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कर्नाटक में हिजाब पहनकर कॉलेज पहुंचने पर 58 छात्राएं निलंबित, 15 के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

कर्नाटक के विभिन्न ज़िलों में लड़कियों के हिजाब पहनकर कॉलेज जाने का मामला सामने आया है. कई कॉलेजों में प्रवेश न देने की वजह से छात्राओं ने प्रदर्शन भी किया. मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने इस समस्या के लिए ‘बाहरी’ लोगों को ज़िम्मेदार ठहराते हुए दावा किया कि इस मुद्दे को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा.

हिजाब पहनने के समर्थन में विभिन्न जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं. (फाइल फोटो: पीटीआई)

बेंगलुरु: कर्नाटक के कई हिस्सों में शनिवार को छात्राएं अपने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनकर आईं, लेकिन उन्हें अदालत के आदेश का हवाला देकर प्रवेश नहीं करने दिया गया.

जानकारी के मुताबिक, शिवमोगा जिले के शिरलाकोप्पा में बीते 18 फरवरी को प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज प्रशासन के विरोध में प्रदर्शन करने और हिजाब हटाने से मना करने पर 58 छात्राओं को निलंबित कर दिया गया. वहीं, हिजाब पहनकर प्रवेश नहीं करने पर कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन करने के आरोप में तुमकुरु में कम से कम 15 छात्राओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

इस बीच, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने समस्या के लिए ‘बाहरी’ लोगों को जिम्मेदार ठहराया और दावा किया कि इस मुद्दे को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा.

बोम्मई ने बेंगलुरु में संवाददाताओं से कहा, ‘बाहरी लोगों द्वारा समस्या पैदा की जा रही है. यह मुद्दा प्रधानाचार्यों, छात्रों और अभिभावकों द्वारा सुलझा लिया जाएगा. माहौल को शांत रखने की आवश्यकता है. मैं राज्य में हो रही सभी गतिविधियों की जानकारी ले रहा हूं.’

तुमकुरु में ‘एम्प्रैस गर्ल्स प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज’ के प्राचार्य एस. शनमुखा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कॉलेज के बाहर विरोध-प्रदर्शन करने वाली 15 छात्राओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

अपनी शिकायत में प्राचार्य ने कहा कि कॉलेज के आसपास निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद 10-15 मुस्लिम छात्राओं ने प्रदर्शन किया.

उधर, शिवमोगा जिले के शिरलाकोप्पा में शुक्रवार को प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज प्रशासन के विरोध में प्रदर्शन करने और हिजाब हटाने से मना करने पर 58 छात्राओं को निलंबित कर दिया गया.

एक छात्रा ने संवाददाताओं को बताया कि निलंबित की गईं छात्राओं को कॉलेज नहीं आने को कहा गया है. शनिवार को भी छात्राएं कॉलेज आईं, हिजाब पहनने के समर्थन में नारे लगाए, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया.

छात्राओं ने कहा, ‘हम यहां पहुंचे लेकिन प्राचार्य ने हमसे कहा कि हमें निलंबित कर दिया गया है और हमें कॉलेज आने की जरूरत नहीं है. पुलिस ने भी हमसे कॉलेज नहीं आने को कहा था, फिर भी हम आए. आज किसी ने हमसे बात नहीं की.’

वहीं, दावणगेरे जिले के हरिहर में स्थित एसजेवीपी कॉलेज में लड़कियों को हिजाब पहनकर प्रवेश नहीं दिया गया. इस पर छात्राओं ने कहा कि वह हिजाब उतारकर भीतर नहीं जाएंगी और यह उनके लिए शिक्षा के जितना ही महत्वपूर्ण है और वह अपने अधिकार को नहीं छोड़ सकतीं.

बेलगावी जिले के विजय पैरामेडिकल कॉलेज में छात्राओं ने संवाददाताओं को बताया कि हिजाब मुद्दे के कारण संस्थान ने अनिश्चितकाल के लिए अवकाश की घोषणा कर दी है.

एक छात्रा ने कहा, ‘हम हिजाब के बिना नहीं बैठेंगे. कॉलेज को यह समझ में आना चाहिए कि इससे हमारी शिक्षा पर क्या प्रभाव पड़ता है. प्राचार्य हमारी बात नहीं सुन रहीं.’

बल्लारी के सरला देवी कॉलेज और कोप्पल जिले के गंगावती में सरकारी कॉलेज में भी इसी प्रकार की स्थिति देखने को मिली. रामनगर जिले के कुदुर गांव में कुछ छात्राओं को जब कक्षा के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई, तो उन्होंने कॉलेज के मैदान पर विरोध प्रदर्शन किया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रामनगर जिले के कुदुर गांव में भी कुछ छात्राओं ने कक्षाओं में प्रवेश नहीं दिए जाने पर कॉलेज के मैदान पर प्रदर्शन किया.

इस बीच जगद्गुरु मुरुगराजेंद्र विद्यापीठ के स्वामी डॉ. शिवमूर्ति मुरुघ और नासिह फाउंडेशन के मौलाना शबीर अहमद नदवी ने हिजाब विवाद को लेकर शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ समाज में शांति और सद्भाव की अपील की.

एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा, ‘मैं सभी से शांति और सामाजिक सद्भाव स्थापित करने की अपील करता हूं, जो बहुत महत्वपूर्ण है. कपड़े (हिजाब या भगवा स्कार्फ) पहनने का मामला उसके बाद आता है.’

मौलाना नदवी ने कहा कि विभिन्न धर्मों के छात्र एक साथ शिक्षा प्राप्त कर रहे थे, लेकिन अब तक हिजाब या भगवा स्कार्फ का कोई मुद्दा नहीं था.

उन्होंने कहा, ‘एकमात्र उद्देश्य था कि भारतीय बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर मातृभूमि की सेवा के लिए सक्षम बनाया जाए. मैं सभी से इन चीजों पर ध्यान न देने और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की अपील करता हूं.’

उन्होंने यह भी कहा कि सभी उलेमा (इस्लामी धार्मिक प्रमुख) एक बार अदालत का आदेश आने के बाद देखेंगे और फिर वे मीडिया के सामने आएंगे.

गौरतलब है कि हिजाब का विवाद कर्नाटक के उडुपी जिले के एक सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में सबसे पहले तब शुरू हुआ था, जब छह लड़कियां पिछले साल दिसंबर में हिजाब पहनकर कक्षा में आईं और उनके जवाब में महाविद्यालय में हिंदू विद्यार्थी भगवा गमछा पहनकर आने लगे.

इन छात्राओं के कॉलेज में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई थी.

धीरे-धीरे यह विवाद राज्य के अन्य हिस्सों में भी फैल गया, जिससे कई स्थानों पर शिक्षण संस्थानों में तनाव का महौल पैदा हो गया और हिंसा हुई.

इस विवाद के बीच इन छह में से एक छात्रा ने कर्नाटक हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करके कक्षा के भीतर हिजाब पहनने का अधिकार दिए जाने का अनुरोध किया था.

याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि हिजाब (सिर पर दुपट्टा) पहनना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत एक मौलिक अधिकार है और यह इस्लाम की एक अनिवार्य प्रथा है.

हिजाब के मुद्दे पर सुनवाई कर रही कर्नाटक हाईकोर्ट की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने 10 फरवरी को मामले का निपटारा होने तक छात्रों से शैक्षणिक संस्थानों के परिसर में धार्मिक कपड़े पहनने पर जोर नहीं देने के लिए कहा था. इस फैसले के खिलाफ ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.

इस पर तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 11 फरवरी को कहा था कि वह प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करेगा और कर्नाटक हाईकोर्ट के उस निर्देश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर ‘उचित समय’ पर विचार करेगा, जिसमें विद्यार्थियों से शैक्षणिक संस्थानों में किसी प्रकार के धार्मिक कपड़े नहीं पहनने के लिए कहा गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)