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उन्नाव बलात्कार मामलाः अदालत ने दुर्घटना मामले में सीबीआई के जांच परिणाम को बरक़रार रखा

जुलाई 2019 में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली युवती रायबरेली जेल में बंद अपने चाचा से मुलाकात करने जा रही थीं. इसी दौरान उनकी कार और एक ट्रक की टक्कर हो गई थी, जिसमें उनकी दो रिश्तेदारों की मौत हो गई थी. हादसे के बाद सेंगर के ख़िलाफ़ साज़िश रचने का केस दर्ज किया था. सीबीआई ने कहा था कि नामज़द लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक षड्यंत्र रचने से संबंधित कोई सबूत नहीं मिले हैं.

(फोटोः पीटीआई)

नई दिल्लीः दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के उस परिणाम को बरकरार रखा है, जिसमें सीबीआई ने उन्नाव बलात्कार पीड़िता और उनके परिवार की 2019 में हुई दुर्घटना में किसी तरह की साजिश से इनकार किया है.

दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने सीबीआई द्वारा की गई जांच को बरकरार रखा है.

जुलाई 2019 में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली युवती, चाची, मौसी और अपने वकील के साथ रायबरेली जेल में बंद अपने चाचा महेश सिंह से मुलाकात करने जा रही थी. रास्ते में रायबरेली के गुरुबख्शगंज क्षेत्र में उनकी कार और एक ट्रक के बीच संदिग्ध परिस्थितियों में टक्कर हो गई थी.

इस हादसे में युवती की मौसी ने स्थानीय अस्पताल में दम तोड़ दिया था. वहीं, उनकी चाची को लखनऊ स्थित एक ट्रामा सेंटर में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था.

रायबरेली के गुरुबक्सगंज थाने में दुर्घटना के पीछे साजिश का आरोप लगाते हुए पीड़िता के चाचा महेश सिंह की तहरीर पर भाजपा विधायक सेंगर और उनके भाई मनोज सेंगर के साथ-साथ विनोद मिश्र, हरिपाल सिंह, नवीन सिंह, कोमल सिंह, अरुण सिंह, ज्ञानेन्द्र और रिंकू के खिलाफ नामजद तथा 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और साजिश रचने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था.

मालूम हो कि सेंगर पीड़िता से बलात्कार मामले में उम्रकैद की सजा भी काट रहे हैं. कुलदीप सेंगर ने 2017 में पीड़िता का बलात्कार किया था. उस समय पीड़िता की उम्र 17 साल थी.

पीड़िता और उसके परिवार के सड़क हादसे का शिकार हो जाने के बाद अगस्त 2019 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के बांगरमऊ से चार बार भाजपा के विधायक रह चुके सेंगर को पार्टी से निकाल दिया गया था.

बहरहाल सड़क दुर्घटना संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा कि शिकायकर्ता पक्ष की आपत्ति एक रोमांचक कहानी की तरह थी, लेकिन यह महज अनुमान और अटकलों पर आधारित थी.

उन्होंने कहा कि सीबीआई द्वारा की गई जांच की निष्ठा, सटीकता और ईमानदारी पर संदेह करने का कोई आधार नहीं है और सीबीआई ने घटना की सच्चाई सामने रखी है.

सीबीआई ने कहा कि एफआईआर में नामजद लोगों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने से संबंधित कोई सबूत नहीं मिले. एफआईआर में कुलदीप सेंगर, ट्रक चालक या, उनके क्लीनर और ट्रक के मालिक को नामजद हैं.

अक्टूबर 2019 में सीबीआई ने पीड़िता से संबंधित दुर्घटना मामले में अपने पहले आरोप पत्र में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ हत्या के आरोप हटा दिए थे.

जांच को बरकरार रखते हुए न्यायाधीश ने 31 जुलाई को दिए आदेश में कहा, ‘मुझे सीबीआई के उन निष्कर्षों को आरोप-पत्र में बरकरार रखने में कोई संकोच नहीं है, क्योंकि आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता, इसलिए उन पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या की कोशिश), धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोष नहीं लगाया जा सकता.’

सत्र न्यायाधीश ने लापरवाही के कारण हुई मौत और मानव जीवन को खतरे में डालने वाला कृत्य करने के लिए ट्रक चालक के खिलाफ आरोप तय किए हैं. इसके साथ ही सेंगर और उनके साथियों के खिलाफ आपराधिक धमकी के आरोप तय किए गए हैं.

कुलदीप सेंगर को 2017 में नाबालिग से बलात्कार के मामले में दिसंबर 2019 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. इसके अलावा चार मार्च 2020 को सेंगर, उसके भाई और पांच अन्य को बलात्कार पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत के लिए भी दोषी ठहराया गया और उन्हें 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)