नॉर्थ ईस्ट

मेघालय: बारह दिनों से खदान में फंसे हैं पांच श्रमिक, सरकार ने नौसेना से मदद मांगी

मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स ज़िले के एक अवैध कोयला खदान में पांच श्रमिक बीते 31 मई से फंसे हुए हैं. ज़िला प्रशासन ने बताया कि खदान में पानी भरा हुआ है और बचावकर्मी जलस्तर कम होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. अवैध खनन के आरोप में खदान के मालिक को गिरफ़्तार किया गया है.

एनडीआरएफ के द्वारा जयंतिया हिल्स जिले के कोयला खदान में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए बचाव कार्य करते हुए. (फोटो: पीटीआई)

एनडीआरएफ के द्वारा जयंतिया हिल्स जिले के कोयला खदान में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए बचाव कार्य करते हुए. (फोटो: पीटीआई)

शिलांग: मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में एक खदान में पांच श्रमिक पिछले 12 दिनों से फंसे हुए हैं. इस खदान में डायनामाइट विस्फोट के बाद पानी भर गया था.

बताया गया है कि खदान में जल स्तर कम तो हुआ है लेकिन यह कमी अभी बचावकर्मियों के भीतर जाकर बचाव अभियान शुरू करने के लिए पर्याप्त नहीं है. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि खदान से पानी निकालने की प्रक्रिया जारी है और अब यह स्तर कम होकर 36.6 मीटर है, जो चार जून को 46 मीटर था.

उमप्लेंग में घटनास्थल पर तैनात एक मजिस्ट्रेट ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के करीब 60 फीसदी कर्मी और राज्य की अन्य एजेंसियां 152 मीटर गहरे गड्ढे में 10 मीटर और जलस्तर नीचे जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं क्योंकि इसी अधिकतम स्तर में कर्मी काम शुरू कर सकते हैं.

अधिकारी ने बताया कि अब तक दो परस्पर जुड़े गड्ढे से 8.82 लाख लीटर पानी बाहर निकाला गया है.

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा कि बचावकर्मियों के लिए स्थिति मुश्किल है और फंसे खनिकों तक पहुंचने में अब तक थोड़ी ही प्रगति हो पाई है.

संगमा ने संवाददाताओं से कहा, ‘स्थिति वहां काफी कठिन है. अभी तक सकारात्मक परिणाम नहीं मिले हैं.’

एनडीटीवी के मुताबिक, अब मेघालय सरकार ने भारतीय नौसेना की मदद मांगी है. मुख्यमंत्री संगमा ने कहा, ‘हमने रक्षा मंत्रालय को बचाव अभियान में सहायता के लिए नौसेना के गोताखोर उपलब्ध कराने के लिए लिखा है.’

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार फंसे हुए खनिकों को बचाने के लिए सभी विकल्प तलाश रही है. वहीं, पुलिस ने कोयला खदान के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है और उस पर अवैध खनन पर प्रतिबंध लगाने वाले एनजीटी के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के मुख्यालय खलीहरियात से लगभग 20 किमी दूर उमप्लेंग में बीते 30 मई को एक रैट-होल खदान में डायनामाइट विस्फोट के बाद पानी भर गया थाम, जिसमें पांच मजदूर फंस गए.

जिला प्रशासन द्वारा इन लोगों की पहचान की गई है – जिनमें चार असम से और एक त्रिपुरा से हैं. फंसे हुए खनिकों के छह सहकर्मी इस हादसे से बच गए क्योंकि वे घटना के समय खदान के बाहर थे. उन्हें असम में उनके घरों तक पहुंचाया गया है.

पुलिस ने कोयला खदान के मालिक शाइनिंग लैंगस्टैंग को गिरफ्तार कर लिया है और उस पर अवैध खनन और कोयले के परिवहन पर प्रतिबंध लगाने वाले एनजीटी के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि खदान का मैनेजर  फरार है और उस पर लुकआउट नोटिस जारी किया गया है क्योंकि वह अवैध खदान में काम करने के लिए असम और त्रिपुरा से प्रवासी श्रमिकों को लाया था. जीवित बचे लोगों के शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई.

मेघालय में लगभग 560 मिलियन टन कोयले का भंडार होने का अनुमान है. असम और त्रिपुरा के अवैध प्रवासी मजदूर ही खनन गतिविधियों में लगे हुए हैं.

बता दें कि इस साल पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में अवैध खनन के दौरान हादसे की ये दूसरी घटना है. इस साल जनवरी में जिले में एक कोयला खदान के अंदर काम करने के दौरान छह लोगों की मौत हो गई थी.

गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2018 में राज्य के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के कसन क्षेत्र में इसी तरह की एक खनन दुर्घटना में 15 लोगों की मौत हो गई थी.

तब खदान में पास की नदी का पानी भर गया था, जिसकी वजह से खदान में काम कर रहे मजदूर अंदर ही फंस गए थे. करीब सात महीने के बचाव अभियान के बाद केवल तीन शव बरामद किए गए थे.

इस दुर्घटना से पता चला था कि मेघालय में एनजीटी द्वारा साल 2014 में प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी रैट होल खदानों में खनन जारी है. रैट होल खदान चूहों के बिल जैसी होती है, जिसमें संकरी सुरंगें खोदी जाती हैं, जिसके भीतर मजदूर जाते हैं और कोयला निकालकर लाते हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)