राजनीति

मतदाता किसानों की बात करने वालों का पक्ष लेंगे; हिंदू-मुस्लिम करने वालों का नहीं: टिकैत

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: यूपी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि क़ानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में ‘झूठ’ बोलते हुए अखिलेश को लाज नहीं आती है. अखिलेश का ​कहना है कि चुनाव नतीजे चौंकाने वाले नहीं होंगे, असली झटका गुजरात में मिलेगा. भाजपा से निष्कासित होने पर कांग्रेस गए हरक सिंह रावत दो दशकों में पहली बार चुनाव न​हीं लड़ सकेंगे. गोवा में कांग्रेस और जीएफपी ने टीएमसी-आईपैक पर मतदाताओं की निजी जानकारियां एकत्र करने का आरोप लगाया.

राकेश टिकैट. (फोटो: पीटीआई)

लखनऊ/देहरादून/चंडीगढ़/पणजी: केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में शामिल रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश सिंह टिकैत ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मतदाता केवल उन्हीं का पक्ष लेंगे, जो किसानों के कल्याण की बात करते हैं और वे मोहम्‍मद अली जिन्ना एवं पाकिस्तान का नाम लेकर धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करने वालों का भला नहीं करेंगे.

टिकैत ने लखनऊ में समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा को दिए साक्षात्कार में कहा कि यूपी में किसान संकट से गुजर रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपनी उपज का कम मूल्य मिल रहा है और उन्हें अत्यधिक बिजली बिल का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

यूपी विधानसभा चुनाव में प्रभावी मुद्दों के सवाल पर टिकैत ने कहा, ‘किसानों, बेरोजगारों, युवाओं और मध्‍यम वर्ग के लिए महंगाई समेत तमाम मुद्दे हैं, लेकिन जिन्ना और पाकिस्तान पर नियमित बयानों के माध्‍यम से हिंदू-मुसलमानों के बीच ध्रुवीकरण की भावना भड़काने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ऐसा करने वालों का प्रयास सफल नहीं होगा, बल्कि यह उन्हें नुकसान पहुंचाएगा.’

टिकैत ने हालांकि किसी व्यक्ति और पार्टी का नाम नहीं लिया.

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा और इसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्हें पाकिस्तान का समर्थक और ‘जिन्ना का उपासक’ बताया था.

यह पूछे जाने पर कि क्या वह चुनाव में भाजपा के खिलाफ प्रचार करेंगे, टिकैत ने कहा, ‘हमारी ऐसी कोई योजना नहीं है. मैं राजनेता नहीं हूं, मैं राजनीतिक दलों से दूर रहता हूं. मैं केवल किसानों के मुद्दों के बारे में बात करता हूं और लोगों से अपने नेताओं से सवाल करने का आग्रह करता हूं. मैं किसानों के मुद्दे उठाता रहूंगा.’

उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में किसान संकट के दौर से गुजर रहे हैं. यहां के किसानों को उनकी उपज का कम मूल्य मिलता है और उन्हें बिजली की अत्यधिक दरों का भुगतान करने के लिए भी मजबूर होना पड़ता है.’

यह पूछे जाने पर कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव किस दिशा में जा रहा है, टिकैत ने कहा, ‘मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता कि चुनाव कहां जा रहा है या कौन सी पार्टी विजयी होगी. हालांकि, मैं जिन किसानों से मिलता हूं, वे वर्तमान स्थिति से खुश नहीं हैं.’

उन्होंने कहा, ‘उनके (किसानों) बच्चों के पास रोजगार का कोई रास्ता नहीं है. मुझे लगता है कि किसान और स्थानीय लोग जब मतदान के लिए जाएंगे तो वे इन बातों का ध्यान रखेंगे.’

कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में ‘झूठ’ बोलते हुए अखिलेश को लाज नहीं आती: शाह

मुजफ्फरनगर/गाजियाबाद: विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे विभिन्न दलों के नेताओं ने एक दूसरे को निशाने पर लेने की प्रक्रिया तेज कर दी है. उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला होने की बात कही जा रही ​है.

अमित शाह और अखिलेश यादव. (फोटो: पीटीआई)

विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सपा के नेता भाजपा और उसके नेताओं पर तीखा हमला बोल रहे हैं तो भाजपा के नेता भी सपा नेताओं को जोरदार तरीके से टक्कर देते नजर आ रहे हैं.

केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह शनिवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के प्रचार अभियान के तहत मुजफ्फरनगर के दौरे पर थे. इस दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज करते हुए शाह ने कहा कि उन्हें (अखिलेश) उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में ‘झूठ’ बोलते हुए ‘लाज’ (शर्म) भी नहीं आती है, जबकि हकीकत यह है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अपने कार्यकाल में फले-फूले अपराधियों और माफियाओं को खदेड़ दिया है.

दूसरी ओर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य में सरकार बनाने का भरोसा जताते हुए शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजे चौंकाने वाले नहीं होंगे और दावा किया कि इस साल के अंत में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव में ‘असली आश्चर्य’ होगा.

मुजफ्फरनगर में ‘प्रभावी मतदाता संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए  शाह ने किसानों से वादा किया कि भाजपा अपने घोषणा पत्र में लाने वाली है कि अगर गन्ने के भुगतान में देरी हुई तो किसानों को सूद समेत पैसा मिलेगा और यह मिल मालिकों से वसूला जाएगा.

उन्होंने अखिलेश और जयंत चौधरी की एकजुटता का उपहास उड़ाया और कहा, ‘आजकल अखिलेश यादव और जयंत साथ-साथ दिख रहे हैं, लेकिन यह सिर्फ वोटिंग तक का साथ है, अगर गलती से भी इनकी सरकार बन गई तो जयंत चौधरी जी फिर कहीं नहीं दिखेंगे, तब फिर से आजम खान और अतीक अहमद सामने आ जाएंगे.’

उन्होंने कहा कि यह इनके (अखिलेश के) टिकट बांटने से ही सबको साफ-साफ समझ आ गया है.

लोकतंत्र में वोट की शक्ति के महत्व को समझाने के लिए कबीरदास का दोहा उद्धृत किया, ‘कबीरा लोहा एक है, गढ़ने में है फेर, ताहि का बख्तर बने, ताहि की शमशेर.’ दोहे के माध्यम से उन्होंने साफ किया कि मतदाता का एक वोट माफिया राज से मुक्ति भी दिला सकता है और माफिया राज वापस भी ला सकता है.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील करते हुए शाह ने दिवंगत जाट नेताओं पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह तथा किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत का जिक्र किया और पूछा कि क्या कोई यहां के दंगों को भूल सकता है, जिनमें पीड़ितों को ही आरोपी बनाया गया था.

शाह ने समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान हुए मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र किया और आरोप लगाया कि इन दंगों में वोट बैंक के लिए अखिलेश सरकार ने आरोपियों को पीड़ित बना दिया और पीड़ितों को आरोपी. पुलिस ने एक खास वोट बैंक के लिए पीड़ितों को आरोपी बनाया और और हजारों फर्जी मामले दर्ज किए गए.

उन्होंने कहा, ‘मैं भाजपा संगठन को बधाई देता हूं जिसने संजीव बालियान के नेतृत्व में अदालतों और सड़कों पर न्याय की लड़ाई लड़ी.’ शाह ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘मैं मुजफ्फरनगर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों से पूछना चाहता हूं कि क्या वे दंगों को भूल गए हैं.’’

उन्होंने 300 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य देते हुए कहा, ‘यही मुजफ्फरनगर है जो यूपी में भाजपा की प्रचंड जीत की नींव रखता है और यहां से जो लहर उठती है वह काशी तक जाती है और हमारे विरोधियों का सूपड़ा साफ कर देती है, इस बार भी यही होने वाला है.’

शाह ने कहा कि अगर चूक हुई तो दंगा भड़काने वाले लोग फ‍िर से लखनऊ में सत्ता में बैठेंगे और अगर जनता चाहती है कि कोई दंगा न हो तो पूर्ण बहुमत की भाजपा की सरकार बनाएं.

मुजफ्फरनगर में 2013 में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी.

मुजफ्फरनगर समेत पश्चिमी यूपी के 58 विधानसभा क्षेत्रों में 10 फरवरी को पहले चरण का मतदान होगा. सपा-रालोद गठबंधन पर शाह ने कहा, ‘अखिलेश जी ने कल (शुक्रवार) टिप्पणी की थी कि वह और जयंत चौधरी ‘साथ-साथ’ हैं, लेकिन कब तक?’

उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में गुंडे, माफियाओं ने प्रदेश को अपने कब्जे में ले रखा था, हर तरफ लोग असुरक्षित थे, लेकिन जब से भाजपा की सरकार बनी प्रदेश के सारे गुंडे और माफिया ‘बाउंड्री’ पार चले गए हैं.

उन्‍होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कह‍ा कि जब बसपा की सरकार थी तो एक जाति की बात होती थी, कांग्रेस परिवार की बात करती थी और सपा गुंडों माफियाओं की बात करती है. शाह ने कहा कि अब प्रदेश में सबका साथ और सबका विकास है और हर कोई सुरक्षित है.

कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार पर हमला करने के लिए अखिलेश की विशेष रूप से आलोचना करते हुए शाह ने कहा, ‘उन्हें लाज नहीं आती है और वह इस तरह से झूठ बोलते हैं कि इसे सच के रूप में लिया जा सकता है.’

शाह ने सवाल उठाया कि ‘क्या सपा, बसपा और कांग्रेस देश और राज्यों को सुरक्षित रख सकते हैं?’ उन्होंने कहा कि यह केवल नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ही कर सकती है.

अखिलेश का दावा- चुनाव नतीजे चौंकाने वाले नहीं होंगे, असली झटका गुजरात में मिलेगा  

दूसरी ओर सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य में सरकार बनाने का भरोसा जताते हुए शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजे चौंकाने वाले नहीं होंगे और दावा किया कि इस साल के अंत में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव में ‘असली आश्चर्य’ होगा.

उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के लोगों ने पहले ही अपने फैसला दे दिया है और भाजपा ‘बेचैन’ है.

यादव ने भाजपा को हराने का ‘अन्न संकल्प’ लेने के बाद राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख जयंत चौधरी के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हारने वाला पहलवान कई बार दांत काटता है या खींचता है. ये लोग (भाजपा) पहले ही हार चुके हैं.’

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के हत्यारों का सम्मान करने वालों को मतदाता सबक सिखाएंगे और उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम राज्य में खुशियां लेकर आएंगे.

उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश के लोगों ने अपना फैसला दे दिया है. यहां कोई हैरानी नहीं होने वाली है. किसान, युवा व्यापारी, सभी वर्गों के लोगों ने मन बना लिया है कि समाजवादी पार्टी गठबंधन में सरकार बनाने जा रही है.’

सपा अध्यक्ष ने दावा किया, ‘असली चौंकाने वाले नतीजे गुजरात से आएंगे जहां उत्तर प्रदेश के बाद चुनाव होने हैं.’

सरकार द्वारा तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के बारे में पूछे जाने पर यादव ने जानना चाहा कि भाजपा ने किसानों को ‘अपमानित’ क्यों किया.

उन्होंने पूछा, ‘किसान कैसे भूल सकते हैं कि भाजपा ने देश के अन्नदाता का अपमान किया है?’

यादव ने कहा, ‘आज मुझे खुशी है कि जयंत चौधरी जी मेरे साथ हैं और हम दोनों मिलकर किसानों के लिए लड़ने का काम कर रहे हैं.’

सपा अध्यक्ष ने कहा कि मतदाता जानते हैं कि चौधरी चरण सिंह जी ने किसानों की समृद्धि के लिए लड़ाई लड़ी. उन्होंने कहा कि यहां के किसानों के लिए लड़ने वाले सभी लोगों के पास चौधरी चरण सिंह जी की विरासत को बचाने और आगे बढ़ाने का मौका है और यह चुनाव भी इसी के लिए है.

सपा ने विकास नहीं, सिर्फ विनाश का मॉडल अपनाया: योगी

बागपत: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को पूर्ववर्ती सपा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने विकास नहीं, सिर्फ विनाश का मॉडल अपनाया.

योगी आदित्यनाथ. (फोटो: पीटीआई)

योगी ने शनिवार को बागपत में ‘प्रभावी मतदाता संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘सपा ने विकास नहीं, सिर्फ विनाश का मॉडल अपनाया. उनके राज में विकास सिर्फ कब्रिस्तान में दिखता था. कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल के अलावा कुछ नहीं होता था.’

उन्होंने कहा, ‘पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश से व्यापारियों का पलायन होता था, आज पलायन नहीं होता, बल्कि प्रगति होती है.’ योगी ने यह भी कहा, ‘सरकार बनने पर वे (सपाई) अपना बंगला बनाते थे और हम गरीबों के घर बनाते हैं.’

राज्‍य की मुख्‍य विपक्षी सपा पर तंज कसते हुए योगी ने कहा, ‘सपा तमंचों की फैक्ट्री लगाती है, हम डिफेंस कॉरिडोर बनवा रहें हैं, हम भव्य राम मंदिर बनवा रहे हैं.’

धार्मिक आस्‍था पर केंद्रित अपने वक्‍तव्‍य में योगी ने दावा किया, ‘अब परिवर्तन आया है, अब अयोध्या में दीपोत्सव व ब्रज में रंगोत्सव होता है. पहले सैफई में महोत्सव होता था.’

उन्होंने मतदाताओं के साथ संवाद कार्यक्रम के अलावा बड़ौत विधानसभा क्षेत्र में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, डॉक्टरों, व्यापारियों और किसानों आदि से बातचीत की और कहा कि भाजपा सरकार में एक भी दंगा नहीं हुआ है और माफिया की संपत्ति पर बुलडोजर चलाए गए तथा नुकसान की भरपाई दंगाइयों की संपत्ति से की गई.

पश्चिम बंगाल के ‘खेला होबे’ नारे की तर्ज पर यूपी में सपा का चुनावी गीत ‘खदेड़ा होइबे’

सपा ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ अपने गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने के इरादे से पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के नारे ‘खेला होबे’ की तर्ज पर ‘खदेड़ा होबे’ का नारा दिया, जो अब ‘खदेड़ा होइबे’ के रूप में चुनावी जिंगल (गीत) बन गया है.

(फोटो: पीटीआई)

पूर्वांचल क्षेत्र में प्रचलित स्थानीय (भोजपुरी) बोली पर आधारित गीत ‘खदेड़ा होइबे’ सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है. सपा गठबंधन के राजनीतिक कार्यक्रमों में भी यह गीत गाया जा रहा है.

सपा के विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा ने कहा, ‘खदेड़ा होइबे का नारा समाज के विभिन्न वर्गों और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एकजुट कर रहा है. बंगाल (विधानसभा चुनाव) का नारा उत्तर प्रदेश में काफी गूंज रहा है और संयोग से ममता बनर्जी उत्तर प्रदेश के चुनाव में समाजवादी पार्टी के लिए समर्थन कर रही हैं.’

‘खेला होबे’ के गीतकार और ‘खेला चालू है’ के गायक देबांग्शु भट्टाचार्य ने से कहा, ‘दोनों जगहों पर राजनीतिक स्थिति और लड़ाई अलग-अलग तरह की है. एक जगह (बंगाल में), सत्ताधारी दल को वापस लाने की मुहिम थी, जबकि दूसरी जगह (उत्तर प्रदेश) के लिए गीत सत्तारूढ़ दल को हटाने के बारे में है.’

‘खेला होबे’ थीम गीत पर अधिक प्रकाश डालते हुए भट्टाचार्य ने कहा, ‘भाजपा के ‘जय श्रीराम’ के नारे का जवाब देने के लिए कुछ प्रभावी लाना था और अगर जय श्रीराम नारे के खिलाफ कुछ बोलते तो भाजपा को यह कहने का मौका मिल जाता कि इन लोगों को राम नाम से समस्या है तो उन्हें ध्रुवीकरण करने में आसानी होती.’

तृणमूल कांग्रेस की युवा इकाई के महासचिव भट्टाचार्य ने कहा कि जब भाजपा कार्यकर्ता जय श्रीराम बोलते थे तो तृणमूल कार्यकर्ता ‘खेला होबे’ से जवाब देते थे और जनता ने इसमें अधिक रुचि दिखाई. उन्होंने भरोसा जताया कि ‘खदेड़ा होइबे’ का चुनावी जिंगल भी भाजपा की धार्मिक ध्रुवीकरण की रणनीति का कड़ा जवाब होगा.

यूपी विधानसभा चुनाव में सपा गठबंधन में शामिल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता अरुण राजभर ने कहा, ‘27 अक्टूबर को मऊ में सपा और सुभासपा ने एक संयुक्त रैली में साथ मिलकर चुनाव लड़ने के लिए हाथ मिलाया और बंगाल में ‘खेला होबे’ की तर्ज पर ‘खदेड़ा होबे’ का नारा दिया. बंगाल में एक ‘खेला’ (खेल) हुआ था, लेकिन यूपी में एक ‘खदेड़ा’ (वापस भेजना) होगा.’

उत्तर प्रदेश से तृणमूल कांग्रेस के नेता व पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी ने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ एकजुट होने के लिए एक नारा चाहिए था और अगर गीत के माध्यम से यह एकजुटता मजबूत होती तो यह अच्छा है.

सपा का चुनावी जिंगल तीन मिनट 29 सेकंड का है जिसमें महंगाई, बेरोजगारी तथा अन्य मुद्दों का जिक्र किया गया है.

सपा प्रत्याशी ने भाजपा पर डुप्लीकेट मत बनाने का आरोप लगाया

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में सपा के प्रत्याशी संजय गर्ग ने सत्तारूढ़ भाजपा पर जिले की सातों विधानसभा में डुप्लीकेट मत बनवाने का आरोप लगाया है.

गर्ग ने 5,165 डुप्लीकेट मतों की एक सूची निर्वाचन अधिकारी को सौपी है और कहा कि इस सूची में एक व्यक्ति के दो से अधिक वोट है.

उन्होंने संबंधित अधिकारियों और क्षेत्र के बीएलओ पर बिना जांच कराए वोट बनाने का भी आरोप लगाया है.

गर्ग ने कहा है कि मतदाता सूची में 250 ऐसे लोगों के नाम ऐसे हैं, जिनका देहांत हो चुका हैं. उनके अनुसार, इस सूची में भाजपा प्रत्याशी की माता का नाम भी शामिल है, जबकि उनका देहांत हो चुका है.

गर्ग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का हवाला देते हुए कहा कि जान-बूझकर फर्जी मतदान करना अपराध है और ऐसा करने वालों के विरूद्ध धारा 171 ए व 171 डी के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है. दोषी पाए जाने पर एक वर्ष के सश्रम कारावास या जुर्माना अथवा दोनों सजा का प्रावधान है.

सपा प्रत्याशी ने कहा कि यदि इसमें अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है तो अधिनियम की धारा 134 के तहत सरकारी अधिकारियों के विरूद्ध भी फर्जी मतदान में सहयोग करने का मामला बनता है.

आजम खान के बेटे, पत्नी ने एक ही सीट से सपा प्रत्याशी के तौर पर दाखिल किया नामांकन

नोएडा: जेल में बंद सपा के नेता आजम खान के बेटे और पत्नी ने पार्टी के उम्मीदवार के रूप में एक ही विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है.

सपा सांसद आजम खान के साथ उनके बेटे मोहम्मद अब्दुल्लाह आजम खान. (फोटो साभार: फेसबुक)

निर्वाचन आयोग (ईसी) की वेबसाइट के मुताबिक मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान और उनकी मां तजीन फातिमा ने रामपुर जिले की स्वार विधानसभा सीट से अपना हलफनामा दाखिल किया है. अब्दुल्ला आजम खान को हाल में ही जेल से रिहा किया गया था.

अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे आजम खान ने बीते 27 जनवरी को रामपुर सीट से विधानसभा चुनाव के लिए जेल में रहते हुए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था.

स्वार सीट से दोहरे नामांकन पर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अब्बास हैदर ने बताया, ‘हमने देखा है कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने रामपुर का विकास करने वाले एक पूर्व मंत्री को बकरी और साइकिल चोरी के तुच्छ मामलों में फंसाया है. वे हमारे उम्मीदवारों के नामांकन में भी हेर-फेर कर सकते हैं और राजनीतिक प्रतिशोध के कारण उनके चुनाव लड़ने पर अडंगा लगा सकते हैं.’

उन्होंने कहा कि सपा चुनावों में उत्तर प्रदेश से भाजपा और उसके ‘जंगल राज’ को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है. सपा के उम्मीदवारों की सूची के मुताबिक, स्वार सीट से मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान उम्मीदवार हैं. उत्तर प्रदेश में सात चरणों में होने वाले चुनाव के दूसरे चरण के दौरान 14 फरवरी को स्वार में मतदान होना है.

जालसाजी और जमीन हड़पने के मामलों सहित कई आरोपों के तहत मामला दर्ज होने के बाद आजम खान, उनकी पत्नी और बेटे ने 2020 में रामपुर की एक अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था. फातिमा को 2020 में जमानत मिल गई, मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान को इस साल जनवरी में लगभग दो साल की जेल की सजा के बाद रिहा कर दिया गया. वहीं आठ बार के विधायक और लोकसभा सदस्य आजम खान अभी भी जेल में हैं.

आजम खान ने 2017 के चुनावों में रामपुर विधानसभा सीट से 47 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त करके जीत हासिल की थी. बाद में वह 2019 में लोकसभा के लिए चुने गए और उपचुनाव में फातिमा रामपुर सीट से विधायक बनीं. उनके बेटे अब्दुल्ला ने 2017 में अपने पहले चुनाव में स्वार विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी.

इटावा में भाजपा पदाधिकारी को बदमाशों ने गोली मारकर घायल किया

इटावा जिले में भाजपा के मंडल स्तरीय एक युवा पदाधिकारी को मोटर साइकिल सवार बदमाशों ने गोली मारकर घायल कर दिया. उन्हें अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है.

इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) जय प्रकाश सिंह ने शनिवार को बताया कि फ्रेंड्स कालोनी थाना क्षेत्र के अन्तर्गत राजमार्ग के ओवरब्रिज के नीचे शुक्रवार की शाम भाजपा युवा मोर्चा के इकदिल मंडल अध्‍यक्ष अमित बरूआ (26) अपनी स्कॉर्पियो के पास खड़े होकर परिचितों बात कर रहे थे तभी बाइक पर सवार हमलावरों ने गोली मार दी, जिससे वह घायल हो गए.

उन्‍होंने बताया कि पुलिस ने घायलावस्था में भाजपा नेता को जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए भर्ती कराया. उनकी गंभीर हालत के मद्देनजर डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज सैफई भेज दिया गया.

सिंह ने दावा किया कि शीघ्र ही हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. सिंह के मुताबिक अभी बदमाशों की शिनाख्त नहीं हुई है.


उत्तराखंड विधानसभा चुनाव


भाजपा से निष्कासित होने पर कांग्रेस गए हरक दो दशकों में पहली बार चुनाव न​हीं लड़ सकेंगे 

उत्तराखंड में 14 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी दलों द्वारा अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दिए जाने के बाद यह साफ हो गया है कि पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत इस बार के चुनावी दंगल में दांव आजमाते दिखाई नहीं देंगे.

हरक सिंह रावत. (फोटो साभार: फेसबुक)

प्रदेश के उत्तराखंड के दो दशक के चुनावी सफर में ऐसा पहली बार होगा, जब चुनावी राजनीति के महारथी माने जाने वाले हरक सिंह चुनाव नहीं लड़ रहे होंगे.

कथित रूप से अपने अलावा अपनी पुत्रवधू के लिए भी टिकट की मांग पर अड़ने और इसके लिए अन्यत्र संभावनाएं टटोलने के कारण हाल में भाजपा से निष्कासित होने के बाद कोटद्वार के विधायक हरक सिंह किसी तरह कांग्रेस में दोबारा वापसी करने में तो सफल रहे, लेकिन अपने लिए टिकट हासिल नहीं कर सके.

उत्तराखंड के चार बार के विधायक हालांकि अपनी पुत्रवधू और फेमिना मिस इंडिया की पूर्व प्रतिभागी रहीं अनुकृति गुसाईं को लैंसडाउन से कांग्रेस का टिकट दिलवाने में कामयाब रहे.

कांग्रेस में शामिल होने के बाद से रावत कह रहे थे कि वह चुनाव लड़ने के लिए उत्सुक नहीं हैं, लेकिन अगर पार्टी उनसे कहेगी तो वह चुनाव लड़ेंगे.

हालांकि, ये अटकलें भी जोरों पर चलीं कि कांग्रेस उन्हें भाजपा के दिग्गज नेता और ​मौजूदा विधायक सतपाल महाराज के खिलाफ चौबट्टाखाल से मैदान में उतार सकती है. लेकिन, बाद में समय के साथ ये चर्चाएं दम तोड़ गईं.

नवंबर, 2000 में बने उत्तराखंड राज्य में हुए सभी चारों विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने वाले हरक सिंह ने 2002 और 2007 का चुनाव लैंसडाउन से जीता, जबकि 2012 में वह रुद्रप्रयाग और पिछला चुनाव कोटद्वार से जीते थे.

चुनावी दंगल से दूर रहने के बावजूद हर​क सिंह के अपना पूरा प्रभाव और जोर अपनी पुत्रवधू को लैंसडाउन से जिताने में लगाने की संभावना है.

प्रदेश के एक और प्रमुख नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इस बार चुनावी समर में नहीं दिखाई नहीं देंगे. टिकट वितरण की प्रक्रिया शुरू होने से ऐन पहले उन्होंने भाजपा के सामने चुनाव न लड़ने की इच्छा व्यक्त की.

पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखे पत्र में त्रिवेंद्र सिंह ने कहा कि वह भाजपा की सरकार दोबारा बनाने के लिए अपने प्रयास लगाना चाहते हैं और इसलिए उन्हें टिकट न दिया जाए.

वर्ष 2017 में 70 में से 57 सीट जीतकर ऐतिहासिक जनादेश के साथ सत्ता में आई भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री बनाए गए त्रिवेंद्र सिंह को पिछले साल मार्च में अपने कार्यकाल के चार साल पूरे होने से महज कुछ दिन पूर्व पद से हटा दिया गया था.


पंजाब विधानसभा चुनाव


सिद्धू ने अमृतसर पूर्व से नामांकन-पत्र दाखिल किया

अमृतसर: कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने शनिवार को अमृतसर पूर्व से अपना नामांकन-पत्र दाखिल किया. उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को सिर्फ इसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की चुनौती दी.

नवजोत सिंह सिद्धू. (फोटो: पीटीआई)

अमृतसर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के साथ ही शिअद नेता मजीठिया मजीठा सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं, जो वर्तमान में उनके पास है.

अमृतसर पूर्व से अपना नामांकन-पत्र दाखिल करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सिद्धू ने कहा, ‘यदि आप (मजीठिया) में इतना दम है और लोगों पर विश्वास है तो मजीठा को छोड़कर केवल यहां एक सीट से चुनाव लड़ें. क्या आप में हिम्मत है?’

मजीठिया को उनके निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारने वाले अकालियों पर निशाना साधते हुए सिद्धू ने कहा, ‘वे केवल लूट का खेल खेलने आए हैं. लेकिन इस ‘धर्म युद्ध’ में वे सफल नहीं होंगे, क्योंकि जहां ‘धर्म’ है वहां जीत है.’

अकाली दल पर पंजाब को लूटने का आरोप लगाते हुए सिद्धू ने कहा, ‘यतो धर्मस्ततो जयः (जहां धर्म है वहां जीत है).’

पंजाब विधानसभा की 117 सीटों के लिए 20 फरवरी को मतदान होगा और मतगणना 10 मार्च को होगी.

आप के मुख्यमंत्री पद के चेहरे भगवंत मान ने धुरी से नामांकन-पत्र दाखिल किया

धुरी; आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे भगवंत मान ने शनिवार को धुरी विधानसभा सीट से अपना नामांकन-पत्र दाखिल किया और कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि इस निर्वाचन क्षेत्र के लोग पंजाब में सबसे बड़े मतों के अंतर से उनकी जीत सुनिश्चित करेंगे.

मान अपनी मां के साथ नामांकन-पत्र दाखिल करने आए. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यह धुरी विधानसभा क्षेत्र के लिए इतिहास लिखने का वक्त है.

उन्होंने कहा, ‘मैं उम्मीद करता हूं कि धुरी के लोग पंजाब में सबसे बड़े मतों के अंतर से इस सीट पर उन्हें विजयी बनाएंगे.’

आप के नेता ने कहा कि धुरी के लोग बदलाव चाहते हैं. उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि उनकी पार्टी ने इस विधानसभा सीट से उन्हें नामित किया है. उन्होंने कहा, ‘धुरी को आदर्श विधानसभा क्षेत्र बनाया जाएगा.’

मान संगरूर संसदीय क्षेत्र से दो बार के सांसद हैं. धुरी, संगरूर लोकसभा सीट के विधानसभा क्षेत्रों में से एक है.

यह पूछे जाने पर कि उनके प्रतिद्वंद्वी उन पर इस निर्वाचन क्षेत्र से लापता रहने का आरोप लगाते हैं, इस पर मान ने कहा कि वह धुरी में रहते हैं और इस निर्वाचन क्षेत्र के गांवों का दौरा करते हैं.

अभी कांग्रेस विधायक दलवीर सिंह गोल्डी धुरी सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और वह फिर से इस सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं. शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने इस सीट से संगरूर के पूर्व विधायक प्रकाश चंद गर्ग को खड़ा किया है.


गोवा विधानसभा चुनाव


टीएमसी-आईपैक पर मतदाताओं की निजी जानकारियां एकत्र करने का आरोप लगाया

कांग्रेस और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) ने शनिवार को आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) एवं चुनावी रणनीति बनाने वाली फर्म आईपैक 14 फरवरी को होने जा रहे गोवा विधानसभा चुनाव से पहले संदिग्ध तरीके से मतदाताओं की निजी जानकारियां एकत्र कर रही है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गोवा कांग्रेस महासचिव सुनिल कवथनकर और जीएफपी महासचिव (संगठन) दुर्गादास कामत ने संवाददाताओं से कहा कि दोनों दलों ने संयुक्त रूप से तृणमूल कांग्रेस एवं आईपैक के खिलाफ नई दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास एक शिकायत दायर की है.

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस और आईपैक महिलाओं को कार्ड देकर दावा कर रही है कि ममता बनर्जी नीत पार्टी (टीएमसी) के यहां सत्ता में आने पर उन्हें पैसे मिलेंगे और इस सिलसिले में निजी जानकारियां एकत्र की जा रही हैं.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि करीब तीन लाख महिलाओं और दो लाख से अधिक युवकों को इन योजनाओं के लिए सूची में शामिल किया गया है. यह उनके 2022 चुनाव प्रचार के लिए जागरूकता अभियान नहीं है, बल्कि संदिग्ध तरीके से बड़े पैमाने पर निजी जानकारी एकत्र करने का अभियान है, जिसका इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों के लिए किया जाएगा.’’

कामत ने भी कहा कि सीईसी के पास इस सिलसिले में एक शिकायत दायर की गई है.

गोवा अवैध खनन मामले में भाजपा आरोप साबित करे या माफी मांगे: कांग्रेस

कांग्रेस ने शनिवार को भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने वर्ष 2012 का गोवा विधानसभा चुनाव जीतने के लिए उसके नेताओं पर अवैध खनन में शामिल होने के झूठे आक्षेप लगाए थे. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडनकर ने कहा कि भाजपा अपने झूठे आरोपों के लिए माफी मांगे.

कांग्रेस ने कहा कि भाजपा शासित राज्य सरकार पिछले एक दशक के दौरान कोई भी ‘घोटाले की रकम’ वसूलने में नाकाम रही है.

पणजी में संवाददाताओं से बातचीत में कांग्रेस की गोवा इकाई के अध्यक्ष चोडनकर ने कहा कि भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार और इसके नेताओं पर खनन घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इससे सरकारी खजाने को 35 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘विधानसभा की लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट के आधार पर ये आरोप वर्ष 2012 में लगाए गए थे, लेकिन तथाकथित खनन घोटाले को लेकर भाजपा पिछले एक दशक के दौरान पैसा वसूल करने में क्यों नाकाम रही?’

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा ने ये आरोप केवल चुनाव जीतने के लिए लगाए थे.

उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि भाजपा आरोपों (खनन घोटाले में कांग्रेस की कथित भागीदारी) को साबित करे या हमारे नेताओं और आम जनता से उन्हें भ्रमित करने के लिए माफी मांगे.’

वर्ष 2011 में विवादित पीएसी रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिगंबर कामत और कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाए गए थे. इस रिपोर्ट को पीएसी के तत्कालीन प्रमुख, भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष मनेाहर पर्रिकर ने तैयार किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)