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लखीमपुर खीरी हिंसा: दूसरी चार्जशीट में चार किसानों पर हत्या और दंगे समेत कई आरोप, तीन बरी

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में दर्ज दूसरी एफ़आईआर के तहत गिरफ़्तार किए गए सात किसान आरोपियों में से पुलिस ने चार- विचित्र सिंह, गुरविंदर सिंह, कमलजीत सिंह और गुरप्रीत सिंह के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दाख़िल किए गए हैं. चारों किसानों पर भाजपा के दो स्थानीय नेताओं और केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्रा की गाड़ी के ड्राइवर की पीट-पीट कर हत्या करने का आरोप है.

लखीमपुर खीरी के तिकोनिया इलाके में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा के बाद कुछ गाड़ियों में आग लगा दी गई थी. (फोटो: पीटीआई)

लखीमपुर खीरी: विशेष जांच दल (एसआईटी) ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में दूसरी प्राथमिकी के संबंध में शुक्रवार को आरोप-पत्र (Chargesheet) दाखिल किया. ये आरोप-पत्र दंगा और हत्या के आरोप में चार किसानों के खिलाफ दाखिल किया गया है. इसमें जेल में बंद तीन किसानों को क्लीनचिट दे दी गई, जिन्हें जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा.

वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी (एसपीओ) एसपी यादव ने बताया, ‘एसआईटी ने प्राथमिकी संख्या 220/2021 के संबंध में शुक्रवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) मोना सिंह की अदालत में चार आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया.’

प्राथमिकी संख्या 220 के तहत गिरफ्तार किए गए सात किसान आरोपियों में से पुलिस ने चार विचित्र सिंह, गुरविंदर सिंह, कमलजीत सिंह और गुरप्रीत सिंह के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किए गए हैं.

यादव ने बताया, ‘तीन व्यक्तियों रणजीत सिंह, सोनू उर्फ कंवलजीत सिंह और अवतार सिंह के संबंध में अंतिम रिपोर्ट सीआरपीसी की धारा 169 (सबूत की कमी होने पर आरोपी की रिहाई) के तहत प्रस्तुत की गई है और उनकी रिहाई के आदेश जारी किए जा रहे हैं.’

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में तीन अक्टूबर 2021 को हुई हिंसा में चार किसानों, एक पत्रकार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो कार्यकर्ताओं और एक ड्राइवर सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी. मामले में दो प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चारों आरोपी किसानों पर भाजपा के दो स्थानीय नेताओं और केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्रा की गाड़ी के ड्राइवर की पीट-पीट कर हत्या करने का आरोप है.

पहली प्राथमिकी एक किसान द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसमें गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा और 15-20 अन्य पर चार किसानों और एक पत्रकार को कुचलने का आरोप लगाया गया था.

हिंसा की जांच के लिए गठित एसआईटी ने आशीष मिश्रा, सुमित जायसवाल, अंकित दास और 11 अन्य के खिलाफ आईपीसी, शस्त्र कानून की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी संख्या-219 के संबंध में तीन जनवरी को आरोप-पत्र दाखिल किया था.

इसमें मिश्रा के रिश्तेदार वीरेंद्र शुक्ला का नाम नहीं था. शुक्ला पर सुबूत मिटाने के आरोप हैं. उन्हें लखीमपुर खीरी की स्थानीय अदालत से जमानत मिल गई है.

दूसरी प्राथमिकी दो भाजपा कार्यकर्ताओं और एक ड्राइवर की हत्या के मामले में सुमित जायसवाल ने दर्ज कराई थी. प्राथमिकी संख्या-220 के संबंध में जांच करते हुए एसआईटी ने सात लोगों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार किया. हालांकि, शुक्रवार को आरोप-पत्र दाखिल करते समय केवल चार लोगों को ही आरोपी बनाया गया.

वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी (एसपीओ) एसपी यादव ने बताया कि शुक्रवार को एसआईटी ने चार आरोपियों के खिलाफ हत्या और दंगा करने समेत विभिन्न धाराओं में 1300 पृष्ठों का आरोप-पत्र पेश किया. अभियोजन पक्ष के 46 गवाहों के बयान दर्ज किए गए.

यादव के मुताबिक, मामले में दर्ज इस दूसरी प्राथमिकी के संबंध में आरोप-पत्र अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) मोना सिंह की अदालत में पेश किया गया है.

यादव ने बताया कि आरोप-पत्र में भारतीय दंड संहिता (आपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं. जिनमें धारा 147 (दंगा), 149 (उकसाना), 114 (घटना के समय उकसाने वाले व्यक्ति की घटनास्थल पर मौजूदगी), 325 (चोट या नुकसान पहुंचाना), 427 (आगजनी) और 504 (शांति भंग करना) मुख्य तौर पर शामिल हैं.

एसपीओ ने बताया, ‘जिन चार आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया, उनमें विचित्र सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 109, 114, 426, 436 और 506 शामिल हैं. जबकि, गुरविंदर सिंह, कमलजीत सिंह और गुरप्रीत सिंह के खिलाफ धारा 143, 147, 148, 149, 323, 325, 427,436, 504 और 302 शामिल हैं.’

तीन किसानों को क्लीनचिट दिए जाने पर यादव ने बताया, ‘तीनों व्यक्तियों के संबंध में अंतिम रिपोर्ट सीआरपीसी की धारा 169 (सबूत की कमी होने पर आरोपी की रिहाई) के तहत प्रस्तुत की गई है.’

उन्होंने बताया कि अदालत ने उन तीनों को रिहा करने का आदेश जारी कर दिया है. रंजीत और अवतार सिंह नवंबर माह से जेल में हैं, जबकि कवलजीत को एक जनवरी को गिरफ्तार किया गया था.

मालूम हो कि लखीमपुर खीरी के सांसद और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के विरोध में तीन अक्टूबर 2021 को वहां के आंदोलित किसानों ने उनके (टेनी) पैतृक गांव बनबीरपुर में आयोजित एक समारोह में उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के जाने का विरोध किया था.

इस दौरान जिले के तिकुनिया में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा से संबंधित महिंद्रा थॉर सहित तीन एसयूवी के एक काफिले ने तिकुनिया क्रॉसिंग पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को रौंद दिया था, जिसमें चार किसानों और एक पत्रकार की मौत हो गई थी और लगभग आधा दर्जन लोग घायल हुए थे.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ के पुत्र आशीष मिश्रा और उसके दर्जन भर साथियों के खिलाफ चार किसानों को थार जीप से कुचलकर मारने और उन पर फायरिंग करने जैसे कई गंभीर आरोप हैं.

फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में मुख्य अभियुक्त आशीष मिश्रा की राइफल और दो अन्य हथियारों से गोली चलाए जाने की पुष्टि हुई है.

गाड़ी से कुचल जाने से मृत किसानों में गुरविंदर सिंह (22 वर्ष), दलजीत सिंह (35 वर्ष), नक्षत्र सिंह और लवप्रीत सिंह के अलावा पत्रकार रमन कश्यप शामिल थे.

प्रदर्शनकारी किसानों के एक समूह को एसयूवी ​के काफिले से कुचले जाने के बाद भीड़ द्वारा दो भाजपा कार्यकर्ताओं समेत तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी.

इनकी पहचान भाजपा कार्यकर्ताओं- शुभम मिश्रा (26 वर्ष) और श्याम सुंदर (40 वर्ष) और केंद्रीय राज्य मंत्री की एसयूवी के चालक हरिओम मिश्रा (35 वर्ष) के रूप में हुई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)