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यूपी के पत्रकार को गिरफ़्तार किए जाने के मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में हो: एडिटर्स गिल्ड

आगरा के पत्रकार गौरव बंसल को हाल ही में उत्तर प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में कथित तौर पर धांधली की रिपोर्टिंग करने के बाद 15 मार्च को गिरफ़्तार किया गया था. बंसल के वकील का कहना है कि उन्हें पुलिस ने थर्ड डिग्री टॉर्चर किया और अपमानित किया.

(फोटोः रॉयटर्स)

नई दिल्ली: एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने बीते सोमवार को मांग की कि आगरा में एक पत्रकार को गिरफ्तार किए जाने के मामले की स्वतंत्र जांच की जाए और यह जांच अदालत की निगरानी में होनी चाहिए.

गौरव बंसल (39) को हाल ही में उत्तर प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में कथित तौर पर धांधली की रिपोर्टिंग करने के बाद 15 मार्च को गिरफ्तार किया गया था.

संस्था ने एक बयान में कहा, ‘हाल में हुए विधानसभा चुनाव में कथित धांधली की रिपोर्टिंग करने के लिए जिस प्रकार आगरा के पत्रकार गौरव बंसल को गिरफ्तार किया गया और कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया उससे एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया स्तब्ध है.’

बंसल के वकील का कहना है कि उन्हें पुलिस ने थर्ड डिग्री टॉर्चर किया और अपमानित किया.

संस्था ने इसका संज्ञान लेते हुए कहा कि पत्रकार को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए और अदालत की निगरानी में इस मामले की स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए. पुलिस ने बंसल पर सरकारी अधिकारी को कर्तव्य निर्वहन से रोकने का आरोप लगाया है.

गिल्ड ने कहा कि पुलिस ने बंसल पर एक सरकारी अधिकारी को उसकी ड्यूटी में बाधा डालने के लिए दंडात्मक कानून के तहत आरोप लगाया है.

एडिटर्स गिल्ड ने कहा कि उसे इस बात की चिंता है कि पत्रकारों को संवेदनशील मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने से रोकने के लिए दंडात्मक कानूनों का सहारा लिया जा रहा है.

इसने कहा, ‘गिल्ड यह मांग करती है कि राज्य प्रशासन बंसल के साथ ईमानदारी से व्यवहार करे और उन्हें तत्काल रिहा किया जाए. उन्हें प्रताड़ित किए जाने के आरोपों की अदालत की निगरानी में स्वतंत्र जांच की जाए.’

साथ ही गिल्ड ने राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया है कि मीडिया के अधिकारों की रक्षा हो तथा पत्रकारों को उनका काम ईमानदारी से करने दिया जाए.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पीड़ित पत्रकार गौरव बंसल ने बताया कि उन्हें 14 और 15 मार्च की दरम्यानी रात करीब 1 बजे उनके घर से गिरफ्तार किया गया, जब वह सो रहे थे. उन्होंने कहा, ‘अगली सुबह अदालत में पेश नहीं जाने तक महिला पुलिसकर्मियों सहित पुलिस ने मुझे बुरी तरह पीटा था.’

8 मार्च को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के कुछ वीडियो वायरल होने के बाद वह अपने अखबार की कवरेज के लिए मंडी समिति गए थे.

आगरा पुलिस ने बंसल पर एक सरकारी अधिकारी को उसकी ड्यूटी करने से रोकने के लिए दंडात्मक कानून के तहत आरोप लगाया है. बंसल ने एक वीडियो शूट कर शेयर किया था, जिसमें उन्होंने ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था.

बंसल पर 9 मार्च को एत्मादुल्ला पुलिस द्वारा आईपीसी की धारा 147 (दंगा), 149 (गैरकानूनी सभा), 332 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 353 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जान-बूझकर किया गया अपमान) और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

प्राथमिकी में कहा गया है कि बंसल ने 8 मार्च को रात करीब 10 बजे जबरन परिसर में प्रवेश किया और कर्मचारियों पर मतपेटियों को बदलने का आरोप लगाया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)