राजनीति

राज्यसभा में मुस्लिम विरोधी नफ़रती भाषण का मुद्दा उठा, सभापति ने समुदाय का नाम हटाने को कहा

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने तृणमूल कांग्रेस की सुष्मिता देव, लुइजिन्हो जोआकिम फ्लेरियो और मोहम्मद नदीमुल हक़ के साथ बढ़ती कीमतों और मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रती भाषणों के साथ पत्रकारों के उत्पीड़न का मसला उठाया था.

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने छह अप्रैल को देशभर के विभिन्न हिस्सों में मुस्लिमों के खिलाफ दिए जा रहे नफरती भाषण का मुद्दा उठाया.

उन्होंने हाल ही में बुराड़ी में हुई हिंदू महापंचायत का भी उल्लेख किया, जहां हिंदुत्ववादी नेता यति नरसिंहानंद ने जमानत शर्तों का उल्लंघन कर एक बार फिर लोगों से हथियार उठाने को कहा था.

खड़गे ने सुष्मिता देव, लुइजिन्हो जोआकिम फ्लेरियो और तृणमूल कांग्रेस के मोहम्मद नदीमुल हक के साथ बढ़ती कीमतों और नफरती भाषणों के मुद्दे पर नियम 267 के तहत नोटिस दिया.

हालांकि, जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि उन्होंने नियम 267 के तहत इन मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं दी.

खड़गे ने जोर देकर कहा कि वह सिर्फ एक वाक्य कहना चाहेंगे और नायडू ने उन्हें बोलने की अनुमति दी.

खड़गे ने कहा, ‘सर, मैंने देशभर में बढ़ रहे नफरती भाषणों के मामले बढ़ने के संबंध में नियम 267 के तहत नोटिस दिया है और इसके साथ ही पत्रकारों के उत्पीड़न विशेष रूप से हिंदुस्तान गजट, न्यूजलॉन्ड्री, द क्विंट, आर्टिकल 14 आदि के पत्रकारों के उत्पीड़न को लेकर नोटिस दिया है. यह चला आ रहा है और स्वामी (यति नरसिंहानंद) हरिद्वार से लेकर दिल्ली तक भड़काऊ भाषण दे रहे हैं.’

खड़गे ने हिंदू महापंचायत का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि रविवार (तीन अप्रैल) को एक स्वामी ने कहा कि सभी मुस्लिमों को मार देना चाहिए.

इस पर नायडू ने निर्देश दिया, ‘यह रिकॉर्ड में नहीं जाएगा. किसी भी समुदाय का नाम रिकॉर्ड में नहीं जाएगा.’

सभापति ने कहा, ‘अगर उन्होंने अर्थहीन शब्द भी कहे हैं तो हमें उनके शब्दों को नहीं कहना चाहिए. इसे दोबारा सदन में उठाना और फिर इस पर चर्चा करना कि किसने क्या कहा है. इससे समस्या का हल नहीं होने वाला. मैंने इसकी अनुमति नहीं दी है.’

उन्होंने कहा, ‘किसी को भी किसी भी समुदाय के खिलाफ फिर चाहे वह अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक नफरती भाषण नहीं देना चाहिए. समुदायों का नाम नहीं लेना चाहिए और किसी को भी किसी के भी खिलाफ भाषण नहीं देना चाहिए.’

बता दें कि यति नरसिंहानंद गाजियाबाद के डासना मंदिर में उनके संबोधन से लेकर हरिद्वार धर्म संसद तक अपने मुस्लिम विरोधी भाषणों और गतिविधियों की वजह से नियमित तौर पर विवादों में रहे हैं.

हरिद्वार धर्म संसद के बाद उन पर मुस्लिमों के खिलाफ लोगों को हथियार उठाने का आह्वान करने के बाद मामला दर्ज किया गया था. हिंदुत्ववादी समर्थकों द्वारा शेयर किए गए वीडियो में उन्हें मुस्लिमों के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर धमकी देते देखा जा सकता है.

ताजा घटनाक्रम दिल्ली के बुराड़ी का है, जहां पुलिस की मंजूरी के बिना हिंदू महापंचायत का आयोजन किया गया और नरसिंहानंद और अन्य के संबोधनों के बाद मामला दर्ज किया गया.

उत्तर पश्चिमी दिल्ली की डीसीपी उषा रंगनानी ने इस मामले पर बयान जारी कर कहा था, ‘डासना मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद सरस्वती, सुदर्शन न्यूज के चीफ एडिटर सुरेश चव्हाणके सहित कुछ वक्ताओं ने दोनों समुदायों के बीच वैमनस्य, शत्रुता और द्वेष की भावनाओं को बढ़ावा देने वाले बयान दिए.’

बुराड़ी हिंदू महापंचायत में शामिल कई पत्रकारों से भी कथित तौर पर मारपीट की गई और उनका उत्पीड़न किया गया, जिसके बाद आईपीसी की धारा 323 (स्वेच्छा से किसी को चोट पहुंचाना), 341 (गलत तरीके से रोकना), और 354  (महिला की गरिमा भंग करना) के तहत मामला दर्ज किया गया.