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मणिपुरः एनजीओ का आरोप- बिना नियमित स्टाफ के चल रहा है राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय

मणिपुर के एक एनजीओ अपुनबा इमागी मचासिंग का कहना है कि स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के सभी कर्मचारी अनुबंध के तहत काम कर रहे हैं जबकि कुछ की भर्तियां डेप्युटेशन के आधार पर की गई हैं. एनजीओ ने यूनिवर्सिटी की दयनीय स्थिति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भी भेजा है.

मणिपुर का राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय (फोटो साभारः वेबसाइट)

इम्फालः भारत के अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय खेलों में हिस्सा लेने और गोल्ड मेडल जीतने के उद्देश्य से स्थापित राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय का संचालन बिना किसी नियमित स्टाफ के हो रहा है.

द फ्रंटियर मणिपुर की रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी के सभी कर्मचारी मौजूदा समय में अनुबंध के तहत काम कर रहे हैं जबकि कुछ की भर्तियां डेप्युटेशन के आधार पर की गई.

एनजीओ अपुनबा इमागी मचासिंग (एआईएमएस) द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए एक ज्ञापन में यूनिवर्सिटी की दयनीय स्थिति का उल्लेख किया और यूनिवर्सिटी के समक्ष पेश आ रही समस्याओं की तरफ उनका ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया.

ज्ञापन में एआईएमएस ने आरोप लगाया, ‘कुछ लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को ही कर्मचारी के तौर पर यूनिवर्सिटी में नियुक्त किया है. चूंकि कोई नियमित फैकल्टी या गैर शिक्षण स्टाफ को नियुक्त नहीं किया गया है, इस वजह से यूनिवर्सिटी अधर में लटकी है. इससे छात्रों के करिअर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है.’

ज्ञापन में यह भी कहा गया, ‘भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी आरसी मिश्रा को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के खिलाफ एनएसयू का कुलपति नियुक्त किया गया था.’

युवा मामलों और खेल के मंत्रालय के विज्ञापन के मुताबिक, वाइस चांसलर के पास उत्कृष्ट अकादमिक रिकॉर्ड होना चाहिए और किसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के रूप में कम से कम दस सालों का अनुभव या किसी अकादमिक या प्रशासनिक संगठन में समान पद पर समान अनुभव हो. उसकी उम्र आवेदन प्राप्ति की अंतिम तिथि से 65 वर्ष कम होनी चाहिए.

ज्ञापन में कहा गया कि मिश्रा के पास इस पद के लिए आवश्यक योग्यता या अनुभव नहीं है.

एआईएमएस का आरोप है कि मिश्रा ने ज्यादातर काम नई दिल्ली से किया है. हालांकि, उनका आधिकारिक आवास लैम्फेल के रूप में सूचीबद्ध है. उनकी नियुक्ति के शुरुआती छह महीने में वह सिर्फ एक महीने ही इम्फाल में रहे.

यह भी दावा किया गया कि न तो एनएसयू के वीसी और न ही रजिस्ट्रार ने कोर्ट, कार्यकारी परिषद, शैक्षणिक और गतिविधि परिषद, विभागीय खेल अध्ययन बोर्ड और स्कूल ऑफ बोर्ड ऑफ स्टडीज जैसे किसी अनिवार्य विश्वविद्यालय निकायों का गठन किया है.

यूजीसी के दिशानिर्देशों के मुताबिक, कोई यूनिवर्सिटी इन निकायों के बिना संचालित नहीं हो सकती.

एआईएमएस ने पत्र में कहा, ‘यहां तीन पाठ्यक्रम- बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स (बीपीईएस), बैचलर ऑफ साइंस इन स्पोर्ट्स कोचिंग और स्पोर्ट्स साइकोलॉजी हैं. स्पोर्ट्स न्यूट्रीशन का एक पाठ्यक्रम है लेकिन इसका सिलेबस तैयार नहीं है.’

एईआईएमएस ने कहा, ‘ध्यान देने वाली बात यह है कि सिलेबस समिति के चार सदस्यों में से दो की कोई उचित पृष्ठभूमि नहीं है.’

एआईएमए ने यह भी सवाल उठाया कि करिकुलम डेवलपमेंट, सिलेबस अडॉप्शन जैसे संस्थान के विभिन्न कार्यों के लिए उपयुक्त अधिकारियों की नियुक्ति के बिना कोई यूनिवर्सिटी कैसे कामकाज कर सकती है.

एआईएमएस ने यूनिवर्सिटी के मुद्दों को हल करने के लिए प्रधानमंत्री से कार्रवाई करने की मांग की है.