राजनीति

योगी के नेतृत्व में भाजपा विधानसभा चुनाव लड़ेगी तो हम कतई गठबंधन नहीं करेंगे: राजभर

उत्तर प्रदेश में भाजपा के पूर्व सहयोगी और सरकार में मंत्री रहे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि जहां की जनता कोरोना काल में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, दवा और बिस्तर के लिए तरस रही थी और वहां के मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल में वोट मांग रहे थे.

ओमप्रकाश राजभर. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने राज्य में अगले वर्ष की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से गठबंधन की अटकलों के बीच दावा किया कि ‘भाजपा भले ही उनकी सभी शर्त मान ले, लेकिन यदि पार्टी ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चुनाव लड़ा तो वह उससे गठबंधन नहीं करेंगे.’

राजभर ने कहा, ‘27 अक्टूबर को हम अपनी पार्टी का स्थापना दिवस मनाएंगे और उसी दिन 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने फैसले की घोषणा करेंगे.’

राजभर ने दावा किया कि इसी दिन (27 अक्टूबर को) भाजपा की विदाई की तारीख भी तय हो जाएगी.

राज्य की भाजपा सरकार में 2017 से 2019 तक पिछड़ा वर्ग व दिव्यांग जन कल्‍याण मंत्री रहे ओमप्रकाश राजभर ने साफ कहा, ‘अव्‍वल तो भारतीय जनता पार्टी से उनका (सुभासपा) गठबंधन नहीं होने वाला है, लेकिन अगर कहीं कोई संभावना बनी तो भाजपा को हमारी शर्तें माननी पड़ेगी. इन शर्तों में देश में जातिवार गणना, सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू करना, पिछड़ी जाति का मुख्यमंत्री घोषित करना, एक समान और अनिवार्य नि:शुल्क शिक्षा आदि शामिल है.’

राजभर ने कहा, ‘इनकी डबल इंजन की सरकार है और अगर 72 घंटे में गरीब सवर्णों के लिए आरक्षण लागू कर सकते हैं तो हमारी मांगों को भी अभी पूरा किया जा सकता है. सभी मांगें पूरी होने के बाद ही किसी तरह की बातचीत होगी.’

राजभर ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जिस तरह सभाओं में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की झूठी तारीफ कर रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि अगला विधानसभा चुनाव योगी के ही नेतृत्व में लड़ा जाएगा और ऐसी स्थिति में हम भाजपा से कतई गठबंधन नहीं करेंगे.’

वर्ष 2002 में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की स्थापना करने वाले राजभर ने 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से गठबंधन किया था और समझौते में मिली आठ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, जिसमें उनके समेत पार्टी के कुल चार उम्मीदवार विजयी हुए थे.

राजभर को योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया, लेकिन उनके विद्रोही तेवर को देखते हुए मई 2019 में योगी मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया.

राजभर ने भाजपा को हराने का उद्देश्य लेकर छोटे-छोटे दलों को लेकर ‘भागीदारी संकल्प मोर्चा’ का गठन किया है, जिसमें असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) भी शामिल हुई है.

हालांकि बीते तीन अगस्त को ओमप्रकाश राजभर और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की मुलाकात से राजनीतिक हलकों में गठबंधन की नई अटकलों को बल मिला है.

राजभर ने मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा, ‘राज्य में योगी सरकार पूर्ण रूप से फेल है. जब मैं मंत्री था तो सोनभद्र गया था, दौरे के बाद आया तो वहां की व्यथा मुख्यमंत्री को बताई तो कहने लगे कि आप केवल सरकार की आलोचना करते हैं. हमने उन्हें थाने में गरीबों की सुनवाई नहीं होने की बात कही, तो वह भी नहीं मानी.’

उन्होंने आगे कहा, ‘आज भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्‍वतंत्र देव की समीक्षा बैठकों में विधायक और सांसद सार्वजनिक तौर पर कह रहे हैं कि पुलिस हमारी नहीं सुन रही है. प्रदेश में भाजपा के दर्जनों विधायक और सांसद पुलिस के खिलाफ धरना दे रहे हैं.’

राजभर ने योगी सरकार में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा, ‘भ्रष्टाचार तो ऊपर से है. सबसे बड़ा भ्रष्‍टाचार तो पंचम तल (मुख्यमंत्री कार्यालय) पर है. योगी की सरकार में 100 प्रतिशत पैसे लेकर पोस्टिंग (तैनाती) हो रही है.’

उन्होंने कहा, ‘योगी न अपने किसी मंत्री, न किसी विधायक की बात सुनते हैं, वे सिर्फ अपने अधिकारियों की बात मानते हैं.’

राजभर ने कोरोना प्रबंधन को लेकर भाजपा सरकार पर 100 प्रतिशत झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश एक ऐसा प्रदेश है, जहां की जनता कोरोना काल में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, दवा और बिस्तर के लिए तरस रही थी और मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल में वोट मांग रहे थे. उन्होंने दावा किया कि इसका असर विधानसभा चुनाव में पड़ेगा और भाजपा 100 सीटों से नीचे आ जाएगी.

स्‍वतंत्र देव से मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर राजभर ने कहा, ‘वो अनौपचारिक मुलाकात थी. हमारी उनकी मुलाकात अक्सर होती रहती है. जब हम सरकार में मंत्री बने तो वह भी परिवहन मंत्री थे. तभी से संबंध बना और आना जाना रहा. जब से वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने तब से हमारी यह चौथी मुलाकात है. चूंकि वह संगठन के जिम्मेदार व्यक्ति हैं, इसलिए मेरी मुलाकात जगजाहिर होने पर तर्क-वितर्क होने लगा.’

राजभर से जब यह पूछा गया कि अगर स्थित बन जाती है तो वह उस भाजपा के साथ गठबंधन कैसे करेंगे जिसके खिलाफ अभी तक वह बयान देते रहे हैं तो उन्होंने कहा, ‘आपने देखा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में धुर विरोधी बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी मिल गए. जम्मू कश्मीर में पीडीपी और भाजपा एक मंच पर हो गए. क्या कभी सोचा था.’

असदुद्दीन ओवैसी के सैयद सालार गाजी की मजार पर जाने के बाद समुदाय के लोगों द्वारा दवाब बनाने के बारे में पूछे जाने पर राजभर ने कहा, ‘राजभर समाज को ओवैसी से कोई परेशानी नहीं है और न ही ओवैसी ने अभी तक भागीदारी संकल्प मोर्चा से अलग होने की कोई बात की है. असली दिक्‍कत भाजपा को है और भाजपा ने भागीदारी संकल्प मोर्चा को विभाजित करने के प्रयास किए हैं.’

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पिछले माह बहराइच में जब अपनी पार्टी की बैठक करने गए तो उन्होंने सैयद सालार गाजी की मजार पर फूल चढ़ाए. राजभर ने जिन महाराजा सुहेलदेव के नाम पर अपनी पार्टी बनाई है, उनके बारे में इतिहासकारों का मत है कि उन्होंने सालार गाजी को युद्ध में हराया था.

ओवैसी के वहां जाने के बाद प्रदेश के मंत्री अनिल राजभर ने ओमप्रकाश राजभर पर निशाना साधते हुए कहा था कि ओमप्रकाश राजभर के राजनीतिक गठबंधन से महाराजा सुहेलदेव और राजभर समाज का अपमान हुआ है.

बहरहाल स्‍वतंत्र देव के घर राजभर के जाने से जहां एक तरफ सुभासपा और भाजपा के फ‍िर से गठबंधन की चर्चाओं को बल मिला, वहीं ओवैसी की पार्टी ने राजभर से संबंध तोड़ने का संकेत दे दिया. ओवैसी की पार्टी के प्रवक्ता आसिम वकार ने राजभर-स्‍वतंत्रदेव की मुलाकात के बाद कहा, ‘हम अपनी कौम के साथ धोखा नहीं होने देंगे.’

सपा यदि छोटे दलों से समझौता कर ले तो पूर्वी उप्र में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिलेगी

ओमप्रकाश राजभर ने यह भी दावा किया है कि अगर समाजवादी पार्टी (सपा) केवल छोटे दलों से समझौता कर ले, तो आगामी विधानसभा चुनाव में पूर्वी उत्तर प्रदेश में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिलेगी.

उन्होंने कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी की सरकार से पूरे राज्य की जनता में नाराजगी है. यदि सपा आगे बढ़कर क्षेत्रीय पार्टियों और छोटी पार्टियों से समझौता कर ले तो चुनाव परिणाम बदल जाएगा. सपा केवल हमसे (सुभासपा) समझौता कर ले तो मऊ, बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़, जौनपुर, आंबेडकर नगर आदि जिलों में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिलेगी. सिर्फ बनारस में दो सीट पर लड़ाई रहेगी.’

उल्लेखनीय है कि वाराणसी जिले के मूल निवासी राजभर गाजीपुर जिले की जहूराबाद विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने अपनी पार्टी का मुख्यालय बलिया जिले के रसड़ा में बनाया है. वह जिस राजभर बिरादरी से आते हैं, उसकी पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में अच्छी संख्या है.

सुभासपा का दावा है कि बहराइच से बलिया तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस समुदाय की आबादी 12 फीसदी है. कुल 403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में पूर्वी उत्तर प्रदेश से लगभग 150 सीट हैं.

अखिलेश यादव के इस बयान पर कि छोटे दलों के लिए उनके दरवाजे खुले रहेंगे, सुभासपा प्रमुख ने कहा, ‘उनका यह बयान करीब छह माह से चल रहा है. क्या किसी छोटे दल के नेता से उन्होंने बातचीत की. अभी तो उनकी तरफ से कोई पहल ही नहीं हुई है. वह (अखिलेश यादव) जिस तरह कह रहे हैं, अगर छोटे दलों को बुलाकर बात कर लें तो देखिए परिणाम क्या होता है.’

राज्य में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस में कौन सी पार्टी भाजपा को हरा सकती है, इस प्रश्न पर उन्होंने कहा, ‘प्रदेश में लोगों को लग रहा है कि भाजपा से सिर्फ सपा ही लड़ सकती है. इधर बसपा ने भी कोशिश शुरू की है, लेकिन बसपा का वह ‘क्रेज’ नहीं है, जो समाजवादी पार्टी का है.’

राजभर ने कहा कि छोटे दलों को मिलाकर बनाया गया उनका ‘भागीदारी संकल्प मोर्चा’ बहुत मजबूत है तथा अभी कई और दल इसमें शामिल होंगे.

उन्होंने पहले कहा था कि अगर भाजपा किसी पिछड़े वर्ग के नेता को अगले चुनाव में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाती है तो उनकी पार्टी एक बार फिर से भाजपा से गठजोड़ कर सकती है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)