राजनीति

विपक्ष ने सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने का आरोप लगाया, भाजपा बोली- भारत तेज़ी से बढ़ता देश बना

विपक्ष ने बंदरगाहों को निजी हाथ में सौंपने का आरोप लगाया तो भाजपा ने पोत परिवहन में विकास की बात कही. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकारी क्षेत्र के उद्योगों की हालत बहुत ख़राब है. यह सरकार सरकारी कंपनियों को बेचने में बिल्कुल नहीं हिचक रही है. उद्योग क्षेत्र पर निजी क्षेत्र के लोगों का नियंत्रण हो रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: पीआईबी)

नई दिल्ली: सार्वजनिक उपक्रमों यानी सरकारी कंपनियों के निजीकरण को लेकर लोकसभा में लगातार दूसरे दिन हंगामा बना रहा. जहां विपक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार के इस कदम की आलोचना की है, वहीं भाजपा सरकार का बचाव करते हुए नजर आई.

विपक्ष ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश के प्रमुख बंदरगाहों को कुछ बड़े कॉरपोरेट समूहों के हाथों में सौंप दिया है और मछुआरों के हितों की भी अनदेखी की जा रही है.

दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उठाए गए कदमों और संबंधित कानूनों में जरूरी संशोधन करने से पोत परिवहन क्षेत्र में चौतरफा विकास हुआ है.

इससे एक दिन पहले बुधवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने मध्यम एवं छोटे उद्योगों की मदद से जुड़ी सरकार की नीति पर सवाल खड़े करते हुए लोकसभा में आरोप लगाया था कि सरकार को सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने में हिचक नहीं है.

दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकास करते देशों में शामिल हो गया है.

बृहस्पतिवार को लोकसभा में ‘वर्ष 2022-23 के लिए पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा’ की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने कहा कि हाल ही में आई प्रसन्नता रिपोर्ट में भारत का स्थान 136वां है. इससे पहले वैश्विक भूख सूचकांक और प्रेस की स्वतंत्रतता के सूचकांक में भी भारत का स्थान बहुत पीछे है.

उन्होंने एक कॉरपोरेट समूह का उल्लेख करते हुए कहा कि बंदरगाहों को निजी लोगों को सौंपा जा रहा है.

केरल से ताल्लुक रखने वाले प्रतापन ने कहा, ‘आदिवासी समुदाय के बाद मछुआरा दूसरा ऐसा समुदाय है, जो सबसे ज्यादा उपेक्षित है. उन्हें समुद्री आपदा और कई अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. जब वे मछली पकड़ने जाते हैं तो उनके लिए यह बहुत जोखिम भरा काम होता है.’

उनके मुताबिक, एक मछुआरा परिवार से ताल्लुक रखने की वजह से उन्हें पता है कि उनकी क्या तकलीफें हैं. उन्होंने कहा कि मछुआरों के कल्याण के लिए एक पूरा पैकेज दिया जाना चाहिए.

प्रतापन ने कहा कि सैकड़ों मछुआरे पाकिस्तान, श्रीलंका और इंडोनिशया की जेलों में हैं तथा उनकी बहुत सारी नौकाएं जब्त की जा चुकी हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को कूटनीतिक माध्यमों का उपयोग करके इनकी मदद करनी चाहिए.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘हर साल नदियों को साफ करने के लिए सैकड़ों करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन आज की तारीख में कोई भी नदी स्वच्छ नहीं है.’

चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के दिलीप सैकिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पोत परिवहन क्षेत्र में चौतरफा विकास हो रहा है.

उन्होंने कहा कि समुद्री संस्थाओं को मजबूत बनाया गया है, जिसका नतीजा यह हुआ कि समुद्री व्यापार में भारत का हिस्सा बढ़ा है.

सैकिया ने कहा कि पोत परिवहन से संबंधित कुछ कानूनों में जरूरी संशोधन किए गए, जिससे इस क्षेत्र में भारत की स्थिति बेहतर हुई है.

उन्होंने कहा कि हो सकता है किसी को यह बात रास नहीं आए, लेकिन सात वर्षों में जो काम हुआ है उसे सभी को स्वीकार करना चाहिए.’

सैकिया के अनुसार, सरकार के कदमों के चलते बड़े बंदरगाहो की आय में बढ़ोतरी हुई है. 2014 के बाद समुद्री पर्यटकों की संख्या में बहुत बढ़ोतरी हुई है.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल कूटनीतिक प्रयासों के चलते बांग्लादेश के साथ समझौता हुआ और मालकवाहक जहाज की सेवा आरंभ हुई.

सैकिया ने कहा कि जलमार्ग के जरिये निर्यात को पांच अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है और आशा है कि यह जल्द पूरा हो जाएगा.

सरकार को सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने में हिचक नहीं है: विपक्ष

इससे एक दिन पहले बुधवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने मध्यम एवं छोटे उद्योगों की मदद से जुड़ी सरकार की नीति पर सवाल खड़े करते हुए लोकसभा में आरोप लगाया कि सरकार को सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने में हिचक नहीं है.

दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकास करते देशों में शामिल हो गया है.

लोकसभा में ‘वर्ष 2022-23 के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा’ की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के एंटो एंटनी ने कहा कि सरकार निर्यात के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित करती है, लेकिन उसको पूरा करने के लिए जरूरी कारगर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि चाय, कॉफी, मसाले की पैदावार करने वाले किसानों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है.

एंटनी के अनुसार, रबर अधिनियम के स्थान पर दूसरा अधिनियम लाने के पीछे रबर बोर्ड को कमजोर करने की मंशा लगती है.

उन्होंने कहा, ‘चाय, कॉफी और मसालों की खेती करने वाले किसान मुश्किल का सामना कर रहे हैं. उत्पादन की लागत बढ़ गई है, लेकिन फसल की पूरी कीमत नहीं मिल पा रही है.’

उन्होंने यह भी कहा, ‘प्राकृतिक रबर के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जाएं… सरकार से आग्रह है कि प्राकृतिक रबर के आयात को सीमित किया जाए.’

चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के शिवकुमार उदासी ने कहा कि संप्रग सरकार में नीतिगत पंगुता थी, जिसका असर निर्यात पर पड़ता था, लेकिन इस सरकार में आर्थिक सुधार किए गए जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है.

उन्होंने कहा कि पहले लाइसेंस राज था, लेकिन अब कारोबारी सुगमता के मामले में देश ने लंबी छलांग लगाई है.

उदासी ने कहा कि आज ‘यूनीकॉर्न’ (एक अरब डॉलर की कंपनी) की संख्या के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है.

उनके मुताबिक, सरकार का बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाना दिखाता है कि सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.

भाजपा सांसद ने कहा कि सरकार के कदमों के चलते भारत धीमी गति से विकास करती अर्थव्यवस्था से सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया.

उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के चलते स्टार्टअप की संस्कृति बढ़ रही है. उदासी ने केंद्र सरकार के कई कदमों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘एक नेता वो होता है जो अगले पांच साल के लिए चिंतित रहता है, लेकिन जो दूरदर्शी नेता होता है वो अगली पीढ़ी के लिए सोचता है… प्रधानमंत्री मोदी सामाजिक, राजनीति, सांस्कृतिक और आर्थिक वैज्ञानिक हैं. वह देश की आकांक्षाओं की चिंता करते हैं.’

तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार को उद्योग क्षेत्र की कोई चिंता नहीं है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) को लेकर पश्चिम बंगाल के हाल पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है.

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में आपूर्ति की वैश्विक श्रृंखला में अवरोध पैदा हुआ है, जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए.

बंदोपाध्याय ने कहा कि जो हालात हैं वो विकसित देशों और विकासशील देशों के लिए बहुत मुश्किल नजर आते हैं.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘सरकारी क्षेत्र के उद्योगों की हालत बहुत खराब है. यह सरकार सरकारी कंपनियों को बेचने में बिल्कुल नहीं हिचक रही है. उद्योग क्षेत्र पर निजी क्षेत्र के लोगों का नियंत्रण हो रहा है.’

तृणमूल कांग्रेस के नेता ने कहा, ‘हम जानना चाहते हैं कि सरकार औद्योगिक ढांचे को क्या दिशा देना चाहती है? बड़े, मध्यम और छोटे उद्योगों को स्थापित किए बिना और उन्हें सहयोग दिए बिना रोजगार का सृजन नहीं हो सकता.’

उन्होंने कहा कि सरकार को छोटी, मझोली और बड़ी इकाइयों की मदद करनी चाहिए.