राजनीति

केरल: माकपा नेता पर बेटी ने बच्चा छीनने का आरोप लगाया, अपहरण का मामला दर्ज

माकपा से संबद्ध छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की पूर्व नेता अनुपमा ने आरोप लगाया है कि एक साल पहले जब उनका बच्चा पैदा हुआ तो उनके माता-पिता ने बच्चा उनसे ले लिया और पुलिस में बीते अप्रैल माह से से कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया. अनुपमा माकपा की स्थानीय समिति के सदस्य पीएस जयचंद्रन की बेटी हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

तिरुवनंतपुरमः केरल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक वरिष्ठ नेता की बेटी ने अपने माता-पिता पर आरोप लगाया है कि उन्होंने करीब एक साल पहले उसके नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद उससे छीन लिया था.

23 वर्षीय युवती ने अपना बच्चा वापस लेने के लिए पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई है.

माकपा की स्थानीय समिति के सदस्य पीएस जयचंद्रन की बेटी अनुपमा एस. चंद्रन ने आरोप लगाया है कि हालांकि उन्होंने अप्रैल के बाद से कई बार इस संबंध में पुलिस से शिकायत की, लेकिन पुलिस उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज करने से बचती रही.

इस बीच पुलिस ने बताया कि अनुपमा के माता-पिता, उनकी बहन और पति के साथ उसके पिता के दो मित्रों समेत छह लोगों के खिलाफ मंगलवार को मामला दर्ज किया गया है.

पुलिस ने कहा कि मामला दर्ज करने में देरी इसलिए हुई, क्योंकि वे इस संबंध में कानूनी सलाह का इंतजार कर रहे थे.

उन्होंने बताया कि आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 343 (गलत तरीके से कैद करना), 361 (संरक्षण से अपहरण करना), 471 (फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत आरोप लगाए हैं.

माकपा से संबद्ध ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) की पूर्व नेता अनुपमा ने आरोप लगाया है कि उन्होंने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन समेत माकपा के वरिष्ठ नेताओं से भी शिकायत की थी, लेकिन उनके बच्चे को वापस दिलाने में किसी ने उनकी मदद नहीं की.

उन्होंने मीडिया से कहा, ‘जब कोई महिला अपने लापता बच्चे के बारे में पुलिस से शिकायत करती है, तो उसे इस तरह काम करना चाहिए? क्या वे (पुलिस) इस प्रकार के हर मामले के लिए कानूनी सलाह लेते हैं? मुझे लगता है कि मेरे पिता और परिजन को बचाने के लिए जान-बूझकर यह देरी की गई.’

अनुपमा की शिकायत के अनुसार, उनके माता-पिता को एसएफआई के नेता अजीत के साथ उनका संबंध पसंद नहीं था.

शिकायत में कहा गया है कि बच्चे के जन्म के समय अनुपमा अविवाहित थीं, इसलिए प्रसव के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने के तीन दिन बाद ही उनका बच्चा उनसे छीन लिया गया था.

अनुपमा ने कहा कि उन्होंने अप्रैल में अपना घर छोड़ दिया था और वह तब से अजीत के साथ रह रही हैं.

इस संबंध में पुलिस का कहना है कि अनुपमा के पिता जयचंद्रन ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अपनी बेटी को उसके बच्चे से अलग कर दिया था, लेकिन उन्होंने पूछताछ के दौरान दावा किया कि यह उनकी बेटी की सहमति से किया गया था.

पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘पिता ने दावा किया है कि उन्होंने (बेटी ने) एक स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर करके सहमति दी थी कि उन्हें अपना बच्चा सौंपने पर कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि वह शिशु की देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि परिवार ने इस कागज पर उनसे जबरन हस्ताक्षर कराए थे.’

उन्होंने बताया कि पिता के बयान के अनुसार, ‘बच्चे को पिछले साल अक्टूबर में यहां थाइकौड में सरकारी बाल कल्याण केंद्र के सामने लगे पालने में रख दिया गया था.’

उन्होंने बताया कि केंद्र के नियमानुसार, जब कोई बच्चा पालने में मिलता है, तो वे दो महीने तक बच्चे को अपने पास रखते हैं और यदि बच्चों का कोई अभिभावक उसे लेने नहीं आता है, तो वे अन्य लोगों को उसे गोद लेने की अनुमति दे देते हैं.

पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हमने कल्याण समिति के अधिकारियों से संपर्क किया है. उन्होंने स्वीकार किया है कि उन्हें उसी दिन एक बच्चा मिला था, लेकिन वे इससे अधिक कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि यह गोद लेने के संबंध में उनके नियमों और मानदंडों के खिलाफ है.’

अधिकारी ने बताया कि मामले की विस्तृत जानकारी हासिल करने और बच्चे का पता लगाने के लिए जांच जारी है.

इस बीच राज्य महिला आयोग ने महिला से मिली शिकायत के आधार पर गुरुवार को इस संबंध में मामला दर्ज किया है.

आधिकारिक बयान के अनुसार, आयोग की अध्यक्ष पी. सतीदेवी ने इस संबंध में पुलिस प्रमुख से तुरंत रिपोर्ट तलब की है और अगले महीने अपनी बैठक के दौरान आरोपी को समन करने का फैसला लिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अनुपमा ने बताया, ‘बच्चे की जैविक मां होने के नाते मुझे बच्चे की हर जानकारी जानने का अधिकार है. मुझे अपना बच्चा वापस चाहिए और मैं इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हूं.’

हालांकि, पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मुश्किल है, क्योंकि जिस शेल्टर होम में बच्चे को छोड़ा गया था, वहां से उसे गोद ले लिया गया है और कानून-नियम गोद लिए बच्चे के पते और उसके ठिकाने की पहचान बताने की मंजूरी नहीं देता.

अनुपमा ने कहा, ‘मुझे अजीत कुमार से पांच साल पहले प्यार हुआ था. जब मैं आठ महीने की गर्भवती थी, पिछले साल सितंबर में हमने एक साथ रहना शुरू किया था.’

अनुपमा ने कहा कि उनके माता-पिता ने इस रिश्ते का विरोध किया था और इस रिश्ते को खत्म नहीं करने पर आत्महत्या करने की धमकी दी थी.

अनुपमा ने कहा, ‘बाद में उन्होंने (माता-पिता) हम दोनों की शादी कराने और मेरे बच्चे की सुरक्षा का वादा किया था लेकिन जब मैं घर लौटी तो उन्होंने मुझे कमरे में बंद कर दिया और अजीत से किसी तरह का संपर्क नहीं करने दिया.’

अनुपमा के अनुसार, ‘मैंने पिछले साल 19 अक्टूबर को बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन जन्म के तीन दिन बाद ही जब बच्चे के साथ घर जा रही थी तो मेरे माता-पिता ने जबरन बच्चा छीन लिया. जब भी मैं अपने बच्चे के बारे में पूछती तो माता-पिता मुझे प्रताड़ित करते. यहां तक कि मेरी बहन की शादी के बाद मुझे कैद करके ही रखा गया.’

इस साल की शुरुआत में अनुपमा किसी तरह से अपने माता-पिता के घर से निकलकर अजीत के साथ रहने लगीं. उन्हें अपने बेटे की कोई खबर नहीं थी, जिसके बाद 15 अप्रैल 2021 को उन्होंने पिता जयचंद्रन के खिलाफ स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

बच्चा अपहरण मामला: माकपा ने कहा मां को उसका बच्चा मिलना चाहिए

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का कहना है कि पार्टी चाहती है कि पीड़ित महिला को उसका बच्चा मिलना चाहिए. सत्तारूढ़ दल ने यह भी कहा कि इस मामले में उसका हस्तक्षेप एक सीमा तक ही हो सकता है, क्योंकि इसमें कानूनी जटिलाएं शामिल हैं.

माकपा के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी के जिला सचिव अनावूर नागप्पन ने यहां मीडिया से कहा, ‘कुछ समय पहले माकपा के स्थानीय नेता पीएस जयचंद्रन की बेटी अनुपमा एस. चंद्रन ने यह मामला उनके संज्ञान में लाया था.’

नागप्पन ने कहा कि महिला को बताया गया कि पार्टी के स्तर पर मुद्दे को नहीं सुलझाया जा सकता और उन्हें अपना बच्चा वापस पाने के लिए कानूनी तौर-तरीके अपनाने होंगे.

माकपा नेता ने कहा, ‘मां को उसका बच्चा मिलना चाहिए. पार्टी का यह रुख हमेशा से रहा है. मैंने अनुपमा से कहा कि यह मुद्दा पार्टी के स्तर पर नहीं सुलझाया जा सकता और इसलिए हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते. मैंने उन्हें कानूनी सहायता देने का प्रस्ताव भी दिया.’

उन्होंने कहा कि अनुपमा कभी उनसे मिलने नहीं आईं, लेकिन उनके कार्यालय को एक पत्र भेजा था और बाद में फोन पर बात की थी.

उन्होंने कहा कि उन्होंने अनुपमा के पिता पीएस जयचंद्रन से भी बात की थी, जो पार्टी की स्थानीय समिति के सदस्य हैं. जयचंद्रन से कहा गया कि वह बच्चा लौटा दें.

नागप्पन ने कहा, ‘लेकिन उन्होंने (जयचंद्रन) कहा था कि वह ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि बच्चे को सरकारी बाल कल्याण केंद्र को सौंप दिया गया है और उसे वापस लेने में कानूनी अड़चनें हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)