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नए आईटी नियमों के तहत केंद्र ने ‘पंजाब पॉलिटिक्स टीवी’ के ऐप, वेबसाइट आदि पर रोक लगाई

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक बयान में दावा किया है कि पंजाब पॉलिटिक्स टीवी प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ से संबद्ध है और पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान जनव्यवस्था बिगाड़ने के लिए चैनल द्वारा ऑनलाइन मीडिया का उपयोग करने की खुफ़िया जानकारी मिली थी.

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर. (फोटो साभार: फेसबुक/@official.anuragthakur)

नई दिल्ली: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मंगलवार को विदेश से संचालित ‘पंजाब पॉलिटिक्स टीवी’ के ऐप, वेबसाइट और सोशल मीडिया एकाउंट पर विधानसभा चुनाव के दौरान कथित तौर पर जन व्यवस्था बिगाड़ने के लिए एक ऑनलाइन मंच का इस्तेमाल करने की कोशिश के सिलसिले में रोक लगा दी.

केंद्र का दावा है कि यह संस्थान प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) से संबद्ध है. ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2019 की अधिसूचना द्वारा एसएफजे को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत एक गैरकानूनी संगठन घोषित किया था, और यह कहते हुए पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था कि समूह का प्राथमिक उद्देश्य पंजाब में एक ‘स्वतंत्र और संप्रभु देश’ की स्थापना करना था और दावा किया कि वह खुले तौर पर खालिस्तान का समर्थन करता है.

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान जन व्यवस्था बिगाड़ने के लिए चैनल द्वारा ऑनलाइन मीडिया का उपयोग करने की खुफिया जानकारी के आधार पर, मंत्रालय ने 18 फरवरी को प्रौद्योगिकी नियमों के तहत आपात शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ‘पंजाब पॉलिटिक्स टीवी’ के डिजिटल मीडिया मंचों पर रोक लगा दी.’

मंत्रालय ने बताया कि अवरुद्ध ऐप, वेबसाइट और सोशल मीडिया एकाउंट की सामग्री सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने, अलगाववाद को भड़काने वाली थी. उन्हें भारत की संप्रभुता एवं अखंडता, राज्य की सुरक्षा तथा सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक पाया गया.

मंत्रालय ने कहा, ‘यह भी पाया गया कि (पंजाब में) चल रहे चुनाव के दौरान नए ऐप जारी किए गए और नए सोशल मीडिया एकाउंट बनाए गए. भारत सरकार, भारत में समग्र सूचना वातावरण को सुरक्षित रखने के लिए सतर्क एवं प्रतिबद्ध है और भारत की संप्रभुता एवं अखंडता को कमजोर करने की क्षमता वाले किसी भी कृत्य को विफल करने के लिए प्रतिबद्ध है.’

पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए 20 फरवरी को मतदान हुआ था और मतगणना 10 मार्च को होगी.

रिपोर्ट के अनुसार, 18 फरवरी को केंद्र सरकार ने नये और विवादास्पद सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों को लागू करते हुए चैनल के डिजिटल मीडिया संसाधनों को अवरुद्ध कर दिया था.

आईटी नियमों में मिली इस आपातकालीन शक्ति के प्रयोग का अधिकार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव को मिला हुआ है, जो सुनवाई का अवसर दिए बिना किसी भी सामग्री पर रोक लगाने संबंधी अंतरिम आदेश पारित कर सकते हैं.

ऐसी आपातकालीन शक्तियों की वैधता पर चिंता व्यक्त की गई है. बता दें कि द वायर  उन कई मीडिया संस्थानों में से एक है जिन्होंने नए आईटी नियमों के प्रावधानों के खिलाफ कोर्ट का रुख किया है.

अपने एक विश्लेषण में द वायर  ने पाया कि खबर और समसामयिक मामलों की सामग्री के प्रकाशकों कानून की अदालतों के समानांतर खड़े किए एक न्यायिक तंत्र के अधीन किया जा रहा है. ऐसा करने के लिए उन बातों को आधार बनाया जा रहा है जो कि मूल आईटी कानून में अपराध नहीं थीं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)