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सपा गठबंधन की सरकार बनी तो राज्य में कोई किसान विरोधी क़ानून लागू नहीं होने देंगे: अखिलेश यादव

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने कहा कि उन्होंने भाजपा द्वारा दिए न्योते को गंभीरता से नहीं लिया है. पंजाब की धुरी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार व मौजूदा विधायक दलवीर सिंह गोल्डी ने आप के मुख्यमंत्री चेहरे भगवंत मान को खुली बहस की चुनौती दी है. वहीं, गोवा में टीएमसी उपाध्यक्ष पवन वर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी ‘असली हिंदुत्व’ के लिए खड़ी है, जबकि भाजपा अल्पकालिक राजनीतिक लाभ पाने के लिए हिंदुओं का इस्तेमाल करती है.

मुजफ्फरनगर में हुई संयुक्त प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी. (फोटो साभार: ट्विटर/समाजवादी पार्टी)

मुजफ्फरनगर/लखनऊ/नई दिल्ली/चंडीगढ़/पणजी/इम्फाल: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी से किसानों को सावधान रहने की अपील करते हुए शुक्रवार को कहा कि सत्तारूढ़ दल (भाजपा) की सरकार ने सिर्फ वोट की खातिर अपने विवादास्पद कृषि कानून वापस लिए हैं.

उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि यदि उनके (सपा के) गठबंधन की सरकार बनी तो वे राज्य में इस तरह के किसी किसान विरोधी कानून को लागू नहीं होने देंगे.

पूर्व मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) प्रमुख जयंत चौधरी के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह कहा. रालोद, सपा के साथ गठबंधन कर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ रहा है.

विधानसभा चुनाव से पहले, भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं से संपर्क साध रही है. इस क्षेत्र से समुदाय के सदस्यों ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर साल भर चले प्रदर्शन में हिस्सा लिया था.

भाजपा नेताओं ने रालोद प्रमुख से भाजपा से हाथ मिलाने को भी कहा था. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को दिल्ली में जाट नेताओं के साथ एक बैठक की थी.

जयंत ने कहा कि सपा के साथ उनकी पार्टी का गठबंधन बहुत मजबूत है और किसानों के हितों के लिए काम करने का लक्ष्य रखता है.

अखिलेश ने कहा, ‘भाजपा ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन वह किसान विरोधी तीन कानून ले आई. किसानों ने सरकार को इन कानूनो को वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया. भाजपा ने वोट की खातिर इन कानूनों को वापस लिया. भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो कोई चीज कहे बगैर कानून ले आती है.’

पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि सत्ता में आने पर उनकी पार्टी राज्य में इस तरह का कोई कानून लागू नहीं करेगी.

उन्होंने कहा कि जयंत, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और दिवंगत किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत द्वारा किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों की पैरोकारी को आगे बढ़ा रहे हैं.

जयंत ने कहा कि पहले लोगों को संदेह था कि क्या दोनों दलों के बीच गठबंधन होगा.

उन्होंने अपने दादा चौधरी चरण सिंह को याद करते हुए कहा, ‘हमारा मेल काफी पहले हो गया था. हम प्रदेश का विकास करना चाहते हैं और गठबंधन किया क्योंकि हम चौधरी चरण सिंह की लड़ाई को आगे ले जाना चाहते हैं.’

जयंत ने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए न्योते के बारे में कहा कि उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया है.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, जयंत ने कहा, ‘मैंने उनके न्योते को गंभीरता से नहीं लिया है. पश्चिमी यूपी केवल जाटों का नहीं है. वे और विभाजन पैदा करना चाह रहे हैं. वो असली मुद्दों के बारे में बात नहीं करते हैं, लेकिन 80-20 प्रतिशत, जिन्ना, औरंगजेब करते हैं. हम निर्णय ले चुके हैं और इसी पर कायम रहेंगे.’

अखिलेश संवाददाता सम्मेलन के लिए मुजफ्फरनगर देर से पहुंचे. उन्होंने इससे पहले दिन में दावा किया था कि वह दिल्ली में फंस गए थे क्योंकि उनके हेलीकॉप्टर को उड़ने की अनुमति नहीं दी गई.

उन्होंने एक ट्वीट में पृष्ठभूमि में एक हेलीकॉप्टर के साथ अपनी तस्वीर साझा की. उन्होंने ट्वीट में कहा, ‘मेरे हेलीकॉप्टर को अभी भी बिना किसी कारण बताए दिल्ली में रोककर रखा गया है और मुजफ्फरनगर नहीं जाने दिया जा रहा है. जबकि भाजपा के एक शीर्ष नेता अभी यहां से रवाना हुए हैं. हारती हुई भाजपा की ये हताशा भरी साज़िश है. जनता सब समझ रही है.’

अखिलेश यादव पाकिस्तान के समर्थक, जिन्ना के उपासक: योगी आदित्यनाथ

इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्हें पाकिस्तान का समर्थक और ‘जिन्ना का उपासक’ करार दिया.

योगी ने किसी का नाम लिए बिना एक ट्वीट में कहा ‘वे ‘जिन्ना’ के उपासक हैं, हम ‘सरदार पटेल’ के पुजारी हैं. उनको पाकिस्तान प्‍यारा है, हम मां भारती पर जान न्योछावर करते हैं.’

मुख्यमंत्री का इशारा सपा प्रमुख के पाकिस्तान संबंधी बयान और उस टिप्पणी की ओर था जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल मोहम्मद अली जिन्ना की सराहना करते हुए कहा था कि उन्होंने आजादी की लड़ाई में योगदान दिया था.

गौरतलब है कि सपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक अखबार को दिए गए साक्षात्कार में कहा था कि भारत का असल दुश्मन चीन है, पाकिस्तान तो राजनीतिक दुश्मन है और भाजपा वोट बैंक की राजनीति के लिए सिर्फ पाकिस्तान पर ही निशाना साधती है.

इस मुद्दे पर एक दिन पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अखिलेश पर निशाना साधते हुए एक ट्वीट में कहा था, ‘उत्तर प्रदेश के चुनाव में पाकिस्तान के निर्माता जिन्ना का नाम क्‍यों लिया जा रहा है. अगर राजनीति करनी है तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में जिन्ना का नाम नहीं लिया जाना चाहिए, बल्कि किसानों के गन्ना का नाम लिया जाना चाहिए.’

भाजपा ने जारी की 91 उम्मीदवारों की एक और सूची

भाजपा ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के लिए 91 उम्मीदवारों की एक और सूची जारी की. इस सूची में पार्टी के राज्य सरकार के मंत्रियों राजेंद्र प्रताप सिंह मोती, रमापति शास्‍त्री, सिद्धार्थ नाथ सिंह, जय प्रताप सिंह, उपेंद्र तिवारी, नंदकुमार गुप्ता नंदी, सूर्य प्रताप शाही समेत 13 मंत्रियों को उम्मीदवार घोषित किया गया है.

हालांकि, सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को इस बार पार्टी ने मौका नहीं दिया है. भाजपा ने 91 उम्मीदवारों की इस सूची में लगभग 20 विधायकों का टिकट काटा है. इस बार बहराइच की कैसरगंज विधानसभा सीट से मुकुट बिहारी वर्मा की जगह उनके पुत्र गौरव वर्मा पार्टी के प्रत्याशी घोषित किए गए हैं.

अयोध्या जिले के बीकापुर क्षेत्र में विधायक शोभा देवी की जगह इस बार पार्टी ने उनके बेटे डॉक्टर अमित सिंह चौहान को मौका दिया है.

अयोध्‍या विधानसभा क्षेत्र से पार्टी ने एक बार फ‍िर वेदप्रकाश गुप्ता पर भरोसा जताया है जो 2017 में भाजपा के टिकट पर इस क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे.

पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक सूची के मुताबिक, मोती सिंह प्रतापगढ़ जिले की पट्टी, सिद्धार्थनाथ सिंह इलाहाबाद पश्चिम से, रमापति शास्‍त्री गोंडा जिले की मनकापुर (अनुसूचित जाति), जयप्रताप सिद्धार्थनगर की बांसी, सतीश द्विवेदी-इटवा, उपेंद्र तिवारी बलिया जिले के फेफना, नंदी इलाहाबाद दक्षिण, शाही पथरदेवा, सुरेश पासी जगदीशपुर (अजा), पल्‍टू राम बलरामपुर (अजा), जयप्रकाश निषाद देवरिया के रुद्रपुर और गिरीश चंद्र यादव-जौनपुर से चुनावी मैदान में उतरेंगे.

पिछली बार संतकबीरनगर के धनघटा से चुनाव जीतने वाले राज्य मंत्री श्रीराम चौहान को इस बार गोरखपुर जिले की खजनी विधानसभा सीट से पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी को पार्टी ने देवरिया से उम्मीदवार बनाया है. पिछले दिनों भाजपा में शामिल हुए समाजवादी पार्टी के विधायक सुभाष राय को अंबेडकरनगर जिले की जलालपुर सीट से टिकट दिया गया है.

इसी प्रकार कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राकेश सचान को भोगनीपुर से उम्मीदवार बनाया गया है.

इसके साथ ही भाजपा ने 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अब तक 294 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है. भाजपा उत्तर प्रदेश में अपना दल-एस और निषाद पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है.

बहुजन समाज पार्टी ने चौथे चरण के चुनाव के लिए 53 उम्मीदवारों की घोषणा की

बसपा ने उत्तर प्रदेश में चौथे चरण के विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को 53 उम्मीदवारों की घोषणा की. चौथे चरण में नौ जिलों की 59 सीटों पर 23 फरवरी को मतदान होगा.

शुक्रवार को बसपा प्रमुख मायावती ने चौथे चरण के 53 उम्मीदवारों की सूची ट्विटर पर साझा की.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जिस प्रकार धर्म व जाति की राजनीति हावी है व मीडिया में भी ऐसी खबरें भरी पड़ी रहती हैं, उससे ऐसा लगता है कि यह सब सपा व भाजपा की अंदरूनी मिलीभगत के तहत ही हो रहा है और वे चुनाव को हिंदू-मुस्लिम व जातीय नफरती रंग देना चाहती हैं. जनता सतर्क रहे.’

बसपा की इस सूची में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, लखनऊ, रायबरेली, बांदा और फतेहपुर के उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं. बसपा ने अपनी सूची में दलितों, पिछड़ों और अगड़ों के साथ ही अल्पसंख्यकों का भी संतुलन बनाया है.

जारी सूची के मुताबिक पीलीभीत के बीसलपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मंत्री अनीस खां उर्फ फूल बाबू को उम्मीदवार बनाया गया है जबकि लखीमपुर खीरी जिले की निघासन सीट पर बसपा ने मनमोहन मौर्य को मौका दिया है.

पिछले वर्ष तीन अक्टूबर को निघासन क्षेत्र में किसान आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा में चार किसानों और एक पत्रकार समेत आठ लोग मारे गए थे. इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा और उसके सहयोगियों को आरोपी बनाया गया जो इस समय जेल में निरुद्ध हैं.

बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस मामले में किसानों के पक्ष में बोलते हुए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को कटघरे में खड़ा किया था.

बसपा की सूची में लखनऊ जिले की सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवार घोषित किए गए हैं जिनमें चार उम्मीदवार मुस्लिम हैं.

लखनऊ की मलिहाबाद सुरक्षित सीट से जगदीश रावत, बख्शी का तालाब से सलाउद्दीन सिद्दीकी, सरोजनीनगर से मोहम्‍मद जलीस खां, लखनऊ पश्चिम से मोहम्मद कायम रजा खान, लखनऊ उत्तरी से मोहम्मद सरवर मलिक, लखनऊ पूर्वी से आशीष कुमार सिन्‍हा, लखनऊ मध्य से आशीष चंद्र श्रीवास्तव, लखनऊ कैंट से अनिल पांडेय और मोहनलालगंज सुरक्षित से देवेंद्र कुमार सरोज को उम्मीदवार बनाया गया है.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली जिले में बसपा ने पांच विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. इस जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं.

उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा क्षेत्र हैं. चुनाव की शुरुआत 10 फरवरी को राज्य के पश्चिमी हिस्से के 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदान के साथ होगी. दूसरे चरण में 14 फरवरी को राज्य की 55 सीटों पर मतदान होगा.

20 फरवरी को तीसरे चरण में 59 सीटों पर, 23 फरवरी को चौथे चरण में 59 सीटों पर, 27 फरवरी को पांचवें चरण में 61 सीटों पर, तीन मार्च को छठे चरण में 57 सीटों पर और सात मार्च को सातवें चरण में 54 सीटों पर मतदान होगा.


पंजाब विधानसभा चुनाव


भगवंत मान को कॉमेडियन के तौर पर देखता हूं, गंभीर राजनेता के रूप में नहीं: धुरी से कांग्रेस उम्मीदवार

पंजाब की धुरी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार एवं मौजूदा विधायक दलवीर सिंह गोल्डी ने आम आदमी पार्टी (आप) के मुख्यमंत्री पद के चेहरे भगवंत मान को विकास कार्यों के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती देते हुए दावा किया कि लोगों से कहने के लिए मान के पास कुछ नहीं है.

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने धुरी सीट से संगरूर के पूर्व विधायक प्रकाश चंद गर्ग को मैदान में उतारा है.

धुरी, संगरूर संसदीय सीट के विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. मान संगरूर से दो बार के सांसद हैं. वहीं, गोल्डी (40) पिछले पांच वर्ष में धुरी निर्वाचन क्षेत्र में किए गए कई विकास कार्यों पर आश्रित हैं.

गोल्डी ने कहा, ‘हमने निर्वाचन क्षेत्र में कई विकास कार्य किए हैं और मैं पिछले पांच साल से क्षेत्र के लोगों की सेवा कर रहा हूं.’

गोल्डी छात्र राजनीति में सक्रिय रहे हैं और 2005-06 में ‘पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट काउंसिल’ के अध्यक्ष थे.

धुरी में मान से मुकाबले के सवाल पर गोल्डी ने कहा, ‘मैं उन्हें एक कॉमेडियन के तौर पर देखता हूं, एक गंभीर राजनेता के रूप में नहीं.’

गोल्डी ने कहा कि मान अपने भाषणों के दौरान लोगों को ‘मूर्ख’ बनाने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार का बखान कर रहे हैं.

‘आप’ ने एक सर्वेक्षण करने के बाद मान को पंजाब में अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था. गोल्डी ने कहा, ‘मान ने पंजाब के लिए किसी योजना की कभी कोई बात नहीं की.’

उनका इशारा घटते भूमिगत जल स्तर की ओर था, क्योंकि धुरी ‘डार्क जोन’ में आता है, जिसके बारे में ‘आप’ उम्मीदवार ने कभी बात नहीं की है.

कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार ने कहा, ‘मान ने कभी खेल, शिक्षा और स्वास्थ्य प्रणाली के बारे में भी कोई बात नहीं की. मुझे नहीं लगता कि वह धुरी निर्वाचन क्षेत्र को लेकर गंभीर हैं. अगर वह हैं, तो उन्हें सांसद पद से इस्तीफा देकर धुरी से चुनाव लड़ना चाहिए.’

गोल्डी ने कहा कि अगर उन्होंने राज्य के लोगों के लिए कुछ किया होता, तो उन्हें पंजाब के लोगों को ‘दिल्ली मॉडल’ के बारे में बताने की जरूरत नहीं पड़ती.

गोल्डी ने कहा कि मान को 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव के अलावा धुरी में कभी नहीं देखा गया. एक सांसद होने के नाते वह धुरी के लोगों के लिए कुछ कर सकते थे.

गोल्डी ने मान को इस निर्वाचन क्षेत्र के लिए किए गए किसी भी विकास कार्य का लेखा-जोखा देने के लिए उनके साथ एक खुली बहस करने की चुनौती दी.

उन्होंने कहा, ‘मैं उन्हें खुली बहस की चुनौती देता हूं. वह अपने पांच सर्वश्रेष्ठ विकास कार्य बताएं और मैं भी अपने पांच सर्वश्रेष्ठ विकास कार्य बताऊंगा.’’

कांग्रेस उम्मीदवार अपने निर्वाचन क्षेत्र में ‘धुरी मेरी मिट्टी, धुरी मेरा परिवार’ चुनाव अभियान चला रहे हैं और घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं. उनका कहना है कि वह धुरी से ताल्लुक रखते हैं, जबकि ‘आप’ और शिअद के उम्मीदवार ‘बाहरी’ हैं.

गोल्डी ने 2017 विधानभा चुनाव में ‘आप’ उम्मीदवार जसवीर सिंह को 2,811 मतों से मात देकर, जीत दर्ज की थी. धुरी मुख्य रूप से एक ग्रामीण क्षेत्र है, जिसमें 74 गांव शामिल हैं. यहां 77,000 महिलाओं सहित 1.63 लाख मतदाता हैं.


गोवा विधानसभा चुनाव


चार विधानसभा सीटों पर नेताओं की बगावत भाजपा के लिए मुसीबत बनी

गोवा विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने ज्यादातर स्थानों पर असंतुष्ट नेताओं को काबू में करने में सफलता पाई है लेकिन पणजी समेत चार सीटें पार्टी के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं.

पणजी में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिवंगत कद्दावर नेता मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर, सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवार अतानासियो मोंसेरेट के विरुद्ध निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े हैं.

मोंसेरेट 2019 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे. उत्पल ने दावा किया है कि उनके मन में भाजपा ही है लेकिन वह इसलिए चुनाव लड़ रहे हैं ताकि कोई गलत व्यक्ति उस सीट से न जीत जाए जिसका प्रतिनिधित्व उनके (उत्पल) पिता कर चुके हैं. उन्होंने संभवतः मोंसेरेट के खिलाफ दर्ज गंभीर मामलों की ओर इशारा किया.

मांड्रेम में लक्ष्मीकांत पारसेकर ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है जो पार्टी की घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष थे. अब वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दयानन्द सोपते के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं जिन्होंने उन्हें कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में 2017 में शिकस्त दी थी.

संगुएम सीट पर सावित्री कवलेकर ने बगावत कर दी है और अब वह भाजपा के उम्मीदवार सुभाष फलदेसाई के विरुद्ध लड़ रही हैं. कवलेकर, पूर्व उप मुख्यमंत्री चंद्रकांत कवलेकर की पत्नी हैं और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आई थीं.

कंभरजुआ सीट पर भाजपा को सिद्धेश को शांत रखने में सफलता मिली है जो केंद्रीय मंत्री श्रीपद नाइक के बेटे हैं. टिकट न मिलने से नाराज सिद्धेश ने निर्दलीय लड़ने का फैसला किया था.

हालांकि, वर्तमान विधायक पांडुरंग मडकईकर की पत्नी और भाजपा प्रत्याशी जैनिता मडकईकर को पूर्व सहयोगी रोहन हरमलकर के खिलाफ लड़ना होगा जो कंभरजुआ से निर्दलीय उम्मीदवार हैं.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रतापसिंह राणे मैदान से हटे

गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रतापसिंह राणे ने खुद को चुनावी दौड़ से हटा लिया है. कांग्रेस ने राज्य में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राणे को उनकी पारपंरिक सीट पोरियम से टिकट दिया था. चुनाव न लड़ने का उनका फैसला कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

इस संबंध में राणे की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी. हालांकि, कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने इस बात की पुष्टि की कि पूर्व मुख्यमंत्री ने पार्टी को चुनाव न लड़ने के अपने फैसले से अवगत कराया है.

राणे के करीबी सूत्रों ने  समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी पुत्रवधू देविया राणे से सीधा मुकाबला टालने के लिए चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. देविया राणे, पोरियम से बतौर भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर रही हैं.

छह बार गोवा के मुख्यमंत्री रह चुके 87 वर्षीय राणे लगातार 11 मर्तबा पोरियम से विधायक चुने जा चुके हैं.

कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘प्रतापसिंह राणे ने पार्टी को सूचित किया है कि वह पोरियम से चुनाव नहीं लड़ेंगे. इसके बाद कांग्रेस ने उनके स्थान पर अन्य प्रत्याशी का चयन कर लिया है.’

भाजपा ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे की पत्नी देविया राणे को पोरियम से उम्मीदवार बनाया है. चर्चा थी कि प्रतापसिंह राणे पोरियम से उम्मीदवारी के लिए कांग्रेस को अपनी पत्नी विजया देवी का नाम सुझा सकते हैं.

हालांकि, गुरुवार को पार्टी की ओर से जारी संशोधित सूची में रणजीत राणे को पोरियम से कांग्रेस उम्मीदवार घोषित कर दिया गया. खबरों के मुताबिक, देविया राणे के नाम का ऐलान करने से पहले भाजपा ने प्रतापसिंह राणे को पोरियम से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए राजी करने की कोशिश की थी.

गोवा में प्रमोद सावंत के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने बतौर विधायक 50 साल पूरे करने पर प्रतापसिंह राणे को आजीवन कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया था.

राणे 1972 में महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (एमजीपी) के टिकट पर पोरियम से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे. इसके बाद 2017 तक के सभी विधानसभा चुनाव उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लड़े. उनकी पुत्रवधू देविया राणे पहली बार गोवा विधानसभा चुनाव लड़ेंगी.

भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए हिंदुओं को ‘कठपुतली’ के रूप में इस्तेमाल कर रही: टीएमसी नेता

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उपाध्यक्ष पवन वर्मा ने गुरुवार को कहा कि उनकी पार्टी ‘असली हिंदुत्व’ के लिए खड़ी है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ‘अल्पकालिक राजनीतिक लाभ पाने के लिए हिंदुओं का कठपुतली’ के रूप में इस्तेमाल करती है.

वर्मा ने यहां पत्रकारों से कहा कि लोगों को बांटने के लिए धर्म का इस्तेमाल करना ‘गोवा, गोवावासियों और गोवापन’ का अपमान है.

वर्मा ने आरोप लगाया, ‘मैं आपको संक्षेप में बताना चाहता हूं कि टीएमसी ‘वास्तविक हिंदुत्व’ के लिए खड़ी है, जो समावेशिता, सहिष्णुता, बहुलवाद, मिलनसारिता और विविधता के पक्ष में है. दुर्भाग्य से भाजपा का हिंदुत्व विकृत रूप में है और वह नफरत, कट्टरता, बहिष्कार, विभाजन और हिंसा के लिए धर्म का इस्तेमाल करने का प्रयास करती है.’

वर्मा ने कहा कि टीएमसी संविधान के तहत सभी धर्मों के सम्मान के लिए खड़ी है और यह सम्मान भारत की विरासत है.

उन्होंने कहा, ‘जब टीएमसी जैसी राजनीतिक पार्टी कहती है कि वह वास्तविक हिंदुत्व के लिए खड़ी है, तो अर्थ यह है कि वह सद्भाव, समावेशिता, शांति और सामाजिक स्थिरता के लिए सभी धर्मों का सम्मान करने को लेकर प्रतिबद्ध है.’

वर्मा ने कहा कि टीएमसी की संस्थापक और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विचार है कि चुने हुए प्रतिनिधियों को लोगों के हित के लिए काम करना चाहिए, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो.

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी का मतदान प्रतिशत पिछले विधानसभा चुनाव में 44 प्रतिशत से बढ़कर 49 प्रतिशत हो गया क्योंकि सभी धर्मों के लोगों ने पार्टी को वोट दिया था.

गोवा में विधानसभा चुनाव 14 फरवरी को होगा और मतगणना 10 मार्च को होगी.


मणिपुर विधानसभा चुनाव


कांग्रेस ने पांच अन्य दलों के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया

कांग्रेस ने मणिपुर में सत्तारूढ़  भाजपा से मुकाबला करने के लिए पांच अन्य राजनीतिक दलों के साथ मिलकर चुनाव पूर्व गठबंधन बनाया है. इस गठबंधन के नाम और न्यूनतम साझा कार्यक्रम की घोषणा जल्द ही की जाएगी.

मणिपुर प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष एन. लोकेन ने गुरुवार को संवाददाताओं को बताया कि कांग्रेस भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, जनता दल (सेक्यूलर) और फॉरवर्ड ब्लॉक के साथ मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर काम करेगी.

उन्होंने कहा कि भाजपा को हराने के लिए पार्टियों ने एक साझा लक्ष्य के साथ हाथ मिलाया है.

कांग्रेस विधायक दल के नेता ओ. इबोबी ने कांग्रेस भवन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि गठबंधन ने काकचिंग सीट को छोड़कर शेष 59 विधानसभा सीटों पर साझा उम्मीदवारों को खड़ा करने का फैसला किया है.

भाजपा ने मणिपुर चुनाव से पहले संभावित उम्मीदवारों के साथ सहयोग के समझौते पर हस्ताक्षर किया

उधर भारतीय जनता पार्टी ने आगामी मणिपुर विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाए जा सकने वाले पार्टी के कई सदस्यों के साथ एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

पार्टी ने चुनाव से पहले उनके पाला बदलने को रोकने की कोशिश के तहत यह कदम उठाया है. सूत्रों ने बताया कि पार्टी के इन सदस्यों में वे लोग शामिल हैं, जिन्हें इंफाल पश्चिम जिले की केसामथोंग सीट और काकचिंग जिले की सुगनु सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है.

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता सी. विजय ने बताया, ‘पार्टी ने मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की उपस्थिति में कई संभावित उम्मीदवारों के साथ सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं ताकि वे (संभावित उम्मीदवार) बदलते राजनीतिक परिदृश्य में अपना पाला नहीं बदल सकें.’

भगवा पार्टी चुनाव में उम्मीदवार बनाए जा सकने वाले पार्टी के सदस्यों के बीच सहयोग सुनिश्चित करने के लिए बैठकें आयोजित कर रही है.

मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरणों में, 27 फरवरी और तीन मार्च को चुनाव होना है, जबकि मतगणना 10 मार्च को होगी.

उल्लेखनीय है कि चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा के तीन मंत्रियों ने हाल में पार्टी छोड़ दी. भाजपा द्वारा मणिपुर विधानसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची की घोषणा करना अभी बाकी है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)