राजनीति

मोदी मंत्रिमंडल में प्रीतम मुंडे को शामिल न करने का विरोध, भाजपा नेताओं का इस्तीफ़ा

महाराष्ट्र के बीड ज़िले से सांसद प्रीतम मुंडे को मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से नाराज़ भारतीय जनता पार्टी के 20 से अधिक स्थानीय पदाधिकारियों ने इस्तीफ़ा दे दिया है. बताया जा रहा है कि भाजपा नेता भागवत कराड को केंद्रीय राज्यमंत्री बनाए जाने के पार्टी के फै़सले से कार्यकर्ता नाराज़ हैं. प्रीतम की बड़ी बहन भाजपा नेता पंकजा मुंडे का कहना है कि वह केंद्रीय नेतृत्व के फैसले से दुखी नहीं हैं, लेकिन उनके समर्थकों के बीच इसे लेकर नकारात्मकता है.

प्रीतम मुंडे. (फोटो साभारः फेसबुक)

बीड: केंद्रीय मंत्रिपरिषद् के विस्तार के बाद महाराष्ट्र के बीड जिले से सांसद प्रीतम मुंडे को मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से नाराज भारतीय जनता पार्टी के 20 से अधिक स्थानीय पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है. एक स्थानीय नेता ने रविवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि बीड जिला परिषद और पंचायत समिति के साथ अंबाजोगाई के भाजपा पार्षद इस्तीफा सौंपने के लिए मुंबई निकल पड़े हैं. नेता ने कहा कि पिछले दो दिन में जिन्होंने इस्तीफा दिया है, उनमें बीड जिला परिषद का एक सदस्य और पंचायत समिति का एक सदस्य शामिल है.

इसके अलावा भाजपा जिला महासचिव, युवा इकाई के अध्यक्ष, जिला उपाध्यक्ष, तहसील अध्यक्ष और भाजपा युवा इकाई के जिला उपाध्यक्ष ने भाजपा जिला अध्यक्ष राजेंद्र मस्के को अपना इस्तीफा सौंप दिया है.

इस्तीफा देने वालों में शामिल भाजपा बीड जिला महासचिव सरजेराव टांडले ने कहा, ‘प्रीतम मुंडे को कैबिनेट में जगह मिलने वाली थी, लेकिन अंतिम समय में उनका नाम हटा दिया गया. भाजपा के हजारों कार्यकर्ता प्रीतम मुंडे को मंत्रिमंडल में शामिल होते देखना चाहते थे. जब उनका नाम अंतिम सूची में नहीं आया तो उनका सपना टूट गया. मैं इसके विरोध में पद से इस्तीफा दे रहा हूं.’

हालांकि, भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव पंकजा मुंडे ने अपनी बहन और सांसद प्रीतम मुंडे खडे को मंत्रिपरिषद में शामिल न किये जाने से नाराज होने की खबरों का खंडन किया है. इससे पहले पंकजा ने यह भी कहा था कि उन्हें विश्वास है कि प्रीतम को मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाएगा.

पंकजा ने स्पष्ट किया था कि पार्टी द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय उन्हें और उनकी बहन को स्वीकार्य होगा, क्योंकि वे पार्टी की समर्पित कार्यकर्ता हैं. इस बीच, सूत्रों से पता चला है कि पंकजा मंगलवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलेंगी और उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाएंगी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्तीफा देने वालों में जिला युवा इकाई के उपाध्यक्ष विवेक पाखरे भी शामिल हैं.

सरजेराव टंडाले ने कहा, ‘अगर हमारे नेता का सम्मान ही नहीं है तो संगठन में रहने का क्या मतलब? हजारों पार्टी कार्यकर्ता प्रीतम मुंडे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में देखने का इंतजार कर रहे थे. जब हमने उनका नाम मंत्रिपरिषद सूची में नहीं देखा तो हम बहुत हताश हुए.’

भाजपा से जुड़े सूत्र का कहना है कि भाजपा नेता भागवत कराड को राज्यमंत्री बनाए जाने के पार्टी के फैसले से कार्यकर्ता नाराज हैं.

बता दें कि कराड अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत वंजारा समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं. भाजपा के दिवंगत नेता और प्रीतम मुंडे के पिता गोपीनाथ मुंडे से उन्होंने राजनीति का ककहरा सीखा है. वह मराठवाड़ा के औरंगाबाद क्षेत्र से आते हैं

प्रीतम मुंडे और उनकी बड़ी बहन भाजपा महासचिव पंकजा मुडे भी वंजारा समुदाय से ताल्लुक रखती हैं और मराठवाड़ा के बीड का प्रतिनिधित्व करती हैं.

कराड को सशक्त करने के पार्टी के फैसले से एक संदेश गया है कि भाजपा प्रीतम और पंकजा मुंडे से इतर मराठवाड़ा में ओबीसी का समानांतर नेतृत्व तैयार करने की कोशिश कर रही है.

इन पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद पंकजा मुंडे ने शुक्रवार को मीडियाकर्मियों को बताया, ‘हम हमारे समर्थकों के साथ बहुत ही सौहार्दपूर्ण संबंध साझा करते हैं. यह लंबा चलने वाला स्थाई संबंध है, जो सत्ता या पद पर आधारित नहीं है. वे (इस्तीफा देने वाले पदाधिकारी) आहत हैं.’

पंकजा के राजनीतिक करिअर को खत्म करने की साजिश: शिवसेना

शिवसेना का आरोप है कि दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी और दो बार की सांसद प्रीतम मुंडे के बजाय भाजपा के राज्यसभा सदस्य भागवत कराड को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल करना उनकी बहन पंकजा मुंडे के राजनीतिक करिअर को खत्म करने की साजिश है.

शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में लिखे एक संपादकीय में कहा, ‘भागवत कराड को राज्यमंत्री बनाया गया. यह पंकजा मुंडे के राजनीतिक जीवन को खत्म करने की साजिश है. भाजपा नेता दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की छत्रछाया में कराड बढ़े, लेकिन प्रीतम मुंडे का विचार न करते हुए कराड को राज्यमंत्री बनाया गया. वंजारा समाज में फूट डालने के लिए और पंकजा मुंडे को सबक सिखाने के लिए क्या यह किया गया?’

वहीं, भाजपा नेता पंकजा मुंडे का कहना है कि वह छोटी बहन और दो बार की सांसद प्रीतम मुंडे को मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं किए जाने के केंद्रीय नेतृत्व के फैसले से दुखी नहीं हैं, लेकिन उनके समर्थकों के बीच इसे लेकर नकारात्मकता है.

पंकजा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘वह इतनी बड़ी नेता नहीं है कि पार्टी उनका राजनीतिक करिअर खत्म करने की कोशिश करेगी, जैसा आरोप शिवसेना ने लगाया है.’

उन्होंने कहा, ‘मेरा जन्म वंजारा समुदाय में हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मुझे वंजारा कहा जाए या ओबीसी नेता कहा जाए. मेरा ताल्लुक राज्य से है. मैं एक महिला नेत्री हूं और मैं पूरे राज्य का प्रतिनिधित्व करती हूं. मुझे वंजारा नेता के रूप में दिखाना गलत होगा.’

बता दें कि बीते बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल किया गया, जिसके तहत 43 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई. इनमें 15 कैबिनेट और 28 राज्यमंत्री शामिल हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)