मकान मालिक यहां नहीं रहता है.

अधिकारियों के अनुसार, पुलिस बीते 26 अप्रैल की रात परिवार की मदद के लिए पहुंची और उस व्यक्ति को सेक्टर 31 में स्थित जिला अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस का प्रबंध किया. अस्पताल में उसकी मौत हो गई. इसके बाद पुलिस ने मंगलवार को शव को सेक्टर 94 में स्थित श्मशान ले जाने में भी परिवार की मदद की.

स्थानीय पुलिस चौकी के प्रभारी हरि सिंह ने बताया, ‘चूंकि व्यक्ति कोविड-19 रोगी था, इसलिए किसी ने लड़की और उसकी मां की मदद नहीं की और जब उस व्यक्ति की हालत बिगड़ने लगी तो कोई भी उसे अस्पताल ले जाने के लिए आगे नहीं आया और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया.’

उन्होंने कहा कि 26 अप्रैल को जब उस व्यक्ति की हालत बिगड़ने लगी तो उसकी बेटी ने मदद मांगी, लेकिन कोई काम नहीं आया. इसके बाद वह मदद की तलाश में घर से निकल पड़ी.

रात करीब नौ बजे उसे सड़क पर उत्तर प्रदेश पुलिस के आपात सेवा नंबर 112 का वाहन दिखा और उसने मदद मांगी. वाहन में सवार अधिकारियों ने संदेश भेजा, जिसके बाद स्थानीय पुलिस चौकी के कर्मी मदद के लिए उसके घर पहुंचे.

सिंह ने कहा, ‘हमने भी स्थानीय लोगों से मदद मांगने की कोशिश की, लेकिन महामारी से उपजे हालात के चलते कोई आगे नहीं आया. किसी तरह हमने एंबुलेंस की व्यवस्था की और व्यक्ति को जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन दुर्भाग्यवश उसकी जान नहीं बच सकी.’

इसके बाद शव को सेक्टर 19 में स्थित घर में लाया गया और अस्पताल की ओर से एक मेमो जारी किया गया, जिसके बाद लड़की और उसकी मां ने पुलिस से मदद मांगी, जो जानकारी मिलते ही वहां पहुंच गई और अंतिम संस्कार का प्रबंध किया.

उप-निरीक्षक सिंह ने कहा, ‘चौकी के तीन कर्मचारियों, एंबुलेंस चालक और मैंने हवन सामग्री और अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ी की व्यवस्था की. श्मशान में भीड़ थी, लेकिन हमने स्थानीय अधिकारियों से अनुरोध किया और परिवार की स्थिति को देखते हुए एक पुजारी भी मदद करने के लिए सहमत हो गया.’

उन्होंने कहा कि शाम पांच बजे अंतिम संस्कार किया गया. उस समय परिवार का कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था, लिहाजा मृतक की बेटी ने चिता को मुखाग्नि दी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)