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असम: कांग्रेस विधायक के बयान के बाद मठ की ज़मीन ख़ाली कराई गई, 37 परिवार बेदख़ल

असम के बारपेटा ​ज़िले का मामला. आरोप था कि 16वीं सदी के वैष्णव मठ ‘बारपेटा सत्र’ से जुड़ी लगभग 40 बीघा ज़मीन पर बंगाली मुस्लिम आबादी ने अतिक्रमण किया था. बीते दिनों यहां पहुंचे कांग्रेस विधायक शर्मन अली अहमद एक वीडियो में कथित तौर पर कहते नज़र आए थे कि जब तक वे ज़िंदा हैं, यहां के लोगों को कोई बेदख़ल नहीं कर सकता. इस बयान पर विवाद के बाद राज्य की भाजपा सरकार ने ज़मीन ख़ाली करा दी.

(फाइल फोटो साभार: ट्विटर)

गुवाहाटीः 16वीं सदी के वैष्णव मठ ‘बारपेटा सत्र’ (Barpeta Sattra) की जमीन खाली करने के सरकारी अभियान के तहत बीते पांच फरवरी को असम के बारपेटा जिले से कम से कम 37 परिवारों को बेदखल कर दिया गया.

दरअसल यह सरकारी अभियान कथित तौर पर अतिक्रमणकारियों से सत्र जमीनों को खाली कराने के लिए शुरू किया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभियान कांग्रेस विधायक शर्मन अली अहमद के क्षेत्र के दौरे के दौरान कथित तौर पर उनकी भड़काऊ टिप्पणियों की वजह से हुए विवाद के बाद शुरू किया गया. यह जगह उनके निर्वाचन क्षेत्र बागबोर के तहत आती है.

इस बेदखली अभियान के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार राज्य में अतिक्रमण की गईं सत्र की जमीनों को खाली कराने के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘एक विधायक के अत्यधिक सांप्रदायिक और भड़काऊ बयानों के बाद हम 37 परिवारों को बेदखल करने और बागबोर पुलिस थाने के तहत मांडिया मौजा से ‘बारपेटा सत्र’ की 40 बीघा जमीन को खाली कराने में सफल रहे. हम असम में ‘सत्र’ जमीनों पर अतिक्रमण को खाली कराने के लिए प्रतिबद्ध है.’

बता दें कि ‘सत्र’ दरअसल वैष्णव संत एवं सुधारक श्रीमंत शंकरदेव द्वारा शुरू किए गए 16वीं शताब्दी के नव-वैष्णव सुधारवादी आंदोलन के हिस्से के तहत स्थापित प्रभावशाली मठ संस्थान हैं.

बीते कई सालों से आसपास के इलाकों की संदिग्ध अप्रवासी आबादी द्वारा सत्र की जमीनों पर अतिक्रमण और उन्हें जबरन हथियाने के आरोप लगते रहे हैं. विशेष रूप से बीते कुछ सालों में असम की भाजपा सरकार ने इस मामले को उजागर किया है.

‘बारपेटा सत्र’ के मामले में यह आरोप है कि इस मठ से जुड़ी लगभग 40 बीघा जमीन पर बंगाली मुस्लिम आबादी ने अतिक्रमण किया था.

राज्य में सभी ‘सत्रों’ के संगठन असम सत्र महासभा के सचिव कुसुम महंत ने कहा, ‘यह क्षेत्र, जो ‘सत्र’ से लगभग 6-7 किमी दूर है, ऐतिहासिक रूप से इसका था. सत्राधिकारी (प्रमुख) ने इस मुद्दे को उजागर किया है और भूमि को खाली कराने के लिए सरकार को एक आवेदन भी लिखा था.’

संगठन का आरोप है कि पूरे असम में हजारों बीघा ‘सत्र’ भूमि पर कब्जा कर लिया गया है.

जिला प्रशासन ने बीते पांच फरवरी को पुलिस के सहयोग से मांडिया रेवेन्यू सर्किल के तहत आने वाले बर्दलानी गांव में बेदखली अभियान चलाया था.

बारपेटा के एसपी अमिताभ सिन्हा ने कहा, ‘अभियान शांतिपूर्ण रहा और अतिक्रमण की गई जमीन को बिना लोगों के विरोध के खाली कराया गया.’

बारपेटा के उपायुक्त तेज प्रताप भुसाल ने कहा कि खाली की गई जमीन को सत्र की प्रबंध समिति को सौंपा गया है. बारपेटा की सभी सत्र जमीनों को कमोबेश खाली करा दिया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियम (एएएमएसयू) के अध्यक्ष रेजौल करीम सरकार का कहना है कि बेदखल किए गए परिवार यहां दस से अधिक सालों से रह रहे थे.

उन्होंने कहा, ‘ये बागबोर क्षेत्र से हैं और उन्हें बाढ़ और उसकी वजह से हुए कटाव के बाद विस्थापित होने को मजबूर होना पड़ा था.’ उन्होंने कहा कि कुछ परिवारों को सरकार से नोटिस मिलने के बाद 2020 में जाना पड़ा था. बाकी लोग कहीं जा नहीं सकते थे, क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं था. वे बेहद गरीब किसान हैं.

करीम सरकार का आरोप है कि जिन लोगों को बेदखल किया गया, उन्होंने अब पास में ही तालाब के नजदीक सरकारी खास भूमि (Khas Land) में टिन के नीचे शरण ले ली है.

इस स्थान का बीते पांच फरवरी को दौरा कर चुके करीम सरकार ने कहा, ‘ये लोग बिना किसी सुविधाओं के बहुत भयावह स्थिति में हैं और बारिश की वजह से उनकी स्थित और बदतर हो गई है.’

उन्होंने कहा कि परिवारों ने जान-बूझकर सत्र जमीन पर कब्जा नहीं किया था, लेकिन वे असहाय थे, इसलिए उन्हें ऐसा करना पड़ा.

उपायुक्त भुसाल ने कहा कि परिवारों को पिछले महीने तीन बार नोटिस दिया गया था. बेदलख किए गए परिवार अब कहां है इस बात पर निश्चित न होते हुए उन्होंने कहा उन्होंने कहा, ‘उन्होंने अब अपनी व्यवस्था की है और आसपास के इलाकों में शरण ली है.’

रिपोर्ट के अनुसार, इस बीच ‘बारपेटा सत्र’ की प्रबंध समिति द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर कांग्रेस विधायक शर्मन अली अहमद के खिलाफ बीते चार फरवरी को बारपेटा जिला पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी. एसपी सिन्हा ने कहा, ‘शिकायत में कहा गया कि अहमद ने धमकी भरी टिप्पणी की थी.’

बता दें कि बीते चार फरवरी को गांव का दौरा कर चुके अहमद को इस वीडियो में कथित तौर पर कहते सुना जा सकता है, ‘जब तक मैं जिंदा हूं, आपको कोई बेदखल नहीं कर सकता. अल्लाह आपकी रक्षा करे.’

उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा था कि भाजपा राज्य में सिर्फ पांच सालों के लिए ही सत्ता पर काबिज है, उसके बाद बेदखल किए गए लोग जमीनों पर अपना दावा कर सकते हैं. उन पर प्रशासन द्वारा ‘अतिक्रमण किए गए क्षेत्र’ का सीमांकन करने के लिए बनाए गए खंभों को तोड़ने का भी आरोप लगाया गया है.

इसके बाद हिंदू युबा छात्र परिषद जैसे संगठनों ने अहमद की गिरफ्तारी की मांग की थी, जबकि कांग्रेस ने विधायक के बयान से खुद को अलग कर लिया था.

कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया ने बारपेटा के सत्राधिकार बशिष्ठ देव शर्मा को लिखे पत्र में कहा कि न ही वह और न ही उनकी पार्टी अहमद के बयानों का समर्थन करती है.

बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि अहमद को अपने बयानों की वजह से पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा है. पिछले साल असम के दरांग जिले के सिपाझार में बेदखली अभियान के बाद अपने विवादित बयानों की वजह से उन्हें गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें निलंबित कर दिया था.