राजनीति

दलबदल कर गोवा भाजपा में शामिल 12 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाएं ख़ारिज

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: यूपी में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि राजनेता वोट पाने के लिए जाति-धर्म पर निर्भर, प्रदर्शन पर नहीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जुर्माना भरते-भरते बीत जाएंगी दंगाइयों की पांच पीढ़ियां. शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने यूपी में प्रचार कर योगी को सत्ता से बाहर करने की अपील की. प्रकाश सिंह बादल को शिरोमणि अकाली दल के दोहरे संविधान के मामले में ज़मानत मिली. उत्तराखंड में चुनाव आयोग ने डाक मत-पत्रों से कथित छेड़छाड़ संबंधी वीडियो पर रिपोर्ट मांगी.

(फोटो: पीटीआई)

पणजी: बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने बृहस्पतिवार को विधानसभा अध्यक्ष के उस आदेश को कायम रखा, जिसमें उन्होंने 2019 में अपनी-अपनी पार्टी छोड़कर सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल होने वाले 12 विधायकों को विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य ठहराने की मांग वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी थीं.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडनकर ने उन 10 पार्टी विधायकों को विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य ठहराने के लिए याचिका दायर की थी, जो जुलाई 2019 में भाजपा में शामिल हो गए थे.

इसी तरह महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के विधायक रामकृष्ण उर्फ सुदीन धवलिकार ने भी अपने दो विधायकों के खिलाफ ऐसी ही याचिका दायर की थी, जो इस क्षेत्रीय दल से अलग होकर भाजपा में शामिल हो गए थे.

गोवा विधानसभा के अध्यक्ष राजेश पाटनेकर ने पिछले साल 20 अप्रैल को चोडनकर और धवलिकार की संबंधित याचिकाएं खारिज कर दी थीं.

बृहस्पतिवार को जस्टिस मनीष पिताले और जस्टिस आरएन लड्ढा की पीठ ने कहा कि दोनों याचिकाएं खारिज की जाती हैं. पीठ ने कहा, ‘याचिकाकर्ता अध्यक्ष के आदेश में दखल के लिए मामला नहीं बना पाए.’

न्यायालय ने कहा, ‘हम पाते हैं कि याचिकाकर्ताओं की याचिकाएं अध्यक्ष द्वारा सही तरीके से खारिज की गई थीं.’

उसने यह भी कहा कि अयोग्य ठहराने की मांग संबंधी याचिकाओं को खारिज करने के अध्यक्ष के आदेश के बारे में ‘यह नहीं कहा जा सकता कि राजनीतिक और संवैधानिक नैतिकता के आधार पर संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) लाने के उद्देश्य के विरुद्ध है.’

चोडनकर ने अध्यक्ष को दी गई याचिका में दलील दी थी कि सभी 10 विधायक ‘अपनी मूल पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता नहीं रखने के पात्र हैं , इसलिए संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत वे (विधानसभा की) सदस्यता रखने के योग्य नहीं हैं.’

एमजीपी ने इसी आधार पर याचिका दायर की थी.

वर्ष 2017 में गोवा की 40 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस 17 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी और भाजपा 13 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर आई थी. भाजपा ने आनन-फानन में कुछ क्षेत्रीय दलों (एमजीपी, गोवा फॉरवर्ड पार्टी) एवं निर्दलीय विधायकों के साथ गठजोड़ कर सरकार बना ली थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में कांग्रेस के दो विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था. 2019 में शेष 15 कांग्रेस विधायकों में से 10 और एमजीपी के तीन में से दो विधायक भाजपा में शामिल हो गए था, जिससे भाजपा को विधानसभा में पूर्ण बहुमत मिला. एमजीपी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) को तब सरकार से हटा दिया गया था.

पिछले पांच सालों में कांग्रेस के कई विधायक पार्टी से चले गए और सदन में उसके विधायक महज दो रह गए.

सावंत ने 12 विधायकों पर अदालती फैसले का स्वागत किया, कांग्रेस अंसतुष्ट

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बृहस्पतिवार को अदालत के इस फैसले का स्वागत किया और कहा, ‘लोकतंत्र एवं संवैधानिक जनादेश की जीत हुई है.’

हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडनकर ने दावा किया कि यह (फैसला) भाजपा नीत केंद्र सरकार की धनबल से ‘जनादेश को बदल देने की राजनीति को’ बढ़ावा देगा.

इस फैसले पर सावंत ने ट्वीट किया, ‘मैं भाजपा विधायक दल में 12 विधायकों के विलय के विरूद्ध कांग्रेस और एमजीपी द्वारा दायर की गई याचिकाएं खारिज करने के माननीय हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं. दुष्प्रचार अभियान पर लोकतंत्र एवं संवैधानिक जनादेश की जीत हुई है.’

दूसरी ओर गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गिरीश चोडनकर ने गुरुवार को कहा कि अदालत का फैसला ‘अप्रत्याशित आधार पर’ था और यह आदेश संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) की भावना के खिलाफ है.

उन्होंने कहा, ‘हम इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रहे हैं, क्योंकि राजनीतिक दलों के अस्तित्व का सवाल है. यह आदेश केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की राजनीति को बढ़ावा देगा… धनबल के इस्तेमाल से वे लोगों के जनादेश को बदल सकते हैं. यह आदेश राजनीतिक दलों के अस्तित्व और लोकतांत्रिक मूल्यों के अस्तित्व के खिलाफ जाता है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘यह देश में एक बुरी मिसाल कायम कर रहा है जहां चुनाव के बाद कुछ विधायक एक साथ आ सकते हैं और निर्णय ले सकते हैं, चाहे जिस राजनीतिक दल ने उन्हें उम्मीदवार के रूप में नामित किया हो, वे किसी पार्टी से पैसे ले सकते हैं और अलग हो सकते हैं.’

चोडनकर ने कहा, ‘यह न केवल कांग्रेस पार्टी के लिए बल्कि देश भर के सभी राजनीतिक दलों के लिए एक बुरी मिसाल कायम करने वाला है. इस आदेश से दसवीं अनुसूची की आत्मा को ही नष्ट कर दिया गया है.’

उन्होंने दावा किया, ‘यह आदेश लोकतंत्र के विरूद्ध है. यह न केवल कांग्रेस बल्कि देश के सभी राजनीतिक दलों के लिए गलत परिपाटी डालेगा, क्योंकि चुनाव के बाद कुछ विधायक एक साथ मिलकर दूसरे दल में जाने का फैसला कर लेंगे.’

गोवा विधानसभा के लिए इस साल 14 फरवरी को चुनाव हुए हैं और मतगणनना 10 मार्च को होगी.


उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव


यूपी के राजनेता वोट पाने के लिए जाति-धर्म पर निर्भर, प्रदर्शन पर नहीं: प्रियंका गांधी

लखनऊ: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाति और धर्म पर ज्यादा जोर होने से राजनेता बेफिक्र हो गए हैं और वे असल मुद्दों को दरकिनार कर रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक सभा को सं​बोधित करतीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी. (फोटो साभार: ट्विटर)

प्रियंका ने माना कि यूपी में पिछले कुछ दशकों में कांग्रेस संगठन कमजोर हुआ है, लेकिन पार्टी ने इसे दोबारा खड़ा करने और जनता के साथ फिर से जुड़ने के लिए कड़ी मेहनत की है.

1989 से उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाति और धर्म के वर्चस्व से जुड़े एक सवाल पर प्रियंका ने समाचार एजेंसी ‘पीटीआई/भाषा’ से कहा, ‘यह सही है कि यूपी की राजनीति जाति और धर्म पर केंद्रित हो गई है, लेकिन हकीकत यह है कि इस तरह की राजनीति ने राज्य के विकास में कोई योगदान नहीं दिया है. इसने न केवल राज्य को पीछे धकेला है, बल्कि राजनीतिक वर्ग को बेफिक्र भी बनाया है.’

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘यूपी का औसत राजनेता मानता है कि उसे वैसे भी धर्म और जाति के आधार पर वोट मिल जाएंगे, ऐसे में उसे दूसरे मोर्चों पर प्रदर्श करने की जरूरत ही क्या है? वह जनता से जुड़े असल मुद्दों को आसानी से दरकिनार कर सकता है. यह लोकतंत्र में विकसित हो रही बहुत ही अस्वस्थ प्रवृत्ति है.’

प्रियंका ने उन्हें भेजे गए सवालों के लिखित जवाब में कहा, ‘इसका यह मतलब है कि विकास, सुशासन और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे पीछे छूट जाते हैं, क्योंकि जाति और धर्म से जुड़ी भावनाएं राजनीति पर हावी हैं.’

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस अकेली पार्टी है, जिसने महिलाओं, युवाओं और यूपी के सामाजिक और राजनीतिक उत्थान से जुड़े हर पहलू के लिए एक सुनियोजित योजना तैयार की है और इसे अपने घोषणा-पत्र में पेश किया है. हमारा मानना ​​है कि राजनेताओं को शासन और विकास के प्रति जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और हम इस संदेश को पूरे राज्य में फैला रहे हैं.’

यह पूछे जाने पर कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कैडर कितना मजबूत है, क्योंकि पार्टी पिछले 33 वर्षों से राज्य की सत्ता में नहीं है, प्रियंका ने कहा, ‘पिछले कुछ दशकों में यूपी में हमारा संगठन लगातार कमजोर होता गया. गठबंधनों के कारण पिछले कई चुनावों में हमने 200 से 300 सीटों पर प्रत्याशी भी नहीं उतारे.’

उन्होंने कहा, ‘जब मैं पहली बार यहां आई थी तो मैंने देखा कि हमारा कैडर लगभग पूरी तरह से खत्म हो चुका था. हालांकि, कुछ पुराने कांग्रेसी और महिलाएं इसके बावजूद मजबूती से खड़े थे.’

प्रियंका ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में 400 सीटों पर उम्मीदवार उतारने से नया नेतृत्व खड़ा होगा और कांग्रेस भी मजबूत बनेगी.

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘हमने अपनी पार्टी को दोबारा खड़ा करने के लिए बहुत मेहनत की है. हमने कार्यक्रमों के तौर-तरीकों को बदल दिया है, ताकि वे हमारे कैडर को जनता के साथ दोबारा जोड़ सकें और सिर्फ पार्टी केंद्रित न रहें. हमने 1,00,000 से अधिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया है और राज्यभर में न्याय पंचायत और ग्राम स्तर तक संगठन का निर्माण किया है.’

पार्टी को मजबूत बनाने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से बताते हुए प्रिंयका ने कहा, ‘हमने यह सुनिश्चित किया कि पिछले कुछ वर्षों में जनता को जब भी समस्याओं का सामना करना पड़ा, तब हमारी पार्टी के कार्यकर्ता मदद के लिए सबसे पहले आगे आए और उनके अधिकारों के लिए लड़े. बावजूद इसके संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के मामले में अभी हमें लंबा रास्ता तय करना है.’

उन्होंने कहा, ‘विकास हमारे राजनीतिक एजेंडे में सबसे ऊपर है. हम महिलाओं और युवाओं से अपील कर रहे हैं कि वे जाति और धर्म की राजनीति को ऐसी राजनीति से बदलें, जो जनता की जरूरतों के अनुरूप हो.’

कांग्रेस के इन आरोपों पर कि भाजपा विकास के मुद्दे से हट रही है और केवल आतंकवाद और माफियाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है, प्रियंका ने कहा, ‘मैं इसे बेहद शर्म की बात मानती हूं कि लोग इतनी बड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, वे गुजर-बसर करने में असमर्थ हैं, दैनिक आधार पर संघर्ष कर रहे हैं, बावजूद इसके भाजपा नेता ऐसी चीजों में अपना समय बिता रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘ध्रुवीकरण आखिर है क्या? यह एक खुला राजनीतिक औजार है, जो राजनीतिक दलों को हर मोर्चे पर कमजोर प्रदर्शन करने की छूट देता है.’ कांग्रेस महासचिव ने चुनावी नतीजों से परे उत्तर प्रदेश के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया.

बसपा, भाजपा की ‘बी’ टीम थी तो सपा ने उसके साथ मिलकर चुनाव क्यों लड़ा था: मायावती

बस्ती: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बहुजन समाज पार्टी की तारीफ किए जाने और विभिन्न रानीतिक दलों तथा मीडिया में बसपा को भाजपा की ‘बी’ टीम बताए जाने के बाद पार्टी प्रमुख मायावती ने बृहस्पितवार को कहा कि बसपा अगर भाजपा की ‘बी’ टीम थी तो फिर सपा और कांग्रेस ने पार्टी के साथ मिलकर चुनाव क्यों लड़ा था.

बसपा सुप्रीमो मायावती. (फोटो: पीटीआई)

बस्ती जिले के पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में बृहस्पतिवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा, ‘पश्चिमी यूपी से चुनाव की शुरुआत हुई है और जब से पश्चिमी यूपी के बारे में बसपा के दलितों व मुसलमानों की स्थिति को लेकर गृह मंत्री जी ने जो कुछ कहा है, उसके बाद से मीडिया और विरोधी पार्टियों ने फिर से राग अलपना शुरू कर दिया है कि बसपा, भाजपा की ‘बी’ टीम है.’

उन्होंने कहा, ‘इसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है. यदि बसपा, भाजपा की ‘बी’ टीम होती तो फिर सपा ने यूपी में एक बार विधानसभा का और दूसरी बार लोकसभा का चुनाव बसपा के साथ मिलकर क्यों लड़ा था.’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को एक टीवी चैनल को दिए गए साक्षात्कार में कहा था कि मायावती की जमीन पर अपनी पकड़ तो है मगर यह सीट में कितना बदलेगी, यह उन्हें मालूम नहीं है. शाह ने यह भी कहा था कि जाटव और मुस्लिम वोट बड़ी मात्रा में मायावती के साथ ही जाएगा.

शाह के इस साक्षात्कार के बाद मीडिया में यह अटकल लगने लगी थी कि जरूरत पड़ने पर बसपा भाजपा के साथ गठबंधन कर सकती है.

बसपा की प्रासंगिकता बरकरार रहने संबंधी शाह के बयान के बारे में पूछे जाने पर मायावती ने कहा, ‘यह उनकी महानता है कि वह सच को स्वीकार कर रहे हैं. मैं उनसे यह भी कहना चाहती हूं कि उत्तर प्रदेश में बसपा को न सिर्फ दलितों और मुसलमानों बल्कि अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अगड़ी जातियों के भी वोट मिल रहे हैं.’

बसपा प्रमुख ने अपने जनसभा को संबोधित करते हुए सपा सरंक्षक मुलायम सिंह यादव को भाजपा का मददगार करार दिया.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘2003 में जब वह सरकार से हट गई थीं तो भाजपा के सहयोग से मुलायम सिंह यादव राज्य में सत्ता आए थे, उन्होंने कल्याण सिंह को गले लगाया था, यह सब जनता कैसे भूल सकती है.’

कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी ने भी विधानसभा का चुनाव एक बार बसपा के साथ मिलकर क्यों लड़ा था तथा केंद्र में भी अपनी सरकार के लिए कई बार बसपा का समर्थन क्यों लिया था. इस बारे में मीडिया और कांग्रेस को भी जनता को बताना चाहिए.’

भाजपा सरकार ने हवाई जहाज और हवाईअड्डे बेच दिए: अखिलेश यादव 

इलाहाबाद: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सत्तारूढ़ भाजपा पर हमला बोलते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि भाजपा सरकार हवाई चप्पल पहनने वालों को हवाई सैर कराने की बात करती है, लेकिन उसने हवाई जहाज बेच दिए, हवाईअड्डे बेच दिए, बंदरगाह बेच दिए.

इलाहाबाद में एक रैली के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव. (फोटो साभार: ट्विटर)

शहर से 30 किलोमीटर दूर हंडिया में पॉलिटेक्निक कॉलेज में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार यह सब इसलिए बेच रही है, ताकि उसे लोगों को न तो आरक्षण देना पड़े और न ही नौकरी देनी पड़े. उन्होंने कहा, ‘न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी.’

रोजगार के मुद्दे पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा, ‘सरकार ने पिछले तीन साल से न तो फौज में और न ही पुलिस में भर्ती निकाली. नौजवानों का पांच साल इंतजार में कट गया और अब वे और इंतजार नहीं करना चाहते.’

जिले का नाम इलाहाबाद से प्रयागराज किए जाने पर तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा कि नाम बदलने के बाद यह जिला उतना ही बदनाम हुआ है, चाहे वह कुंभ का घोटाला हो, चाहे नौजवानों पर लाठी चली हो, चाहे यहां के लोगों ने गंगा में बहती हुई लाशों को देखा हो. उन्होंने कहा कि नाम जरूर बदल दिया, लेकिन सरकार ने बदनामी भी उतनी ही कराई है.

डिया विधानसभा सीट पर सपा प्रत्याशी हाकिम चंद्र बिंद के पक्ष में चुनाव प्रचार करते हुए अखिलेश ने कहा कि जब से मतदान शुरू हुआ है, भाजपा के नेता और कार्यकर्ता ठंडे पड़ गए हैं.

जुर्माना भरते-भरते बीत जाएंगी दंगाइयों की पांच पीढ़ियां: योगी

बाराबंकी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकार के शासन में त्योहारों से पहले दंगे शुरू हो जाते थे, लेकिन अब फसाद करने वाले लोग डरे-सहमे हुए हैं कि अगर वे ऐसी कोई हरकत करेंगे तो जुर्माना भरते-भरते उनकी पांच पीढ़ियां बीत जाएंगी.

बृहस्पतिवार को श्रावस्ती में एक जनसभा को संबोधित करते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (फोटो साभार: ट्विटर)

योगी ने रामनगर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी शरद अवस्थी के पक्ष में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘पहले त्योहरों के पहले दंगे शुरू हो जाते थे. अब दंगा करने वाले डरे-सहमे हुए हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि अगर दंगा करेंगे तो उनके पोस्टर चौराहों पर चस्पा हो जाएंगे और जुर्माना भरते-भरते उनकी पांच पीढ़ियां बीत जाएंगी.’

उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में आस्था के साथ खिलवाड़ करने का साहस कोई नहीं कर पाया और आज कोई भी व्यक्ति न तो कांवड़ यात्रा रोक सकता है, न ही मां दुर्गा की पूजा.

योगी ने कहा, ‘हमारी सरकार में जहां दुर्गा जागरण यात्रा निकली तो रामलीला की यात्राएं भी धूमधाम से निकलीं. पिछली सरकारों द्वारा उन्हें रोका जा रहा था. पहले ईद और मोहर्रम पर ही बिजली आती थी, होली और दिवाली पर नहीं. हम बिना भेदभाव के बिजली दे रहे हैं.’

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने बुलडोजर से एक्सप्रेस-वे भी बनवाए हैं और माफिया तत्वों द्वारा अवैध रूप से किए गए कब्जों को भी हटवाया है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में माफियाओं पर एक बार फिर बुलडोजर चलेगा और उनकी अकूत संपत्ति से गरीबों का विकास होगा.

योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने शहरों और गांवों में 24 घंटे बिजली दी है और गरीबों को मुफ्त अनाज मुहैया कराया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले यही राशन समाजवादी पार्टी के माफिया बेच देते थे.

आदित्य ठाकरे ने प्रचार किया, योगी को सत्ता से बाहर करने की अपील

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार की शुरुआत करते हुए शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा और कहा कि उनके शासन के दौरान ‘धर्मों के बीच नफरत’ बढ़ी है और राज्य में अब बदलाव का समय आ गया है.

बृहस्पतिवार को यूपी में सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज में आदित्य ठाकरे ने एक सभा को संबोधित किया. (फोटो साभार: ट्विटर)

ठाकरे ने सिद्धार्थनगर जिले की डुमरियागंज विधानसभा सीट पर जनसभा को संबोधित करते हुए शिवसेना उम्मीदवार शैलेंद्र उर्फ राजू श्रीवास्तव को ‘परिवर्तन का प्रतिनिधि’ करार दिया. ठाकरे इलाहाबाद जिले की कोरांव विधानसभा सीट पर भी एक जनसभा को संबोधित करेंगे जहां से पार्टी ने आरती कोल को मैदान में उतारा है.

शिवसेना के संस्थापक और अपने दादा बाल ठाकरे को याद करते हुए आदित्य ने धर्म के नाम पर समुदायों के बीच नफरत फैलाने तथा अब वापस ले लिए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को ‘माओवादी, चरमपंथी और आतंकवादी’ कहने के लिए केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा पर जमकर निशाना साधा.

31 वर्षीय ठाकरे ने कहा, ‘शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने हमेशा कहा कि राजनीति लोगों के कल्याण के लिए होनी चाहिए. यह शिवसेना की राजनीति में परिलक्षित होती है. शासन धर्म के लिए नहीं बल्कि लोगों के कल्याण के लिए है.’

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य को अगली पीढ़ी के नेता के रूप में पेश किया जा रहा है और वह बृहन्मुंबई नगरपालिका के आसन्न चुनावों में गहरी दिलचस्पी ले रहे हैं.

शिवसेना ने उत्तर प्रदेश चुनाव में 60 उम्मीदवार उतारे थे, हालांकि 41 चुनाव मैदान में हैं, क्योंकि निर्वाचन आयोग ने शिवसेना के 19 उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को खारिज कर दिया था.

आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र सरकार में पर्यटन और पर्यावरण मंत्री हैं, उन्होंने इस बात के लिये खेद जताया कि शिवसेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली राजग सरकार का हिस्सा थी, उन्होंने कहा कि उन्होंने कई गलतियां की हैं.

उन्होंने कहा कि लोगों ने 2017 के उत्तर प्रदेश चुनाव और 2019 के आम चुनावों में भाजपा को भारी जनादेश दिया था.

आदित्य ने कहा, ‘भाजपा ने उन वादों को कभी पूरा नहीं किया जिसका पार्टी ने वादा किया. पार्टी ने केवल घृणा और डर फैलाया. उन्होंने केवल यही बात की कि प्रदेश खतरे में है. यह श्रीराम की धरती है. यहां कोई खतरा नहीं है.’

शिवसेना नेता ने कहा कि आदित्यनाथ के शासन के दौरान धर्मों के बीच नफरत बढ़ी है यह परिवर्तन का समय है.

‘उत्तर प्रदेश की शान, तीर कमान, तीर-कमान’ के नारों के बीच आदित्य ने कहा, ‘आज का मुख्यमंत्री चुनाव के बाद पूर्व मुख्यमंत्री बन जाएगा.’

उल्लेखनीय है कि धनुष-बाण शिवसेना का चुनाव चिह्न है.


पंजाब विधानसभा चुनाव


प्रकाश सिंह बादल को शिरोमणि अकाली दल के दोहरे संविधान के मामले में जमानत मिली

होशियारपुर: पंजाब के होशियारपुर की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को पूर्व मुख्यमंत्री व शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल को पार्टी के दोहरे संविधान के मामले में जमानत दे दी. यह मामला 2009 में उनकी पार्टी के खिलाफ दाखिल किया गया था.

प्रकाश सिंह बादल. (फोटो: पीटीआई)

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) रूपिंदर सिंह की अदालत ने बादल (94) को उस मामले में जमानत दे दी, जिसमें शिकायतकर्ता ने शिअद पर दो अलग-अलग संविधान प्रस्तुत करने का आरोप लगाया था. इनमें से एक संविधान गुरुद्वारा चुनाव आयोग और दूसरा संविधान राजनीतिक दल की मान्यता हासिल करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के समक्ष दाखिल किया गया था.

सामाजिक कार्यकर्ता और शिकायतकर्ता बलवंत सिंह खेड़ा के वकील हितेश पुरी ने कहा कि बादल ने बुधवार को होशियारपुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जेपीएस खुरमी द्वारा पारित अंतरिम जमानत आदेश के अनुसार एसीजेएम की स्थानीय निचली अदालत में एक लाख रुपये की जमानत राशि जमा की.

बादल बृहस्पतिवार को एसीजेएम की निचली अदालत में पेश हुए.

पिछले साल अक्टूबर में यहां की एक अदालत ने शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल को इसी मामले में अंतरिम जमानत दी थी. मामले में आरोप था कि उनकी पार्टी ने मान्यता हासिल करने के लिए निर्वाचन आयोग के समक्ष झूठा हलफनामा दाखिल किया.

मोहाली की अदालत में पेश हुए बिक्रम सिंह मजीठिया

चंडीगढ़: शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए मादक पदार्थों से जुड़े एक मामले में बृहस्पतिवार को मोहाली की अदालत में पेश हुए.

पंजाब में चुनाव प्रचार के दौरान बिक्रम सिंह मजीठिया. (फाइल फोटो: पीटीआई)

अदालत परिसर में प्रवेश करने से पहले बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए मजीठिया ने कहा, ‘माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार मैं मोहाली की अदालत के समक्ष पेश हुआ हूं.’

शीर्ष अदालत ने हाल ही में पंजाब पुलिस को राज्य के पूर्व मंत्री को मादक पदार्थों से जुड़े एक मामले में 23 फरवरी तक गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया था, ताकि वह राज्य में चुनाव प्रचार कर सकें.

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने हालांकि मजीठिया को 20 फरवरी को पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था.

उच्चतम न्यायालय की पीठ ने मामले में आत्मसमर्पण करने के बाद निचली अदालत को मजीठिया की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई और शीघ्र निर्णय लेने का भी निर्देश दिया था.

मजीठिया की गिरफ्तारी पूर्व जमानत याचिका पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 24 जनवरी को खारिज कर दी थी.

शिरोमणि अकाली दल के नेता के खिलाफ पिछले साल 20 दिसंबर को स्वापक औषधि एवं मन-प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद मजीठिया ने जमानत के लिए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की थी.

शिअद के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के बहनोई और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के भाई मजीठिया ने 20 फरवरी को अमृतसर पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था. उनके खिलाफ कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू चुनाव लड़ रहे हैं.


उत्तराखंड विधानसभा चुनाव


चुनाव आयोग ने डाक मत-पत्रों से कथित छेड़छाड़ संबंधी वीडियो पर रिपोर्ट मांगी

देहरादून: उत्तराखंड में डाक मत-पत्रों के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ से संबंधित वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी से इस पर जल्द से जल्द रिपोर्ट मांगी है.

बताया जा रहा है कि यह रिकॉर्डिंग पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र की है.

अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी सी. रविशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि वीडियो पर पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है और उनकी रिपोर्ट मिलने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी.

सेना की वर्दी पहने एक व्यक्ति के कथित तौर पर कई डाक मत-पत्रों पर निशान लगाने और दस्तखत करने संबंधी वीडियो को मंगलवार को ट्विटर पर साझा करते हुए कांग्रेस महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा था कि क्या चुनाव आयोग इसका संज्ञान लेना चाहेगा?

इस बीच, पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह ने बताया कि डीडीहाट से कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप पाल की शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है.

उन्होंने बताया कि वीडियो की सत्यता के बारे में पता लगाया जा रहा है.

इससे पहले डीडीहाट से भाजपा प्रत्याशी और कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने कहा था कि उन्हें यह वीडियो 20-21 फरवरी को मिला था, जिसके बाद उन्होंने डीडीहाट के निर्वाचन अधिकारी और पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी को इसके बारे में अवगत कराते हुए उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया था.

उधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश पार्टी अध्यक्ष मदन कौशिक सहित कई भाजपा नेताओं ने इस वीडियो को ‘फर्जी’ करार दिया है.

धामी ने बुधवार को हल्द्वानी में कहा, ‘यह वीडियो फर्जी है. कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में अपनी संभावित हार को देख लिया है और इसलिए अपना चेहरा बचाने के लिए उसने यह वीडियो वायरल किया है.’

कौशिक ने भी वीडियो ​को ‘फर्जी’ बताते हुए कहा कि इसे कांग्रेस द्वारा सोशल मीडिया पर इसलिए प्रसारित किया जा रहा है, क्योंकि पार्टी जानती है कि विधानसभा चुनावों में वह हार रही है.

वीडियो को सैन्य बलों का अपमान बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी हार का ठीकरा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर फोड़ना चाहती है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)