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हरियाणा: विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा में धर्मांतरण रोधी विधेयक पारित

हरियाणा ग़ैर क़ानूनी धर्मांतरण रोकथाम विधेयक, 2022 के मुताबिक़, डिजिटल माध्यम के उपयोग समेत अगर लालच, बल या धोखाधड़ी के ज़रिये धर्म परिर्वतन किया जाता है तो एक से पांच साल की सज़ा और कम से कम एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.

विधानसभा में मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर. (फोटो: पीटीआई)

चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा ने बल, अनुचित प्रभाव अथवा लालच के जरिये धर्मांतरण कराने के खिलाफ एक विधेयक मंगलवार को पारित किया. कांग्रेस ने विधेयक पर विरोध जताया और सदन से बर्हिगमन किया.

विधानसभा में चार मार्च को पेश किया गया यह विधेयक मंगलवार को चर्चा के लिए लाया गया. इसके मुताबिक, साक्ष्य पेश करने की जिम्मेदारी आरोपी की होगी.

इसी तरह के विधेयक हाल में भाजपा शासित उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में पारित किए गए थे.

हरियाणा गैर कानूनी धर्मांतरण रोकथाम विधेयक, 2022 के मुताबिक, डिजिटल माध्यम का उपयोग समेत अगर लालच, बल या धोखाधड़ी के जरिये धर्म परिर्वतन किया जाता है तो एक से पांच साल की सजा और कम से कम एक लाख रुपये के जुर्माना का प्रावधान है.

इसके मुताबिक, शादी के इरादे से अपना धर्म छुपाने पर कम से कम तीन साल की सजा का प्रावधान है जो बढ़ाकर 10 साल तक की जा सकती है. इस तरह शादी करने का दोषी पाए जाने वाले को कम से कम तीन लाख रुपये का जुर्माना भुगतना होगा.

विधेयक के मुताबिक, सामूहिक धर्मांतरण की सूरत में कम से कम पांच साल की सजा होगी जोकि बढ़ाकर 10 साल तक की जा सकती है तथा कम से कम चार लाख का जुर्माना किया जाएगा.

विधेयक के मुताबिक, जो भी एक नाबालिग या एक महिला अथवा अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति का धर्म परिवर्तन करता है या इसका प्रयास करता है तो उसे कम से कम चार साल जेल का सजा मिलेगी, जिसे बढ़ाकर 10 साल और कम से कम तीन लाख रुपये का जुर्माना किया जा सकता है.

चर्चा के दौरान करीब एक घंटे तक सत्ता पक्ष और कांग्रेस के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली. इसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने बहिर्गमन किया और उनकी अनुपस्थिति में विधेयक पारित किया गया.

इससे पहले, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सदन में कहा, ‘अगर कोई अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन करता है तो हमें कोई दिक्क्त नहीं है. लेकिन, अगर लालच, बल या धमकाकर ऐसा किया जाता है तो दिक्कत की बात है.’

उन्होंने कहा, ‘हमारे कांग्रेस के मित्र भी अपने दिलों में इस बात को महसूस करते हैं लेकिन हर हाल में उन्हें विरोध करना है. आज भी, कांग्रेस के हमारे मित्रों ने गलत को गलत और सही को सही कहने का साहस नहीं दिखाया.’

वहीं, नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि मौजूदा कानूनों में ही जबरन धर्मांतरण कराए जाने पर सजा का प्रावधान है, ऐसे में एक नया कानून लाए जाने की कोई जरूरत नहीं थी.

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता किरण चौधरी ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह हरियाणा के इतिहास में एक काला अध्याय होगा. जबरन धर्मांतरण पर सजा के प्रावधान वाला कानून पहले ही मौजूद है.’

उन्होंने कहा, ‘यह विधेयक सांप्रदायिक बंटवारे को और बढ़ाएगे, यह विधेयक डरावना है. इसके भविष्य में गंभीर परिणाम हो सकते हैं. जिस तरह इस विधेयक को लाया गया, हमने उस पर आपत्ति जताई है.’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रघुवीर सिंह कादियान ने कहा, ‘इस विधेयक को लाने की इतनी कोई जल्दी नहीं थी. इस विधेयक में विभाजनकारी राजनीति की बू आ रही है जोकि अच्छा नहीं है.’

बाद में कांग्रेस सदस्यों ने सदन से कुछ समय के लिए वॉकआउट किया.

बीते चार मार्च को जब विधेयक पेश किया गया तो कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रघुवीर सिंह कादियान ने विधेयक की सामग्री पर अपनी असहमति व्यक्त करने के लिए सदन के पटल पर उसकी एक प्रति फाड़ दी थी.

कादियान ने विधेयक लाने के पीछे की तात्कालिकता पर सवाल उठाया था और इसे पहले प्रवर समिति को भेजने की मांग की थी.

मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा था, ‘विधेयक में किसी धर्म का उल्लेख नहीं है और इसमें केवल जबरन धर्मांतरण का जिक्र है. इसका मकसद जबरन धर्मांतरण को रोकना है. किसी भी व्यक्ति को जबरदस्ती, धमकी या विवाह के जरिये लोगों को धर्मांतरित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.’

मालूम हो कि पिछले साल विधेयक में ‘लव जिहाद’ शब्द को शामिल करने से हरियाणा के सत्तारूढ़ गठबंधन में हलचल पैदा हो गई थी, जब उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा था कि उनकी पार्टी ‘लव जिहाद’ शब्दावली से असहमत है और ऐसे किसी विधेयक का समर्थन नहीं करेगी जिसमें यह शब्दावली प्रयुक्त होगी. उसके बाद विज ने घोषणा की थी कि यह शब्द विधेयक में मौजूद नहीं होगा.

‘लव जिहाद’ संघ परिवार और हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा इस्तेमाल में लाई जाने वाली शब्दावली है, जिसमें कथित तौर पर हिंदू महिलाओं को जबरदस्ती या बहला-फुसलाकर उनका धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम व्यक्ति से उसका विवाह कराया जाता है. अब कई राज्यों में इसके खिलाफ कानून बनाकर इन संगठनों के निराधार दावों को कानूनी रूप देने का प्रयास किया जा रहा है.

हालांकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया है कि उसके पास ऐसे मामलों का कोई डेटा नहीं है. साथ ही जिन 10 राज्यों में यह कानून हाल ही में लाया गया है, उसके बारे में रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसने विभिन्न तरीकों से महिलाओं की स्वतंत्रता को प्रभावित किया है.

पिछले महीने ‘मसौदा समिति’ की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए अनिल विज ने कहा था कि ‘यह कानून अमल में आने पर राज्य में किसी भी व्यक्ति द्वारा बल, प्रलोभन, विवाह के झांसे या किसी अन्य अनैतिक तरीके से धर्म परिवर्तन के किसी भी प्रयास को रोक देगा और  दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.’

हरियाणा से पहले दस अन्य राज्य- जिनमें से अधिकांश भाजपा शासित हैं, इसी तरह के कानून लाए थे. ये राज्य कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड हैं. इनमें से कई जगह इन कानूनों को अदालतों में चुनौती भी दी गई है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)