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नगालैंड-मणिपुर सीमा विवादः सीमावर्ती इलाकों में नगा संगठन का लगातार सातवें दिन बंद

यह विवाद नगालैंड और मणिपुर की सीमा से लगे एक वन क्षेत्र ‘केज़ोल्त्सा’ को लेकर हैं. यह सेनापति ज़िले (मणिपुर) के माओ नगाओं और नगालैंड की राजधानी कोहिमा के साउदर्न अंगामी नगाओं के बीच विवाद का विषय रही है. यहां मणिपुर द्वारा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के ख़िलाफ़ साउदर्न अंगामी पब्लिक ऑर्गनाइजेशन ने बंद का आह्वान किया था, जिसके विरोध में ऑल असम मणिपुरी यूथ एसोसिएशन ने भी नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

इम्फालः सीमा विवाद को लेकर रविवार को लगातार सातवें दिन नगा आदिवासी संगठन द्वारा बुलाए गए अनिश्चितकालीन बंद की वजह से मणिपुर-नगालैंड सीमा पर राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर वाहनों की आवाजाही बाधित रही.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मणिपुर की सीमा से सटे इलाकों में रहने वाले अंगामी नगा जनजाति का प्रतिनिधित्व करने वाले साउदर्न अंगामी पब्लिक ऑर्गनाइजेशन (एसएपीओ) ने बीते 21 मार्च को 72 घंटे के बंद का आह्वान किया था.

यह बंद मणिपुर सरकार द्वारा ‘विवादित’ केज़ोल्त्सा क्षेत्र में ‘स्थायी संरचनाओं’ और ‘सशस्त्र कर्मचारियों की तैनाती’ के खिलाफ था.

एसएपीओ के आह्वान के प्रतिक्रियास्वरूप ऑल असम मणिपुरी यूथ एसोसिएशन ने रविवार आधी रात से उसी राजमार्ग के असम हिस्से में अनिश्चितकालीन नाकेबांदी का ऐलान कर दिया है.

यह कहा गया कि यह नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक एसएपीओ नगालैंड के हिस्से वाले राजमार्ग से बंद वापस नहीं ले लेता.

केज़ोल्त्सा नगालैंड और मणिपुर की सीमा से लगा जुकोउ घाटी के पास एक वन क्षेत्र हैं. यह घाटी सेनापति (मणिपुर) के माओ नगाओं और कोहिमा (नगालैंड) के साउदर्न अंगामी नगाओं के बीच विवाद का विषय रही है.

कोहिमा के साउदर्न अंगामी नगाओं का दावा है कि केज़ोल्त्सा अंगामी जनजाति पैतृक जमीन का हिस्सा है और इसे गलत तरीके से औपनिवेशिक युग में अंग्रेजों ने मणिपुर (सेनापति जिला) का हिस्सा बना दिया था.

एसएपीओ ने 23 मार्च को कहा था कि मणिपुर सरकार से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर 72 घंटे का बंद अनिश्चितकालीन बंद में तब्दील कर दिया जाएगा.

बता दें कि राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर पड़ने वाला केज़ोल्त्सा नगालैंड को मणिपुर से जोड़ता है. यह असम से भी होकर गुजरता है. इस बंद के बाद से मणिपुर जाने वाले सभी यात्री और सार्वजनिक यात्रियों, मालवाहक वाहनों के लिए प्रवेश और निकासी प्रतिबंधित है.

सेनापति जिला प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि इस नाकेबंदी से मणिपुर को होने वाली सप्लाई का मार्ग संभावित रूप से बाधित हो सकता है.

अधिकारी ने कहा, ‘इस नाकेबंदी से मणिपुर के यात्रियों को कुछ असुविधा हो सकती है, लेकिन स्थिति अभी इतनी गंभीर नहीं है, क्योंकि इससे अभी सप्लाई प्रभावित नहीं हुई है. हालांकि, अगर इस मामले को नहीं सुलझाया गया तो इससे बड़ी आर्थिक नाकेबंदी हो सकती है.’

उन्होंने कहा, ‘इस सड़क को मणिपुर की जीवनरेखा के रूप में जाना जाता है. यहीं से जरूरी सप्लाई मणिपुर में की जाती है.’

साउदर्न अंगामी पब्लिक ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष केविपोडी सोफी ने कहा कि जब तक मणिपुर विवादित क्षेत्र से अपने सुरक्षाकर्मियों को नहीं हटाता, तब तक संगठन इस बंद को वापस नहीं लेगा.

उन्होंने कहा, ‘नगाओं के रूप में हम हमारी पारंपरिक सीमाओं का पालन करते हैं. ये राजनीतिक सीमाएं हमारी पारंपरिक सीमाओं को नहीं हटा सकतीं. हम केवल उसी पर दावा कर रहे हैं, जो हमारा है.’

एसएपीओ का यह भी दावा है कि उन्होंने मणिपुर सरकार से सुरक्षाकर्मियों को हटाने का अनुरोध करने के लिए कई कदम उठाएं, लेकिन इसके बावजूद मणिपुर सरकार से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली और इस वजह से हम यह कदम उठाने को मजबूर हुए.

वहीं, मणिपुर (सेनापति) के माओ समुदाय के एक नेता ने एसएपीओ की इस मांग को हास्यास्पद करार देते हुए कहा है कि केज़ोल्त्सा मणिपुर का हिस्सा है.

इस बीच मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने शनिवार को विधानसभा को बताया कि इस मामले को राज्य स्तर पर सुलझाया जाएगा और राज्य सरकार ने एक आधिकारिक पत्र नगालैंड के मुख्य सचिव को भेजा है.