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एमपी: एमबीबीएस प्रथम वर्ष में हिंदुत्व से जुड़े लोगों और आंबेडकर के बारे में पढ़ाया जाएगा

मध्य प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह जनसंघ व आरएसएस के संस्थापकों के सिद्धांतों एवं जीवन दर्शन के बारे में एमबीबीएस छात्रों को पढ़ा कर अपनी विचारधारा को लोगों पर थोपना चाहती है, जबकि भाजपा ने कांग्रेस पर इतिहास को मिटाने और दबाने का काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश और समाज के लिए जो आदर्श हैं, उनके बारे में सभी को जानने की ज़रूरत है.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और मुख्यमंत्री​ शिवराज सिंह चौहान. (फोटो: पीटीआई/टि्वटर)

भोपाल: मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने रविवार को कहा कि प्रदेश में एमबीबीएस छात्रों को प्रथम वर्ष के आधार पाठ्यक्रम के तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक केबी हेडगेवार, भारतीय जनसंघ के नेता दीनदयाल उपाध्याय, स्वामी विवेकानंद और बीआर आंबेडकर के सिद्धांतों एवं जीवन दर्शन के बारे में पढ़ाया जाएगा.

इस पर मध्य प्रदेश में राजनीति शुरू हो गई है. प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह जनसंघ व आरएसएस के संस्थापकों के सिद्धांतों एवं जीवन दर्शन के बारे में एमबीबीएस छात्रों को पढ़ा कर अपनी विचारधारा को लोगों पर थोपना चाहती है, जबकि भाजपा ने कांग्रेस पर इतिहास को मिटाने और दबाने का काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश और समाज के लिए जो आदर्श हैं, उनके बारे में सभी को जानने की जरूरत है.

सारंग ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य एमबीबीएस के छात्रों को सामाजिक और नैतिक मूल्य सिखाना है. हेडगेवार, उपाध्याय, स्वामी विवेकानंद संघ के हिंदुत्व पंथ का हिस्सा हैं, जो सत्तारूढ़ भाजपा के वैचारिक एवं राजनीतिक परामर्शदाता के रूप में माने जाते हैं.

मंत्री ने कहा कि एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक और शल्य चिकित्सा के जनक के रूप में जाने जाने वाले भारत के महान चिकित्साशास्त्री ऋषि सुश्रुत के बारे में भी पढ़ेंगे.

एमबीबीएस छात्रों के लिए अगला शैक्षणिक सत्र इस साल के अंत तक शुरू होने की संभावना है.

उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के मुताबिक, नैतिक मूल्यों को (एमबीबीएस के) प्रथम वर्ष में आधार पाठ्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए. इसलिए हमने छात्रों के चरित्र के निर्माण के लिए इन महान हस्तियों को शामिल करने के बारे में सोचा.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एक सर्जन केशव बलिराम हेडगेवार ने साल 1925 में नागपुर में हिंदुत्व की विचारधारा पर आधारित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी. दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के प्रमुख नेताओं में से एक थे, जो भाजपा के अग्रदूत थे.

सारंग ने कहा, ‘एमबीबीएस (बैचलर ऑफ मेडिसिन, बैचलर ऑफ सर्जरी) के प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में छात्रों को हेडगेवारजी, उपाध्याय जी, स्वामी विवेकानंदजी, आंबेडकरजी और अन्य महान हस्तियों के बारे में व्याख्यान दिया जाएगा. इन महान हस्तियों के जीवन दर्शन पर दिए गए व्याख्यान छात्रों में नैतिक मूल्यों एवं सिद्धांतों के साथ-साथ सामाजिक और चिकित्सीय नैतिकता को जागृत करेंगे.’

उन्होंने कहा कि हेडगेवार ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया था.

एमबीबीएस कोर्स का सिलेबस एनएमसी तय करता है. मेडिकल क्षेत्र के सूत्रों ने कहा, यह प्रत्येक विषय के लिए सामग्री निर्धारित करता है, लेकिन राज्यों के शिक्षा विभाग को फाउंडेशन कोर्स विषय की सामग्री तैयार करने का अधिकार है.

उन्होंने आगे कहा, ‘हेडगेवार, उपाध्याय और अन्य पर व्याख्यानों को फाउंडेशन कोर्स में चिकित्सा नैतिकता के विषय में शामिल किए जाने की संभावना है.’

सूत्रों ने कहा, ‘आमतौर पर छात्रों को एमबीबीएस में प्रवेश लेने के बाद एक महीने के लिए फाउंडेशन कोर्स में व्याख्यान दिए जाते हैं.’

मध्य प्रदेश में हर साल करीब 2,000 छात्र एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लेते हैं.

मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने मीडिया को बताया, ‘देश और समाज के लिए जो आदर्श हैं, उन महान क्रांतिकारियों के बारे में सबको जानने की जरूरत है. महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद जैसे महापुरुषों ने क्रांतिकारी आंदोलन खड़ा करने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया.

उन्होंने आगे कहा, ‘डॉ. हेडगेवार जी ने भारत को एक सूत्र में बांधने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की. उन्होंने एक बड़ा विचार केवल देश ही नहीं बल्कि विश्व को दिया. पंडित दीनदयाल जी ने अंत्योदय का मंत्र देकर एकात्म मानववाद का दर्शन दिया. क्या, इनके बारे में नहीं पढ़ाया जाना चाहिए?’

उन्होंने कहा कि डॉ. बाबा साहब आं‍बेडकर ने देश की एकता और अखंडता के लिए काम किया.

शर्मा ने आरोप लगाया, ‘इतिहास को मिटाने और दबाने का काम कांग्रेस ने किया. वामपंथियों के साथ मिलकर कांग्रेस ने इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने का प्रयास किया. जिन्होंने देश के लिए कुछ किया उन्हें छिपाने का काम किया. कांग्रेस वामपंथियों के इशारे पर चलती थी, आज वामपंथी देश के अंदर खत्म हो चुके हैं, इसलिए कांग्रेस भी धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर है.’

इस पर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट किया, ‘भाजपा शुरू से ही अपनी विचारधारा और अपने खास एजेंडे को लोगों पर थोपने का काम करती रहती है, चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो या अन्य क्षेत्र हों. अब मध्य प्रदेश में एमबीबीएस के छात्रों को जनसंघ व आरएसएस के संस्थापकों के विचार पढ़ाए जाएंगे.’

उन्होंने कहा कि इसके पूर्व आजादी के अमृत महोत्सव की सामग्री में भी इसी प्रकार अपनी विचारधारा के लोगों को शामिल करने का काम भाजपा ने किया है.

कमलनाथ ने दावा किया, ‘पूरा देश जानता है कि भाजपा के लोगों का आजादी के संघर्ष से लेकर देश के स्वर्णिम इतिहास में कोई योगदान नहीं है. लेकिन भाजपा जान-बूझकर इतिहास को तोड़ने मरोड़ने का, अपने लोगों को महिमामंडित करने का और अपनी विचारधारा को थोपने का काम करती रहती है और यह भी उसी एजेंडे का हिस्सा है.’

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार स्पष्ट करे कि इन लोगों ने देश की आजादी के संघर्ष से लेकर देश के विकास में ऐसे कौन से उल्लेखनीय कार्य किए हैं, जो इनके विचारों से चिकित्सा के छात्रों को अवगत कराया जाए?

कमलनाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर अपनी विचारधारा को थोपने का प्रयास वर्षों से कर रही है और यह भी उसी एजेंडा का हिस्सा है.

उन्होंने कहा, ‘देश में कई ऐसे महापुरुष हुए हैं, जिनका आजादी की लड़ाई से लेकर देश के विकास एवं देश हित में महत्वपूर्ण योगदान है. बेहतर हो भाजपा सरकार निष्पक्ष भावना से उनके विचारों से छात्रों को अवगत कराने का काम करे, न कि अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति व खास विचारधारा के एजेंडों को थोपने का काम करे.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)