कोविड-19

आलोचना के बीच सेंट्रल विस्टा निर्माण स्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर प्रतिबंध

कोविड-19 महामारी से जूझ रहे दिल्ली में पांबदियों के बीच सेंट्रल विस्टा परियोजना का निर्माण कार्य जारी रखने की वजह से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार विपक्ष की आलोचनाओं के केंद्र में है. इतना ही नहीं सरकार ने निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए इस परियोजना को ‘आवश्यक सेवाओं’ की श्रेणी में सूचीबद्ध कर दिया है.

सेंट्रल विस्टा निर्माण स्थल पर लगा फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग निषेध का बोर्ड. (फोटो: पीटीआई)

सेंट्रल विस्टा निर्माण स्थल पर लगा फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग निषेध का बोर्ड. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सेंट्रल विस्टा पुनर्निर्माण परियोजना को लेकर आलोचना के बीच केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने इंडिया गेट के पास निर्माण स्थल पर फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग को प्रतिबंधित कर दिया है.

सेंट्रल विस्टा एवेन्यू के पुनर्निर्माण स्थल पर साइन बोर्ड लगाए गए हैं, जिसमें लिखा है: ‘फोटोग्राफी निषेध’, ‘वीडियो रिकॉर्डिंग निषेध’.

परियोजना को क्रियान्वित करने वाले सीपीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने संपर्क करने पर इस पर कोई टिप्पणी नहीं की.

गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के बीच सेंट्रल विस्टा पुनर्निर्माण परियोजना को क्रियान्वित करने को लेकर सरकार को विपक्ष की ओर से आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

बता दें कि बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा समेत 12 प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने कोरोना महामारी की गंभीर स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि केंद्र सरकार सेंट्रल विस्टा परियोजना को रोककर इसका पैसा टीकाकरण के लिए इस्तेमाल करे.

इससे पहले भी विपक्ष के 13 प्रमुख नेताओं ने केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि वह सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति तथा देश भर में मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम सुनिश्चित करे.

वहीं, वैश्विक स्तर के 75 से अधिक प्रसिद्ध विद्वानों, कलाकारों, लेखकों, क्यूरेटरों और संग्रहालय के पेशेवरों ने बुधवार को जारी एक बयान में मौजूदा कोविड-19 लहर के कारण पैदा हुए जनस्वास्थ्य आपातकाल के दौरान नई दिल्ली में सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास के भारत सरकार की योजना को तत्काल रोकने की मांग की है.

इस बीच भारत भर के कई नागरिक समाज समूहों और पर्यावरण संगठनों ने भी बुधवार को केंद्र से देश में कोविड-19 महामारी के मद्देनजर अपनी महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्निर्माण परियोजना को रोकने की अपील की.

65 संगठनों द्वारा जारी किए गए बयान में केंद्र सरकार से 13,450 करोड़ रुपये की इस परियोजना को रोकने और सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल महामारी से निपटने में करने का आग्रह किया गया है.

हालांकि, बढ़ती आलोचनाएं भी सरकार को डिगा नहीं सकीं. बीते 20 अप्रैल को इसने उस भूखंड पर तीन भवनों के निर्माण के लिए बोलियां आमंत्रित कीं, जहां इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र वर्तमान में खड़ा है.

इस बीच, पुनर्विकास का काम जारी है, जबकि कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहे दिल्ली के बाकी हिस्से बंद हैं. इतना ही नहीं सरकार ने इसके निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अपनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत होने वाले निर्माण कार्य को ‘आवश्यक सेवाओं’ की श्रेणी में सूचीबद्ध कर दिया है.

इस परियोजना की घोषणा पिछले वर्ष सितंबर में हुई थी, जिसमें एक नए त्रिभुजाकार संसद भवन का निर्माण किया जाना है. इसके निर्माण का लक्ष्य अगस्त 2022 तक है, जब देश स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाएगा. इस परियोजना के तहत साझा केंद्रीय सचिवालय 2024 तक बनने का अनुमान है.

यह योजना लुटियंस दिल्ली में राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक तीन किलोमीटर लंबे दायरे में फैली हुई है. केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के मुताबिक नई इमारत संसद भवन संपदा की प्लॉट संख्या 118 पर बनेगी.

नरेंद्र मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य 3.2 किलोमीटर के क्षेत्र को पुनर्विकास करना है, जिसका नाम सेंट्रल विस्टा है, जो 1930 के दशक में अंग्रेजों द्वारा निर्मित लुटियंस दिल्ली के केंद्र में स्थित है. जिसमें कई सरकारी इमारतों, जिसमें कई प्रतिष्ठित स्थल भी शामिल हैं, को तोड़ना और पुनर्निर्माण करना शामिल है और कुल 20,000 करोड़ रुपये की लागत से एक नई संसद का निर्माण करना है.

नई इमारत में ज्यादा सांसदों के लिए जगह होगी, क्योंकि परिसीमन के बाद लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों की संख्या बढ़ सकती है. इसमें करीब 1400 सांसदों के बैठने की जगह होगी. लोकसभा के लिए 888 (वर्तमान में 543) और राज्यसभा के लिए 384 (वर्तमान में 245) सीट होगी.

जैसा कि कुछ लोगों ने कहा है कि सरकार सेंट्रल विस्टा परियोजना पर जो राशि खर्च कर रही है, वह हजारों ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों के निर्माण के लिए पर्याप्त होगी. केंद्र सरकार द्वारा बनाए जा रहे 162 ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों की लागत 201 करोड़ रुपये है. इसके विपरीत सिर्फ नए संसद भवन का बजट लगभग पांच गुना अधिक 971 करोड़ रुपये का है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)