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झारखंड: कोयला खदान में अवैध खनन के दौरान पांच की मौत, दर्जनों के दबे होने की आशंका

धनबाद ज़िले के निरसा में अवैध कोयला खनन के दौरान मलबा धंसने से चार महिलाओं समेत पांच लोगों की मौत हो गई है. पुलिस का कहना है कि दर्जनभर से अधिक लोग अब भी फंसे हो सकते हैं. बीते चार सालों में निरसा क्षेत्र में ईसीएल कंपनी की खदानों में अवैध खनन के दौरान दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

धनबाद: झारखंड में धनबाद जिले के निरसा में सोमवार रात तीन खुली खदानों में अवैध कोयला खनन के दौरान मलबा धंसने से चार महिलाओं समेत पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जन भर से अधिक अन्य लोगों के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है.

पुलिस सूत्रों ने दर्जन भर से अधिक लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताते हुए मंगलवार को बताया था कि दोपहर तक गोपीनाथपुर की खदान से चार महिलाओं समेत पांच लोगों के शवों को निकाला गया है. शवों की हालत ऐसी है कि उनकी पहचान नहीं की जा सकी है.

सूत्रों ने बताया कि पुलिस की टीम घटनास्थल पर है तथा राहत और बचाव कार्य तेजी से किए जा रहे हैं.

उन्होंने बताया कि पहली दुर्घटना ईसीएल की कापासाड़ा खदान में सोमवार शाम हुई. दूसरी दुर्घटना भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की चाच विक्टोरिया खदान में रात के समय हुई, जबकि तीसरी दुर्घटना मंगलवार सुबह गोपीनाथपुर की खदान में हुई.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मंगलवार सुबह दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे. इस दौरान अवैध कोयला खनन कराने वाले माफिया ने लोगों को वहां से भगा दिया.

घटना की सूचना मिलने के बाद ईस्टर्न कोल लिमिटेड (ईसीएल) की तरफ से पोकलेन मशीनों को भेजा गया था लेकिन माफिया ने उन्हें भी काम नहीं करने दिया.

बाद में जब मौके पर पुलिस पहुंची उसके बाद ही राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सका.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तीनों खदानों में हुई दुर्घटना में अभी भी दर्जन भर से अधिक लोगों के दबे होने की आशंका है और अपुष्ट सूत्रों के अनुसार मलबे में दो से तीन दर्जन लोग भी दबे हो सकते हैं.

चूंकि खदानों में अवैध खुदाई हो रही थी, लिहाजा जिन परिवारों के लोग लापता हैं अथवा खदानों में फंसे हुए हैं वे खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, जिसके चलते उनकी सही संख्या का पता नहीं चल पा रहा है.

वहीं, पुलिस ने बताया कि अवैध खनन के दौरान निरसा थाना क्षेत्र के गोपीनाथपुर मे ईसीएल की खदानों में दुर्घटना को लेकर सरकार ने विशेष जांच (एसआईटी) दल का गठन किया है.

धनबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजीव कुमार ने बताया कि एसआईटी की बागदौर धनवाद ग्रामीण पुलिस अधीक्षक रेशमा रमेशन को सौंपी गई है. अधिकारियों को ईसीएल की कापासाड़ा खदान और बीसीसीएल की चाच विक्टोरिया खदान ढहने के कोई संकेत नहीं मिले हैं.

उन्होंने कहा कि घटना केवल गोपीनाथपुर की खदान में ही हुई है जहां से पांच शव बरामद हुए हैं.

उन्होंने बताया कि राहत बचाव कार्य तेजी से चलाया जा रहा है, लेकिन खदानों में फंसे लोगों के बारे में ठीक-ठीक कुछ नहीं कहा जा सकता है क्योंकि तीनों खदानें खनन के बाद खाली छोड़ दी गई हैं और वहां अवैध रूप से खनन किया जा रहा था.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चार सालों में निरसा में ईसीएल की खदानों में अवैध खनन के दौरान कम से कम 24 लोगों की मौत हुई है.

एसएसपी कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन ने खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) से पीएसयू कोल इंडिया की सहायक कंपनी ईसीएल की खान सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट मांगी है.

ईसीएल के एक अधिकारी ने अवैध खनन को लेकर अज्ञात लोगों के खिलाफ निरसा थाने में शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने कहा कि परित्यक्त खदानों में अनाधिकृत प्रवेश प्रतिबंधित है और प्रशासन से सुरक्षा मांगी गई है.

क्षेत्रीय भाजपा विधायक ने मांग की है कि इस घटना के संबध में ईसीएल अधिकारियों के ऊपर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए.

हेमंत सोरेन सरकार पर हमलावर होते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में ऐसी घटनाएं बढ़ गई हैं. पूर्व विधायक अरुप चटर्जी का दावा है कि कम से कम दर्जन भर ग्रामीणों की इस घटना मे जान गई है.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘क्षेत्र में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन हो रहा है. ईसीएल प्रबंधन, सीआईएसएफ और स्थानीय पुलिस की संलिप्तता के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन संभव नहीं है.’

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे और नौकरी की मांग की है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)