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यूपी: दोहरे हत्याकांड मामले में उत्तराखंड की मंत्री के पति के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट जारी

मामला बरेली का है और 1990 में संपत्ति विवाद में हुई एक दंपति की मौत से जुड़ा है. मृतकों की बेटी का आरोप था कि घटना के दिन चार-पांच लोग चाकुओं-डंडों के साथ उनके घर में घुसे और उनके माता-पिता की हत्या कर दी. जांच में उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू सहित 11 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप तय किए गए थे.

गिरधारी लाल साहू. (फोटो साभार: एएनआई)

बरेलीः उत्तर प्रदेश की एक स्थानीय अदालत ने 31 साल पुराने दोहरे हत्याकांड मामले में उत्तराखंड की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के पति के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अब्दुल कय्यूम ने गुरुवार को गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ आदेश पारित किया.

बरेली के एसएसपी रोहित कुमार साजवान के मुताबिक, उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की एक टीम गठित की गई है.

साहू के वकील अनिल भटनागर ने अदालत में यह कहते हुए याचिका दायर की है कि उनके मुवक्किल को बुखार है और वह कमजोर इम्युनिटी से जूझ रहे हैं.

उन्होंने इलाहाबाद हाईकर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि बुखार से जूझ रहे किसी भी शख्स को न तो अदालत या फिर न ही अदालत परिसर में प्रवेश करने की अनुमति है.

हालांकि, अदालत ने उनका आवेदन खारिज करते हुए उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है.

इस मामले में अन्य आरोपियों बजरुद्दीन, नरेश और जगदीश के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट रद्द करने के लिए एक याचिका भी दायर की गई है लेकिन अदालत ने यह याचिका रद्द कर दी और उन्हें जेल भेज दिया.

बता दें कि यह मामला 11 जून 1990 को संपत्ति विवाद में उत्तर प्रदेश के बरेली के नरेश जैन और उनकी पत्नी पुष्पा जैन की हत्या से जुड़ा हुआ है.

उनकी बेटी प्रगति ने एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि हत्या के दिन चार से पांच लोग चाकुओं और डंडों के साथ उनके घर में घुसे और उनके माता-पिता की हत्या कर दी. इस हमले में प्रगति और उनकी बहन प्रेरणा भी घायल हो गई थीं.

मामले में जांच के दौरान कई नाम सामने आए थे. बाद में साहू सहित 11 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे. इस मामले पर अब 20 अगस्त को सुनवाई होगी.

उल्लेखनीय है कि साल 2017 में  गिरधारी लाल साहू पर धोखाधड़ी से अपने ही कर्मचारी की किडनी चोरी का आरोप लगा था. तब साहू के खिलाफ तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करने की मांग उठी थी.

साहू के आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर विपक्ष शुरू से ही हमलावर रहा है.

नवभारत टाइम्स के अनुसार, 2017 में ही भाकपा माले राज्य कमेटी सदस्य इंद्रेश मैखुरी ने रेखा आर्य को टिकट दिए जाने को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा था कि साहू के गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड के बावजूद न केवल भाजपा ने रेखा आर्य को विधायक का टिकट दिया बल्कि मंत्री भी बनाया.

मैखुरी के अनुसार, गिरधारी लाल साहू पर जमीन हड़पने से लेकर गुंडागर्दी तक के गंभीर आरोप हैं. उनका नाम बरेली पुलिस के रिकॉर्ड हिस्ट्रीशीटर अपराधी के तौर पर दर्ज हैं.